आहुति – विनोद साँखला

” भला ऐसे भी कोई अपनी जान थोड़े ना दे देता है, ज़रूर इसका शहर में किसी ना किसी के साथ कोई टांका ज़रूर भिड़ा होगा..” मिसेज़ चौबे ने अपनी राय दी। ” हाँ-हाँ बहनजी मैंने भी सुना है की शहर में रहकर शराब भी पीने लगी थी” मिसेज़ बघेल ने भी हाँ में हाँ … Read more

चलो न बुआ! – Moral Stories In Hindi

रमा जी नहीं चाहतीं कि रक्षाबंधन का पर्व आए, न इस वर्ष न कभी भविष्य में! पिछले साठ सालों से जिसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बाँध ये त्योहार मनाती आ रही थीं, उसने तो, बिना कोई इशारा दिए, सब नाते तोड़ लिए! अब किस काम का रह गया ये दिन ….. सिवाय दर्द देने के! … Read more

राखी का तोहफ़ा – प्रेम बजाज

ये उन दिनों की बात है जब करोना की महामारी फैली थी और बहुत से लोगों की नौकरी भी छूट गई थी, हमारे पड़ोस में रहने वाले रमेश की भी नौकरी छूट गई,  जैसे-जैसे समय बीता थोड़ा सा कुछ जमापूंजी थी सब खत्म हो गया, खाने तक के लाले पड़ गए, 5-6 महीनों में बूरा … Read more

रक्षक – कमलेश राणा

एक दिन हम स्कूल से लौट रहे थे कि एक जगह भीड़ देख कर रुक गए,,वहां लोग अधेड़ उम्र के पुरुष को पीट रहे थे,,   पूछने पर पता चला कि  वह रेल्वे स्टेशन के पास बने छोटे से होटल पर चाय पी रहा था,,अभी-अभी पैसेंजर से उतरा था,,वो एक बड़ा सा बोरा लिये था … Read more

ससुराल का सरनेम – डॉ पारुल अग्रवाल

आज दिव्या बहुत परेशान थी, रह-रहकर उसे अपनी चाची सास का व्यवहार बहुत कचोट रहा था।असल में हुआ ऐसा था उसकी ससुराल जहां थी वहां पर एक बहुत बड़ा सामाजिक आयोजन हुआ था जिसमें दिव्या को भी सम्मानित किया जाना था। दिव्या शादी से पहले भी पढ़ाई- लिखाई में काफी अच्छी थी और एक अच्छे … Read more

सूनी कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र* –       बालेश्वर गुप्ता

 माँ, तुम ठीक तो हो ना?आज रक्षाबंधन है, पर मेरी तो कोई बहन ही नही है, अब तक हमेशा कलाई सूनी ही रही है माँ, दूसरे लोगो के हाथ मे राखी और बाजार में अपनी बहनों के लिये खरीदते लोगो को देख, मेरा तो दिल मुरझाया ही है।पर माँ इस बार मेरा हाथ राखियों से … Read more

 वादा राखी का – बेला पुनीवाला

 डॉली का घर आज सुबह से सजाया जा रहा था, जैसे दिवाली पे घर सजाते है। डॉली के माँ-पापा और डॉली की भाभी, सब लोग आज बहुत ही खुश थे। डॉली ने अपनी माँ को चिढ़ाते हुए कहा, ” वाह, मम्मी क्या बात है, आज रसोई से सुबह से ही बहुत ही अच्छी-अच्छी खुशबु आ … Read more

इंसानियत जिंदा है अभी! – प्रियंका सक्सेना

आज सबमिशन की डैडलाइन थी, प्रोजेक्ट हैड होने के कारण सुनंदा की जिम्मेदारी थी। सुनंदा जल्दी जल्दी अपना काम निबटा रही थी, एक नजर घड़ी पर देख उसके हाथ और तेजी से कम्प्यूटर पर चलने लगे। शाम के सात बज चुके थे, फटाफट सभी फाइलें भेजी फिर क्लाइंट का कन्फर्मेशन आने के बाद उसने चैन … Read more

माँ जाये –  दीप्ति सिंह

    सारा  कुनबा  एक  ही  शहर  में  बसा  होने  के कारण  बुआ जी  दोनों  ताऊओं  को  राखी  बाँध कर  आ  गयी  थीं।मैंने  भी  अपने  भाई  विजय  व भाभी  को  राखी  बाँधी  और  बुआ  जी  ने  पिताजी -माँ  को।  कुछ  देर  बाद  बड़े  ताऊजी  के  बेटे  श्याम भईया अपनी  बहन  मीता दी  और  रमा भाभी  ,दोनों … Read more

  बारिश का महीना – बेला पुनीवाला

  बारिश का महीना चल रहा था और दोस्तों, आप सब तो जानते ही है, कि बारिश का महीना  खुशियों के साथ-साथ तूफान भी लाता है, कोई बारिश के मौसम में घर पे चाय और पकोड़े खाने का मज़ा ले रहा है, तो छोटे-छोटे बच्चे कागज़ की नाव बनाकर उसे पानी में बह जाने देते है … Read more

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