भाइयों के लिए – निभा राजीव “निर्वी”
दिव्या की आंखें रह-रहकर भर आ रही थी। इसी साल उसने अपने फौजी भाई को खो दिया था। उसका भाई पूरी वीरता के साथ देश के लिए लड़ते हुए सीमा पर शहीद हो गया था। तिरंगे में लिपट कर आया था उसका शव! आंखें नम हो गई थी पर मस्तक गर्व से उन्नत ! ऐसी … Read more