आत्मसम्मान – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

  जवाब न देना सम्मान था पर खुद के हक के लिए लड़ना आत्मसम्मान हां आत्मसम्मान,यही तो कह गए थे बाबा कि बेटा सब कुछ सहना पर आत्मसम्मान पर आंच आए तो एंडी चोटी का जोर लगाकर सच साबित कर देना ,ताकी आगे से कोई उंगली उठाने की हिम्मत न करें।वरना ,तुम नहीं जानती अबला … Read more

बेटे की इज़्ज़त इज़्ज़त और बहू की ? –  संगीता अग्रवाल

नितिका ने हॉस्पिटल से निकल राहत की सांस ली मानो कितने सालों से जो सांस अटकी थी वो अब आई हो..उसने जल्दी से ऑटो पकड़ा और घर को रवाना हुई । ऑटो मे बैठ उसने सिर पीछे टिका दिया …अतीत की कितनी बाते चलचित्र सी घूमने लगी सामने जिन्हे याद कर कभी उसके चेहरे पर … Read more

एक और अवसर – पायल माहेश्वरी

लड़की देखने व दिखाने की पंरपरा हमारे देश में बहुत पुरानी हैं,हर पंरपरा के पीछे कुछ रिवाज व भावनाएँ छिपी रहती हैं, पर कुछ लोग ये नहीं समझते और जाने अनजाने ही सही पंरपरा के नाम पर दूसरे की भावनाओं व आत्मसम्मान को चोट पहुंचाते हैं, आज ऐसी ही एक कहानी आपके सामने प्रस्तुत हैं। … Read more

आत्मसम्मान – मीनाक्षी सिंह

आत्मसम्मान कहने को तो छोटा शब्द हैं   पर इसका मतलब बहुत बड़ा है!मेरी शादी सन्न 2014 में हुई थी !मेरे पिताजी  फौज में सूबेदार थे! सन्योग से मेरे पिताजी को लड़का भी  रिश्तेदारी में ही मिल गया जिस से घर में ख़ुशी का माहोल था !मैं जैव प्रौद्योगिकी में एमएससी करके बीएड कर रही … Read more

रिश्तों का मूल्य – कुमुद मोहन

मम्मी! बार बार फोन करके मुझे परेशान मत किया करें! नम्रता जी का बेटा अमन लंदन से फोन करके कह रहा था”आप आधा घर किराए पर दे दें आपकी सिक्युरिटी भी रहेगी और महीने के पैसे भी आते रहेंगे! और सर्वेंट क्वार्टर में एक फैमली वाले को रख लो जिससे आपको डामेस्टिक हैल्प भी हो … Read more

खुद्दार – नम्रता सरन “सोना”

  “दादाssss” मम्मी की चीख से सारा घर गूंज उठा। सभी दौड़े आए, वहां का दृश्य देखकर हृदय फट गया, जोधपुरी सूट में दादा का निर्जीव शरीर पड़ा था।  “ओह, दादा ने बात अपने दिल पर ले ली”मम्मी ने रुंधी आवाज़ में कहा। सोना की आंखों के सामने बीते कल का दृश्य एक झटके में … Read more

आत्मसम्मान – तृप्ति शर्मा

सुमि आज बहुत उदास थी। जिन बच्चों की परवरिश की खातिर उसने छोटे से छोटा काम किया । दुत्कारे सही ,अपशब्द सहे ,आज उन्हीं दिल के टुकड़ों को सुमि पर शर्म आ रही थी । कम उम्र में लंबी बिमारी के चलते पति को खो दिया था सुमि ने । सुमी की तो जैसे दुनिया … Read more

 बस अब और नहीं…  – संगीता त्रिपाठी

“तू इतनी देर से आ रही राधा वो भी दो दिन बाद,कभी तो समय पर आ जाया कर “कहते हुये गुस्से से मैंने राधा को देखा।” ये क्या तेरा चेहरा इतना सूजा क्यों हैं,ये कटे होंठ… क्या बात हैं राधा। “कुछ नहीं दीदी”..राधा ऑंखें चुराते बोली।”नहीं कोई बात तो हैं और तू इतनी देर कैसे … Read more

बहरूपिये – विजय शर्मा “विजयेश”

गली में तेज-तेज आवाजों का शोर सुनकर मेरा ध्यान अपने लेखन  से भंग  हो गया। खिड़की में से झाँक   कर  देखा  तो  एक बहरूपिया  नजर  आया । वह  राक्षस  का मुखौटा लगाए था और उसके सर पर  सींग लगे हुए थे। काले लबादे  में  बहुत डरावना और  हुँकार  भरता  वह मुझे बहुत रोचक  प्रतीत  … Read more

 नीरज – नीलिमा सिंघल

नीरजा की शादी उसके माता-पिता ने लड़के वालो की मर्जी से की थी और शादी करके उसको भूल ही गए थे जैसे,,,साथ के साथ ही गौना भी करके विदा कर दिया,,उसके बाद उसको कभी नहीं बुलाया। नया घर नए लोग नये रिवाज सब निभाते हुए नीरजा के दिन बीत रहे थे । शादी के 20 … Read more

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