कैसा था यह संघर्ष* – अर्चना नाकरा

पापा मुझे बहुत कुछ करना है’ हम दोनों बहनें, देखना कुछ करके दिखाएंगी!! और ‘रमेश मुस्कुरा देते” रश्मि भी यही कहती ‘मेरी दोनों बेटियां मेरी आंखों का तारा है’ लेकिन बड़ी की जिद थी और वो ‘उस धुन पर पूरी उतरती चली गई’ ‘टॉप किया  था ट्वेल्थ में’ कॉलेज में एडमिशन लिया, फर्स्ट ईयर में … Read more

बाईमाँ और सांवरा – पायल माहेश्वरी

आदरणीय पाठकों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं, इस आधुनिक युग में भगवान और भक्त के सच्चे रिश्ते को दर्शाने वाली मेरी यह रचना अवश्य पढ़कर अपने अमूल्य विचार व्यक्त करें। गंगश्याम जी मंदिर राजस्थान के जोधपुर शहर के परकोटे में स्थित प्राचीन व भव्य कृष्ण मंदिर हैं, और बाईमाँ जो अस्सी वर्षीय वयोवृद्ध औरत थी … Read more

हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की” – अनुज सारस्वत

घर में जन्माष्टमी की तैयारी चल रही थी ,फल खीरे ,कूटू का आटा, सिंगाड़ी का आटा, मूंगफली दाना घर में आ चुके थे, सुशीला और उसकी 16 वर्षीय बेटी अनु विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने में व्यस्त थी, जैसे गोले की पंजीरी ,चोलाई की पंजीरी, मावे की पंजीरी, सूखे मेवे की पंजीरी और धनिया का … Read more

बेहतर – मधुसूदन शर्मा

हर नौकरी पेशा की सुबह लगभग एक जैसी ही होती है। उठते ही एक कप चाय, फिर प्रातः कर्मों से निवृत्ति, अंत में नाश्ता कर, तैयार हो ऑफिस के लिए भागा दौड़ी। मैं भी कोई अपवाद नहीं हूं। “साहब जी !  जूते पॉलिश कर दिए हैं।” डाइनिंग टेबल से नाश्ता कर उठते उठते मोहन की … Read more

बच्चे फूल हैं – कहानी-देवेंद्र कुमार

सुबह का समय। छुट्टी का दिन था। अभी सूरज पूरी तरह उगा नहीं था। सैलानी बाग में सैर कर रहे थे। हल्की हवा बदन पर अच्छी लग रही थी। पेड़-पौधों के पत्ते और टहनियों पर झूलते सुंदर सुगंधित फूल धीरे-धीरे हिल-डुल रहे थे जैसे आपस में बातें कर रहे हों। फूलों की मीठी-मीठी खुशबू हवा … Read more

सुहाना सफर – विजया डालमिया

मेरी जिंदगी की एक ही कहानी है और वह कहानी है  सिर्फ तुम।इस कहानी का एक ही किरदार है और वो  किरदार हो तुम।मैं कभी-कभी सोचती हूँ कि इस सफर की मंजिल क्या है ?क्या इस रात की कोई खूबसूरत सुबह नहीं? क्या इस ख्वाब की कोई ताबीर नहीं ?अच्छा यह बताओ क्या कभी जागते … Read more

परख – भगवती सक्सेना गौड़

हरीतिमा से अचानक मेट्रो में उंसकी पुरानी सखी मिल गयी। पहले तो दोनो ध्यान से देखकर पहचानने की कोशिश करती रही फिर, रवीना ने हाथ बढ़ाते हुए कहा, “हरीतिमा हो ना, मेरी आँखें धोखा नही खा सकती।” “सही पहचाना, कैसी हो।” “बढ़िया।” रवीना ने कहा, “मैं तो कॉलेज जा रही, प्रोफ़ेसर हूँ तुम कहाँ जा … Read more

अनोखा नशा – रणजीत सिंह भाटिया

इंडिया जाने से पहले छोटे भाई हरजीत को फोन पर  बताया कि  ” मैं और तुम्हारी भाभी आ रहे हैं घर की सफाई अच्छी तरह से करवा देना ” उसने कहा ” भाई साहब आप फिकर ना करें मैं सब करवा दूंगा घर पहुंचकर देखा तो हैरान रह गया…!! सारा घर शीशे  की तरह चमक … Read more

गरीब का आत्मसम्मान – डॉ पारुल अग्रवाल

सर्वोदय कॉलोनी शहर का एक संभ्रांत इलाका। जहां अधिकतर काफी पढ़े लिखे उच्चस्तरीय परिवार रहते थे। ऐसे ही एक बड़ी सी कोठी थी,जज रवि माथुर जी की। रवि माथुर जी अपनी पत्नी रजनी जी और दो बच्चों के साथ रहते थे। पत्नी ज्यादा पढ़ी लिखी तो नहीं थी पर अपने पति की उच्च सरकारी नौकरी … Read more

ममता – मृदुला कुशवाहा

डॉ. अविनाश तेज गति से कार चला रहे थे । साथ में बैठी उनकी पत्नी नेहा और चार साल का बेटा विनय कुरकुरे और चिप्स खा रहे थे।  अविनाश बोला ,” यार नेहा ! तुम भी ना विनय के साथ कभी कभी बच्चा बन जाती हो। “ नेहा हँसी और बोली ,” अविनाश जी ! … Read more

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