वो आई……(हास्य व्यंग रचना) – डॉ उर्मिला सिन्हा

  ‘वो’आपको यत्र तत्र सर्वत्र मिल जायेंगी। बागों में , बहारों में , गलियों में , चौबारे में, गांव में, शहर में , स्कूल में, कालेज में। उनकी परिचय देने की जरूरत नहीं है वे अपने आप में परिचय है। चांदनी से उन्होंने गोरा रंग चुराया है। फूलों की कोमलता , परागों की सुरभि , हवाओं … Read more

मेरा नाम भी तो है – पुष्पा पाण्डेय

जब भी डाॅक्टर साहब के घर ज्यादा काम होता है तो  कस्तुरी अपनी बेटी को भी बुला लेती थी। उसको भी आराम होता था और मेमसाहब भी कहती हैं कि बुला लो। रविवार होने से वह घर पर ही रहती थी। बाकी दिन तो स्कूल जाना होता था। कस्तुरी की बेटी अंजलि पढ़ने में होशियार … Read more

सीधी गंगा – नीरजा कृष्णा

आज सुबह से ही दादीजी का आलाप चालू था। मीनू का कॉलेज में दाखिला हो गया था। वो जोर शोर से कॉलेज जाने की तैयारियां कर रही थी। उसकी गुनगुनाहट उनके कानों में जहर सा घोल रही थी। बहू सीमा भी बहुत खुश होकर सुबह  की व्यस्तताओं में मगन थी। उसने अचानक बेटे रोहित को … Read more

पुरुषीय -नैतिकता – शिखा कौशिक ‘नूतन’

”हत्यारे को फांसी दो …फांसी दो …..फांसी दो …!!!” के नारों से शहर की गली गली गूँज रही थी .अपनी ही पत्नी की हत्या कर सात हिस्सों में लाश को काटकर तंदूर में भून डालने वाले विलास को फांसी दिए जाने की वकालत समाज का हर तबका कर रहा था . विलास की दरिंदगी का … Read more

बिखरते अरमान – विनोद सांखला “कलमदार”

दुपहिया एवं कार डेकोर व्यवसायी नरेश जी अक्सर अपनी दुकान पर आए दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट खरीदने हेतु  प्रेरित किया करते, कभी-कभी तो लागत मूल्य में भी ग्राहकों को हेलमेट बेच दिया करते, पिताजी की यह आदत 20 वर्षीय राघव को बिल्कुल भी पसंद नहीं आती, वह अक्सर कहा करता..!! ~ क्या पापा आप … Read more

मेरे पापा  – बेला पुनीवाला

            मुझे आज भी याद है, जब मैं छोटा था, तबसे मैं  थोड़ा ज़िद्दी था, मुझे जो भी चाहिए वो मैं लेकर ही रेहता था, अगर मुझे मेरी चीज़ ना मिले तो मैं पूरा घर सिर पे उठा लेता था, माँ भी कितना समझाती थी मगर मैं  किसीकी नहीं सुनता। मेरे दोस्त के पास जो … Read more

जीवन की आशा –   अभिलाषा “आभा”

मै कुछ दिनों के लिए सूरत आई हूंँ,अपने दूसरे बेटे पंकज के पास रहने के लिए। बड़ा बेटा पटना में रहता है। उसकी बहू पूनम से मेरी बनती ही नहीं। बड़ी मुश्किल से 3 महीने रह पाई उसके पास। अब ये छोटी रागिनी तो उससे भी तेज़ है। पंकज के साथ ही बैंक में नौकरी … Read more

अनजाने शहर मे जब कोई अपना सा लगे – मनीषा भरतीया 

मीनू जब 10 साल की थी, उसके माता-पिता की एक   एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। देख भाल करने वाला कोई था नहीं तो मामा मामी अपने साथ ले आए  बस तभी से मामी की जली कटी बातें सुनकर मीनू बड़ी हो रही थी। मीनू घर का सारा काम करती, झाड़ू पोछा करना, बर्तन … Read more

 एक शिक्षक का भी आत्म सम्मान होता है, – सुषमा यादव

मैं जैसे ही स्कूल आई तो देखा, बड़ा ही गमगीन माहौल है, सबके चेहरे उतरे हैं,, मैंने एक नज़र सबको देखा और पूछा, क्या हो गया है? , ऐसे सब कैसे मुंह लटकाकर बैठे हैं,,सभी स्टाफ वाले एक साथ बोल पड़े, मैडम, ट्रान्सफर लिस्ट आ गई है,, इसमें कुछ के नाम छोड़ कर सबका नाम … Read more

 भाई के होने से ही मायका होता है – प्रियंका सक्सेना 

भार्गव जी और भारती  जी की छोटी पुत्री अर्चना  अपने नाम के अनुरूप पवित्र ह्रदय और मन की निश्छल युवती है। बड़ी बेटी शमिता की शादी हो चुकी है।  शमिता का ससुराल इसी शहर में है। वह पंद्रह बीस दिनों में मिलने घर आ जाती है। भार्गव जी और भारती  जी ने  शमिता को पोस्ट … Read more

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