अनकहे शब्द – प्रेम बजाज : Moral stories in hindi

आज मैं कुछ नही कहना चाहती , कुछ भी नहीं। क्यों कहूँ …??? हाँ जिस प्यार को , जिस अपनेपन को तरसती रही उम्र भर आज वो बिन माँगे मिल रहा है। बजाज साहब (पतिदेव ) अपनी गोद मे सर लेके बैठै है , बच्चे भी (बेटा-बहु ) सब के सब अपना काम-काज छोड़ कर … Read more

चाइल्ड अब्यूज – प्रेम बजाज

  करोना की वजह से स्कू्ल बंद थे, और सभी क्लासेज आनलाइन ही चल रही है। रिया 8वीं की छात्रा माता-पिता दोनों नौकरी की वजह से रिया की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते। रिया शुरू से ही मैथ में ठीक-ठाक थी, पहले तो आफिस के बाद जब पापा घर आते तो थोड़ी देर उसे … Read more

रिश्ते – अंजू निगम

दीवार घड़ी ने नौ बजाये| श्वेता की घबराहट बढ़ रही थी|”जब वो जानती थी कि पापाजी की याददाश्त कमजोर पड़ रही हैं तो यूँ उन्हें अकेले चले जाने की बात वो टाल क्यों न पाई? लाख वो जिद पर अड़े रहते,पर जब सुदेश भी दो दिनो के लिए शहर से बाहर हैं तो उसे पापाजी … Read more

सज़ा – डा. नरेंद्र शुक्ल : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : “तुम्हारा नाम क्या है?” कटघरे में खड़े खूँखार से दिखने वाले मुज़रिम से सफाई वकील ने पूछा। “विक्की उस्ताद,” मुज़रिम ने होंठ चबाते हुये कहा। “तो तुमने कलक्टर साहिबा पर गोली चलाई?” “हाँ, चलाई गोली…,” विक्की उस्ताद ने सीना तानकर कहा। “मगर क्यों?” सफाई वकील ने पूछा। विक्की जज साहिबा … Read more

बेटियों के सुखो का त्याग लेता समाज – मंजू तिवारी

अभी हाल में ही रक्षाबंधन के मौके पर प्रेरणा का अपने मायके जाना हुआ वह कभी भी रक्षाबंधन पर अपने मायके नहीं जाती थी क्योंकि वह दो बहने है। घर में कोई भाई नहीं है। आना-जाना रक्षाबंधन पर पर उसके लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता है। इस बार न जाने क्यों पापा के बहुत … Read more

अनदेखा अनोखा अनमोल त्याग –  नीतिका गुप्ता 

निशा; बारात बस आने ही वाली होगी…. ले यह जीजी के कंगन….. जीजी हमेशा कहती थीं ,”यह कंगन तो बस मैं मेरी निशा को ही दूंगी”…ले संभाल जीजी की अमानत…. अपने लहंगे के दुपट्टे से वह अपनी आंखों के कोर को साफ कर रही थीं। उफ मौसी; अगर तुमने यह रोना-धोना मचाया ना…. मैं नहीं … Read more

उम्र का आखिरी पड़ाव – राजीव रावत : Short Moral Stories in hindi

Short Moral Stories in Hindi : नंदिता बिटिया की विदा होने के बाद धीरे धीरे सभी मेहमान एक एक करके चले गये थे। तीनों बेटे भी अपने अपने परिवार केसाथ अपनी अपनी जगह चले गये थे। बस उस सूने घर में रवि और अल्का ही रह गये थे। अलका चुपचाप उदास बैठी थी तभी रवि … Read more

पिता का उपहार – बेला पुनीवाला

    एक दिन  राधिका के लिए बहुत अच्छा रिश्ता आया था, इसलिए राधिका के मना करने के बावजूद भी उसके पापा ने उसकी शादी तय कर दी। राधिका ने अपने पापा को कहा,  राधिका : अभी तो मेरा b.com भी कम्पलीट नहीं हुआ, कॉलेज का आख़री साल ही चल रहा है, सिर्फ़ 6 महीने ही बाकि … Read more

अज्ञात लेखिका – कविता भड़ाना

छोटी छोटी कहानियां लिखने वाली मैं एक अदना सी लेखिका हूं। पर आजकल जो भी लिखती हूं, वो ना जाने क्यों सच हो जाता है। अब तो अपने ही लेखन से डर सा लगने लगा है, कौन सी ऐसी शक्ति है जो जबरदस्ती अपनी मनमर्ज़ी का लिखाने लगती है मुझ से, अभी कुछ देर पहले … Read more

मैं का त्याग – गुरविंदर टूटेजा

गौरव ने बताया कि जेठ जी अपने परिवार के साथ आ रहें है तो निधी टेन्शन में आ गयी…साल में एक बार वो आतें ही हैं मम्मीजी से मिलनें…जेठ जी की नौकरी बहुत अच्छी थी तो जेठानी जी जब भी आती तो उनके नखरें अलग ही होते थे….ये चद्दर ऐसी क्यूँ है…आ रो का पानी … Read more

error: Content is protected !!