अपनो की पहचान – खुशी : Moral Stories in Hindi

आदित्य एक बिज़नेस मेंन था। उसके माता-पिता का देहांत  17 18 वर्ष की उम्र में होने के कारण रिश्ते के नाम पर दूर के चाचा चाची थे जो माता पिता के अंतिम संस्कार के बाद यही रुक गए और चाची कमला अपने आपको इस घर की मालकिन ही समझने लगी। आदित्य भी सोचता की चलो … Read more

कैसी सजा – देवसेना दुत्ता : Moral Stories in Hindi

रीमा आरू से फोन पर बात कर रही थी।आरू अपने घर की और बच्चों की बातें कर रही थी। खुशियां,शिकायतें और छोटी-छोटी ढेरों बातें।बातें आज की होते-होते पुराने समय तक पहुंच गई। आरू ने अपनी 25वीं शादी की सालगिरह पर उसे न्योता देने के लिए फोन किया था। शुभकामनाएं देते हुए रीमा ने आने का … Read more

अहंकार

सुषमा जी तनीषा को समझाती रहतीं—“छोटी बहू, इतना अहंकार अच्छा नहीं है। अगर अपनी जेठानी को थोड़ा सा सम्मान दे दोगी तो कुछ बिगड़ेगा नहीं। मौका पड़ने पर रुपया-पैसा नहीं, व्यवहार काम आता है।” लेकिन तनीषा पर इन बातों का कोई असर नहीं पड़ता। उसे अपना बाहर जाकर कमाई करना और बड़े घर की बेटी … Read more

अपनो की पहचान – नीरज श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

कभी-कभी जीवन में परिस्थितियाँ एक सी नहीं होती। कभी उतार तो कभी चढ़ाव लगा ही रहता है। जीवन के इसी उतार चढ़ाव ने आज नीरज को एक नई सीख दे डाली थी। कौन अपना, कौन पराया की परिभाषा नीरज नहीं बल्कि वक्त लिख रहा था।              नीरज पिछले दस सालों से एक ही हॉस्पिटल में काम … Read more

नाक का सवाल – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

देखिए जी कहे देती हूं गृहप्रवेश की पार्टी में जूलियस कैटरर को ही बुक करेंगे मेघा जी ने प्रसून जी से दृढ़ स्वर में कहा। जूलियस कैटरर !!हाईएस्ट प्राइज है उनकी मेघा।क्यों उतना खर्चीला लेना जब उससे बहुत कम में ही दूसरे काम करने को तैयार हैं प्रसून जी ने समझाने के स्वर में कहा। … Read more

अपनों की पहचान – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

देखो मां.. आपके मना करने के बाद भी यह नीरज आज फिर ठाकुर साहब की हवेली में गया था। तुम भी हमेशा भाई के पीछे पड़ी रहती हो।क्यों नीरज ..अब तुम्हीं बताओ क्या राधा सच कह रही है? हां मां.. उनके बाग में बहुत सारे अमरूद के पेड़ हैं। इस समय तो जैसे उन पर … Read more

काकी – नीरज श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

“अरे अब हमारा पिंड क्यों नहीं छोड़ती। ना जाने ये बुढ़िया कब मरेगी? यमराज भी न जाने कहाँ जाकर बैठ गये हैं? रोज़ किसी ना किसी को तो लेकर जाते हैं। अगर इस बुढ़िया को ही लेकर चले जाते तो उनका क्या बिगड़ जाता? इसके रोज-रोज के नखरे से तो मैं तंग आ चुका हूँ। … Read more

बच्चे भी सब समझते है – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

विभा अपने कमरे में बेचैन होकर इधर-उधर घूम रही थी। जैसे-जैसे समय व्यतीत हो रहा था, उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। कभी सोचती — आज शाम ही नहीं होता, कभी सोचती — रमेश ऑफिस से कहीं टूर पर चले जाते तो अच्छा रहता। उसकी सोच पर कोई लगाम ही नहीं था। कुछ-कुछ सोच रही … Read more

कब बदलेगा नज़रिया

आकांक्षा महत्वाकांक्षी थी, मेहनती थी और अपने करियर को लेकर हमेशा गंभीर रहती थी। MBA करने के बाद उसे एक कंपनी में नौकरी मिली, और इसके लिए उसे दूसरे शहर जाना पड़ा। वहाँ उसने एक पी जी लिया, जहाँ वह एक लड़की के साथ कमरा शेयर करती थी। सहेली भी नई थी, किसी और कंपनी … Read more

अपना अस्तित्व – संगीता अग्रवाल

“कमला आज रागिनी की पसंद का खाना बनाना तुम!” राज अपनी घरेलू सहायिका से बोला। ” पर साहब मेमसाहब की पसंद क्या है ? आप बता दीजिये मुझे मुझे तो अभी चार दिन ही हुए आये मैं कैसे जानूँ !” कमला बोली। ” रागिनी को बैंगन आलू और पापड़ की सब्जी बहुत पसंद है तुम … Read more

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