एक़ यादगार सफर – राशि रस्तोगी

ट्रेन में भीड़ होने की वजह से बैठने की जगह भी नहीं मिल रही थी..भीड़ होती भी क्यूँ ना, लोग दिवाली मनाने के लिए अपने अपने पैतृक शहरों में जाने के लिए आतुर जो थे..मैंने देखा मेरा रिजर्वेशन जोकि वेटिंग में था, कन्फर्म ना होने की वजह से कैंसिल हो चुका था.. क्यूंकि ऑनलाइन रिजर्वेशन … Read more

‘ अपमान बना वरदान ‘ – विभा गुप्ता 

सुनंदा ने ट्राॅलीबैग में अपने सभी कपड़े रखे, स्कूल-काॅलेज के मार्कशीट के साथ-साथ सभी प्रतियोगिताओं के सर्टिफिकेट भी रख लिए और बैग को बंद करने से पहले उसने एक नज़र पूरे कमरे पर डाली जहाँ छह बरस पहले सोमेश उसे ब्याह कर लाए थे।सोमेश के साथ अपने सुखद भविष्य के जो अनगिनत सपने उसने सजाए … Read more

कोयल की कूक – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

कभी ऐसा हुआ आपके साथ? जब आप हर जगह से थक कर एकांत की तलाश में भटक रहे हों, किसी वीरान जगह में पहुँच गए हों? चारों तरफ़ सन्नाटा पसरा हो और अचानक से महुआ के पेड़ पर बैठी कोयल कूकने लगे। आपका सारा ध्यान कोयल अपने तरफ़ आकर्षित कर लेगी और आपको पता भी … Read more

गुरुवे नम:  – गुरुवे नम: -किरण  केशरे

सूरज मेडिकल से डा. के लिखे दवा और इंजेक्शन लेकर आया और नर्स के हाथों में थमा दिये। नर्स तेजी से ओटी में चली गई,,,, कुछ घण्टों के पश्चात रामनाथ जी को रूम में शिफ्ट कर दिया गया था  ।  रामनाथ जी होश में आए तो पत्नी गीता जी पास में बैठी दिखी। और सामने … Read more

*दत्तक* – *नम्रता सरन ‘सोना”*

माँ की यादोँ मे खोया मनुज कार ड्राईव कर रहा था।आँखों से अश्रुधार बह रही थी।माँ उसे एक बार देखने की इच्छा मन में लिए परलोक सिधार गईं, कितनी कोशिश के बावजूद भी वह माँ के अंतिम संस्कार पर समय से नही पहुंच पाया।बार बार यही बात उसके दिल को कचोटती है।उसके बाद विदेश से … Read more

वह दर्दनाक मंजर – कमलेश राणा

जल ही जीवन है पर अति हर चीज़ की बुरी होती है,,, प्रकृति का यह वरदान वर्षा ऋतु में में जब नदियों के तटबंध को तोड़कर आबादी वाले हिस्सों में प्रवेश कर जाता है तब इसका स्वरूप कितना विनाशकारी होता है,, यह तो भुक्तभोगी ही बता सकता है,,  तिनका तिनका जोड़ कर बनाई गृहस्थी जल … Read more

अब अपमान बर्दाश्त नहीं – वीणा

सुमित्रा ने सोंठ के लड्डू, काजू-किशमिश, गाय के दूध से निकाला शुद्ध घी सब अटैची में भर लिया था। बहू की पहली जचगी थी, सुमित्रा और रामनाथ दोनों बहुत खुश थे। बेटा डॉक्टर था, इसलिए चिंता की कौनो बात नहीं थी लेकिन शहर में जाकर पता नहीं तुरन्त घरेलू चीज़ें मिले की नहीं, इसीलिए उसने … Read more

शर्मिन्दगी.. – रीटा मक्कड़

अतीत की स्मृतियों में डूबते उतरते रहने वाली सविता को अक्सर ये घटना याद आती रहती थी।ज़िन्दगी में कुछ घटनाएं या यादें ऐसी होती हैं जो इन्सान के मानस पटल पर हमेशां के लिए अंकित हो जाती हैं और भुलाए से भी नही भूलती… तब वो सातवीं कक्षा में गई थी स्कूल का पहला दिन … Read more

“अंतर्द्वंद” – ऋतु अग्रवाल 

  “माँ! मुझे आपसे कुछ कहना है।” अंकिता ने रसोई घर में काम कर रही सुरभि से कहा।       “हाँ,बोलो बेटा।”       “माँ! वो मैं……..” अंकिता चुप हो गई।       “बोलो, बेटा! इतना झिझक क्यों रही हो?” सुरभि ने अंकिता के चेहरे पर नजरें गड़ाते हुए कहा।       “माँ, मुझसे एक गलती हो गई।”अंकिता ने एक अल्पविराम लिया।      सुरभि एकटक … Read more

मृगमरीचिगा – आरती झा आद्या

तू क्यूं नहीं समझ रही है रक्षा, शादीशुदा है वो। जिंदगी बर्बाद हो जाएगी तेरी.. रक्षा के ही दफ्तर में काम करने वाली सुरम्या उसे समझा रही थी। पता नहीं तुझे उससे क्या दिक्कत है सुरम्या। कितना तो ख्याल रखता है मेरा। जब मुझे प्रिय कहकर संबोधित करता है तो ऐसा लगता है जैसे वो … Read more

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