सुंदरता व्यवहार में होती है – संगीता त्रिपाठी

  सलोनी अपने हाथों की रंगबिरंगी चूड़ियाँ देख मुग्ध हो रही थी, “ये तुम्हारे ऊपर नहीं बड़ी बहू संजना के उजले हाथों में अच्छी लगेगी “सासु माँ की व्यंग भरा स्वर सुन सलोनी का चेहरा अपमान से काला पड़ गया। कुछ ना बोल वो वहाँ से हट गई, उसी समय उमेश ऑफिस से लौटा था दरवाजे … Read more

एडजस्टमेंट – गीतांजलि गुप्ता

इस शहर में रमिक की बदली हुए एक साल हो गया। सरकारी बैंक में बड़े पद पर जिम्मेदारी के साथ परिवार को सुविधाएं भी अधिक मिलती हैं। आज छोटी ननद मिलने आ रही थीं यूँ कहो दिसम्बर की छुट्टी बिताने आ रही थीं। सारा दिन उनके लियें व्यवस्था करने में बीत गया। उनका स्वभाव भी … Read more

‘उस दिन’ [ एक पाती ] – प्रतिभा पाण्डे

मैडम अभिवादन की औपचारिकता निभाए बग़ैर मैं आगे बढूँगा क्योंकि अभिवादन के सारे शब्द मिलकर भी आपके प्रति मेरी भावना को व्यक्त नहीं कर पाएँगे। आज से पच्चीस साल पहले का वो दिन आज भी मेरी यादों में ऐसे ही ताज़ा है जैसे कल की ही बात हो। समय की पर्तों को उठाकर उस दिन … Read more

निमित्त मात्र – *नम्रता सरन “सोना”*

“नीरु…ये लो गोखरू का कांटा… इसे चार लीटर पानी में डालकर तब तक उबालना जब तक यह पानी एक लीटर बचे….” सुहास ने अपनी पत्नी से कहा। “पता है मुझे… आप कोई पहली बार तो नहीं बनवा रहे हैं ये काढा… अब किसके लिए…? नीरु ने सुहास से पूछा। “अरे यार… हमारे ऑफिस में मिश्रा … Read more

चुगलखोर – विनय कुमार मिश्रा

एक नई नौकरी और.. फिर से एक नया शहर! पर इसबार फैमिली को अपने पास नहीं रख सकता, छोटी बेटी दसवीं कक्षा में है तो मेरी पत्नी उसी के साथ वहीं है, बड़ी बिटिया इंजीनियरिंग कर रही है, तो वो एक दूसरे शहर में है। यहां इस नए शहर में घर की बड़ी दिक्कत है, … Read more

और नहीं बस और नहीं – सुषमा यादव

दोस्तों, अपशब्दों से किया गया अपमान हमारे मनमस्तिष्क पर बहुत गहरे छाप छोड़ते हैं, और इसका असर हमारे दिलों दिमाग पर एक लंबे समय तक बना रहता है, अपमान जनक बातें हमारे दिल में चुभती हैं, जो एक तमाचे की तरह होती है जिसकी गूंज हमें सुनाई तो नहीं देती है पर ये तमाचा एक … Read more

एक़ यादगार सफर – राशि रस्तोगी

ट्रेन में भीड़ होने की वजह से बैठने की जगह भी नहीं मिल रही थी..भीड़ होती भी क्यूँ ना, लोग दिवाली मनाने के लिए अपने अपने पैतृक शहरों में जाने के लिए आतुर जो थे..मैंने देखा मेरा रिजर्वेशन जोकि वेटिंग में था, कन्फर्म ना होने की वजह से कैंसिल हो चुका था.. क्यूंकि ऑनलाइन रिजर्वेशन … Read more

‘ अपमान बना वरदान ‘ – विभा गुप्ता 

सुनंदा ने ट्राॅलीबैग में अपने सभी कपड़े रखे, स्कूल-काॅलेज के मार्कशीट के साथ-साथ सभी प्रतियोगिताओं के सर्टिफिकेट भी रख लिए और बैग को बंद करने से पहले उसने एक नज़र पूरे कमरे पर डाली जहाँ छह बरस पहले सोमेश उसे ब्याह कर लाए थे।सोमेश के साथ अपने सुखद भविष्य के जो अनगिनत सपने उसने सजाए … Read more

कोयल की कूक – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

कभी ऐसा हुआ आपके साथ? जब आप हर जगह से थक कर एकांत की तलाश में भटक रहे हों, किसी वीरान जगह में पहुँच गए हों? चारों तरफ़ सन्नाटा पसरा हो और अचानक से महुआ के पेड़ पर बैठी कोयल कूकने लगे। आपका सारा ध्यान कोयल अपने तरफ़ आकर्षित कर लेगी और आपको पता भी … Read more

गुरुवे नम:  – गुरुवे नम: -किरण  केशरे

सूरज मेडिकल से डा. के लिखे दवा और इंजेक्शन लेकर आया और नर्स के हाथों में थमा दिये। नर्स तेजी से ओटी में चली गई,,,, कुछ घण्टों के पश्चात रामनाथ जी को रूम में शिफ्ट कर दिया गया था  ।  रामनाथ जी होश में आए तो पत्नी गीता जी पास में बैठी दिखी। और सामने … Read more

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