विंडो सीट भाग – 4 – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral Stories in Hindi

“क्या सुरभि ने उसे माफ़ कर दिया?” उसने स्क्रीन को देर तक देखा। उस ‘like’ में न कोई सवाल था, न कोई जवाब, पर समीर के लिए यह एक इशारा था — कि उसकी बात वहाँ पहुँच गई है जहाँ वह पहुँचाना चाहता था। उस रात दोनों ने अपने-अपने शहर में चैन की नींद सोई। … Read more

विंडो सीट भाग – 3 – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral Stories in Hindi

समीर : जब ट्रेन चलने लगी, मैंने खिड़की के पार से देखा — तुम अब भी मुझे देख रही थी। जैसे मन ही मन कह रही हो — “अब और इंतज़ार नहीं। अब कोई शिकवा नहीं। बस… अलविदा।” मैंने तुमसे बहुत कुछ कहा… मगर शायद जो सबसे जरूरी था, वो कह ही नहीं पाया।   इसलिए … Read more

विंडो सीट भाग -2 – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral Stories in Hindi

 जो कहा नहीं गया — समीर की जुबानी विंडो सीट पार्ट -1 : वर्षों बाद एक रेलयात्रा में सुरभि और समीर आमने-सामने आते हैं। कभी एक-दूसरे से गहरे जुड़े ये दो लोग अब अजनबियों की तरह मिलते हैं । सुरभि के मन में अब भी कई अनकहे प्रश्न हैं, और समीर की आँखों में गहरा … Read more

विंडो सीट भाग -1 -अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral Stories in Hindi

गर्मियों की छुट्टियों के समय कन्फर्म सीट मिलना कोई आसान बात न थी। भतीजी की सगाई एकदम से तय हो गयी थी, सो जाना भी जरूरी था। विनय को ऑफिस से छुट्टी न मिल पायी थी। एक-दो दिन में आने का वायदा कर उसने सुरभि को जयपुर से चलने वाली जयपुर – चिन्नेई एक्सप्रेस में … Read more

अलविदा – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 निधि की बेटी शिप्रा बहुत बीमार थी। 6 वर्ष की छोटी सी आयु में दिल की बीमारी, डॉक्टर साहब ने कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा, 7 8 लाख रुपए का खर्च आएगा।      निधि ने अपने ऑफिस में बात की, काम नहीं बना। बॉस ने साफ इनकार कर दिया। रिश्तेदारों का तो कहना ही क्या, मायके … Read more

मायके का हक़ 

रश्मि फोन पर अपनी माँ से शिकायत भरे स्वर में बोली—“माँ, घर की सफ़ाई और काम करते-करते थक गई हूँ। कभी लगता है इस घर में मैं बस एक नौकरानी हूँ। मेरी थकान किसी को दिखाई ही नहीं देती। सोच रही हूँ कि कुछ दिन मायके आ जाऊँ। बच्चों को भी साथ ले आऊँगी। वहाँ … Read more

शिक्षक – ऋतु गुप्ता खुर्जा  : Moral Stories in Hindi

शहर का फुलवारी नाम का बड़ा सा हॉल आज तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब एक बड़ी आईटी कंपनी के मालिक देव ने नामी यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड शिक्षक मित्तल सर द्वारा सम्मान प्राप्त किया।मित्तल सर ने जब देव को पहचानने की कोशिश की तो देव ने पुरानी यादों से उन्हें रूबरू कराया। उसने बताया … Read more

आप अपने बेटे के साथ क्यों नहीं रहते – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

मयंक ने जेब्रा क्रासिंग पर कार धीमी की तो देखा एक बुजुर्ग छड़ी के सहारे धीरे धीरे चलते हुए सड़क पार कर रहे थे! सूरत कुछ जानी पहचानी सी लगी तो मयंक कार एक तरफ खड़ी कर उन्हें सड़क पार कराने की नीयत से उनके पास गया! मयंक को देखकर उन्होंने सर ऊपर कर चश्मा … Read more

सही या गलत – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral Stories in Hindi

सूर्योदय वृद्धाश्रम में सुबह की हल्की धूप और ठंडी हवा के बीच आज एक नया सदस्य आया था। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्तियों पर गिर रही थीं, और हवाओं में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी। अक्सर जब भी कोई नया सदस्य वृद्धाश्रम में आता है, थोड़ा  घबराया और उदास दिखाई देता है क्योंकि … Read more

अपनो की पहचान – खुशी : Moral Stories in Hindi

आदित्य एक बिज़नेस मेंन था। उसके माता-पिता का देहांत  17 18 वर्ष की उम्र में होने के कारण रिश्ते के नाम पर दूर के चाचा चाची थे जो माता पिता के अंतिम संस्कार के बाद यही रुक गए और चाची कमला अपने आपको इस घर की मालकिन ही समझने लगी। आदित्य भी सोचता की चलो … Read more

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