*पहला प्यार* – तोषिका

अर्शी चलो जल्दी से आकर अपना खाना खा लो उसके पापा रजत किचेन से आवाज लगाते हुए बोले। अर्शी जो स्कूल से बस आई ही थी, उत्सुकता से अपने पापा से पूछती है पापा आज मुझे मेरी क्लास के लड़के ने चाकलेट दी है, इसका मतलब वो मुझसे प्यार करता है। रजत निर्मल स्वर में … Read more

पहला प्यार – एम. पी. सिंह

बात बहुत पुरानी हैं लेकिन यादें एकदम ताज़ा. ये बात हैं जब में कॉलेज में था, मेरी क्लास में एक लड़की ने एडमिशन लिया, नाम था सरिता, उसे देखते ही मुझे प्यार हो गया. सरिता सुन्दर, सिंपल और कम बोलने वाली लड़की थीं और बस काम से काम रखती थीं. मैं मन ही मन उससे … Read more

पहला प्यार – प्रतिमा पाठक

कभी-कभी जीवन में कुछ मुलाक़ातें शोर नहीं मचातीं, बस मन में चुपचाप जगह बना लेती हैं। नेहा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। बस एक सादा-सा एहसास, जो धीरे-धीरे गहराता चला गया। नेहा शहर के सरकारी कॉलेज में पढ़ती थी। रोज़ वही बस, वही रास्ता, वही भीड़। लेकिन उस भीड़ में एक चेहरा … Read more

रिश्ते अधिकार से नहीं करूणा से निभते हैं। – परमा दत्त झा

नहीं चाचाजी हमारे साथ रहेंगे -यह करूणा थी जो अपने पति से लड़-झगड़कर उन्हें रखना चाहती थी जबकि उसका पति करूणेश उन्हें गांव भेजना चाहता था। ठीक है कहकर करूणेश अपने माता-पिता को लेकर गांव चला गया जबकि विजयी भाव से करूणा अपने पापा को फोन करने लगी। अरे यह क्या किया?-उस बूढे को क्यों … Read more

पहला प्यार – खुशी

दोस्तों प्यार एक ऐसा शब्द है जो किसी के जीवन में आये तो उसकी दुनिया बदल देता है सच्चा हो तो जीवन को स्वर्ग बनाता है और झूठा हो तो नर्क पर ये प्यार का मौसम है तो कहानी भी रूमानी सी होनी चाहिए। राज का बचपन का सपना था कि मैं आर्मी ऑफिसर बनूंगा।वो … Read more

सोने का दिल – अर्चना खंडेलवाल

*”हम अक्सर जिसे ‘कबाड़’ समझकर घर के कोने में फेंक देते हैं, मुसीबत के वक्त वही तिनका हमारी डूबती हुई नाव का सहारा बनता है। पढ़िए एक ऐसी सास की कहानी जिसने अपनी ‘कंजूसी’ से अपने बच्चों की दुनिया खरीद ली।”* “मम्मी जी, प्लीज! अब इस पुराने, जंग लगे लोहे के संदूक को स्टोर रूम … Read more

वंश का अभिमान – रश्मि प्रकाश

*समाज कहता था कि जिसका अपना खून नहीं, वह वारिस कैसा? लेकिन उस सास ने भरी पंचायत में अपनी बहू के आंसू पोंछकर साबित कर दिया कि माँ बनने के लिए कोख की नहीं, कलेजे की ज़रूरत होती है।* “राघव, आप दूसरी शादी कर लीजिये,” सुमन ने सिसकते हुए कहा। “मैं नहीं चाहती कि मेरी … Read more

**साजिशों के बीच पनपा विश्वास** – शुभ्रा बनर्जी 

*”एक सास ने हीरे की अंगूठी चुराकर रिश्तों में कांच की दरार डालनी चाही, पर उसे नहीं पता था कि उसकी बहुओं का विश्वास उस हीरे से भी ज्यादा खरा और अटूट है।”* रसोई घर से आती खिलखिलाहट की आवाजें गायत्री देवी के कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रही थीं। वह अपने … Read more

संस्कारों का मोल – आरती झा

*लिबास की चमक आँखों को धोखा दे सकती है, लेकिन संस्कारों की खुशबू रूह में उतर जाती है। देखिये कैसे एक सास ने दुनिया के ताने को अपनी समधन के सम्मान में बदल दिया!* “ये मेरी समधन, सावित्री जी हैं। अवनि आज जो कुछ भी है—इतनी समझदार, इतनी सहनशील, और घर को जोड़कर रखने वाली—ये … Read more

**खून के रिश्ते से बड़ा दिल का रिश्ता** – करुणा मलिक

*दुनिया की हर माँ अपने बेटे की ढाल बनती है, लेकिन वो माँ विरली ही होती है जो अपनी बहू के आत्मसम्मान के लिए अपने ही बेटे के खिलाफ तलवार बन जाए।* सावित्री जी उठीं और मेघा के पास जाकर खड़ी हो गईं। उन्होंने मेघा का हाथ अपने हाथ में लिया। वह हाथ कांप रहा … Read more

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