सही फैसला – विजया डालमिया

यूँ  तो अरसा बीते बिछड़े हुए,फिर क्यों आज दर्द दिल पर याद बनकर दस्तक दे रहा है। मैं तो अकेले ही  तन्हाई की सूनी  पगडंडी पर चल पड़ी थी। मँजिल व सुकून की तलाश में ।खुद से अपनी मुलाकात करने ।एक पहचान बनाने  क्योंकि संजू के साथ रहकर मैंने अपने आप को ही खो दिया … Read more

पितृदोष – ऋचा उनियाल बोंठियाल

“अरेsss ओ sss साहब, टिकट !” तेज़ आवाज़ से नरेश की तंद्रा टूटी। उसने हड़बड़ा कर देखा, सर पर कंडक्टर खड़ा था और उसे ही घूर रहा था। “ओह !! माफ करना भैया मेरा ध्यान कहीं और था …ये रहे टिकेट, एक मेरा और एक इनका, अपनी मां वसुंधरा जी की तरफ़ इशारा करते हुए … Read more

लालगंज की शेरनी – सुषमा यादव

#अहंकार  कुछ लोगों के मन में अहंकार कूट कूट कर भरा रहता है,, फिर वो चाहे संपत्ति का अंहकार हो,बेटे का हो या अपने बल और रूप सौन्दर्य का,,, ये अहंकार हमें कहीं का नहीं छोड़ता, एक दिन हमें नेस्तनाबूद कर देता है,, अंहकार तो बड़े बड़े लोगों को धूल चटा गया,हम सब तो मामूली … Read more

 एक्जिक्युटिव शैफ !! – पायल माहेश्वरी

“मैं आपकी पत्नी होने के साथ-साथ किसी की बेटी भी हूँ” लावण्या अपने पति एक्जिक्युटिव शैफ अमित से बोली। ” ना मैं आपको हारते हुए देखना चाहती हूँ और न ही मेरी मम्मी को हारते हुए देखना चाहती हूँ, आप दोनों मेरे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हो “लावण्या की आखों में आँसू थे। लावण्या … Read more

नशा अमीरी का – कुमुद मोहन

“सुनिये!आज सुबह की ट्रेन से सीमा जीजी आ रहे ही हैं उन्हें लेने मैं स्टेशन चली जाऊं?”रीमा ने अपने बिज़नेस मैन पति मुकेश जिन्हें अपने पैसे का बहुत गुमान था से पूछा?” मुँह सिकोड़कर मुकेश ने जवाब दिया”हुंह?क्या यार तुम्हारे रिश्तेदारों को ट्रेन से चलने की बड़ी बुरी आदत है!मेरा तो ड्राइवर भी कतराता है … Read more

पितृ मुस्कुरा उठे – रीटा मक्कड़

नोट.. इस रचना का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही है कृपया कोई भी अन्यथा ना ले।   मेरे सास ससुर हमेशां दूसरों के लिए दयाभाव रखने वाले थे। अपने द्वार पर आने वाले किसी जरूरतमंद को उन्होंने कभी खाली हाथ नही लौटाया था।दिल खोल कर दान भी करते थे। जब तक हम … Read more

वो वृद्ध स्त्री !! – पायल माहेश्वरी

” कोई अंदर हैं, दरवाजा खोलो मुझे सहायता की आवश्यकता हैं ?” दरवाजे पर एक स्त्री की आवाज सुनाई दी। रात के ग्यारह बजे थे और कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी मैं आवाज सुनकर घबरा गयी थी। ” इतनी रात को कौन हो सकती हैं?”मन में आशंका जन्म लेने लगी। दरवाजे पर दस्तक गहरी … Read more

पिंड दान – डॉ अंजना गर्ग

“हेलो , हेलो राकेश कल सुबह नो साढ़े नो के बीच जरूर आ जाना। मोनू को तो लाना ही है इस बार बहू को भी लाना। काम है।” शीला ने कहा। ” ठीक है मां।” राकेश ने कहा।  इतने में मां शीला ने फोन रख दिया। राकेश ने महसूस किया है अब काफी दिनों से … Read more

समझदार कौन – कमलेश राणा

यह कहा जाता है कि मानव मस्तिष्क ईश्वर की बनाई हुई सर्वश्रेष्ठ कृति है जो उसे अन्य प्राणियों से अलग करती है,, उसकी सोचने समझने की शक्ति, फैसला लेने की ताकत और आवश्यकतानुसार अविष्कार की क्षमता बेजोड़ है,, लेकिन अधिकांश मनुष्य अपनी इस काबिलियत को नज़रअंदाज़ करके न केवल अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे … Read more

ये वादा रहा….. रश्मि दास

आज सरभी की शादी थी। मगर सुरभि बहुत उदास हो डरी हुई थी। पिछली बातें याद आ रही थी जब वह अपनी मां मां बाप के साथ एक खुशनुमा जिंदगी जी रही थी। ऐक एक्सीडेंट में उनके मां बापा की मृत्यु हो गई और सुरभि की सारी दुनिया ही जैसे उजर के रह गई। ऐक … Read more

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