झूठा अहंकार ” – सीमा वर्मा

‘ ओह … माँ, आप भी ना !   न जाने किस जमाने की बातें कर रही हैं  ?  कहाँ मैं इतनी पढ़ी-लिखी ,होशियार, सीनियर बैंक प्रबंधक और कहाँ वह साधारण बी .ए पास प्राइवेट स्कूल का टीचर ‘सुशांत’ कहीं से भी कोई बराबरी दिखती है हम दोनों में ?  वो तो आपके कहने में आकर … Read more

करुण अन्त – डा. मधु आंधीवाल

नन्हीं सी परी उतरी है , आज मां के द्वार, सब कर रहे थे , उसका इन्तजार पापा की नन्ही गुड़िया , मां की थी परछाई, भाई का दुलार थी , दादी का अभिमान, परी होती गयी बड़ी, सुकोमल काया  रूप का खजाना , मां पापा का सपना  अपनी गुड़िया को बनाना था दुल्हन, देखा … Read more

वो गर्वीले पल‌‌‌! – -प्रियंका सक्सेना

‘अहा,कितने खूबसूरत पल‌ थे वो मेरी ज़िन्दगी के! आइए आपको भी ले चलती हूॅ॑ मेरे साथ, उन‌ पलों को जी लेती हूॅ॑ एक बार फिर….   मैं कलकत्ता के इंस्टिट्यूट ऑफ़ हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ से डिप्लोमा इन डायटीशियन कर रही थी।मैं बात कर रही हूँ सन् १९९२ की, कोलकाता उस समय कलकत्ता के नाम … Read more

 अहंकार हुआ चूर-चूर – अनु अग्रवाल

लक्ष्मी निवास में आज सुबह से ही चहल-पहल थी….हो भी क्यों न…. आखिर…घर के इकलौते वारिस चिराग की शादी की तैयारियां जो चल रहीं थीं……….घर मेहमानों से भर चुका था….आज हल्दी का कार्यक्रम था। तभी कामिनी जी(चिराग की  माँ) ने सबकी नज़रों से बचकर अपनी भाभी नम्रता को कमरे में चलने का इशारा किया…. “भाभी……..ये … Read more

 अहंकार टूट गया – गीता वाधवानी

कानपुर में ममता जी का संयुक्त हंसता खेलता परिवार। दो बेटे अमित और सुमित। बड़े बेटे अमित की पत्नी सीमा और दो बेटे खुश और राहुल। छोटे बेटे सुमित की पत्नी रेखा और उनकी दो बेटियां साधना आराधना। ममता जी के पति सुधांशु जी का कुछ समय पहले ही देहांत हो गया था। पूजा पाठ … Read more

परिंदे-कहानी-देवेंद्र कुमार

===== राजकुमार अभय का जन्मदिन निकट आ गया है। एक महीना पहले से ही जन्मदिन समारोह की तैयारियाँ होने लगी थीं। पूरा नगर किसी नई नवेली दुल्हन की तरह सजा दिया गया था। हर दिन नृत्य-संगीत की महफिल जमती थी। न जाने कहाँ-कहाँ से कलाकार बुलाए गए थे। जन्मदिन का भव्य समारोह राजधानी के बीचोंबीच … Read more

श्राद्ध की खीर – ऋतु गुप्ता

ह्रदेश जी की पत्नी का आज पहला श्राद्ध था, बहू और बेटे ने हर चीज उनकी पत्नी रमा की पसंद की बनाई थी । तर्पण भी बहुत मन से किया था, और जो ब्राह्मणी श्राद्ध का भोजन करने आईं थी उन्हें बड़े चाव से खाना खिला दान दक्षिणा देकर विदा किया।  खाने में भी खीर, … Read more

पड़ोसन – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : रचना एक कामकाजी महिला थी। वह घरेलू औरतों को बिल्कुल पसंद नहीं करती थी क्योंकि उसके दृष्टिकोण से एक गृहिणी वही महिला बनती थी, जिसके अंदर बाकी कोई काबिलियत ना हो ।वह स्वयं एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत थी और उसके पति भी एक ऊंचे ओहदे पर पदस्थापित थे।        रचना … Read more

बहू की नौकरी से हमें क्या फायदा?——- – राशि रस्तोगी

“मौज मस्ती करने का बहाना चाहिए बहू को.. सुबह निकल जाती है तैयार होकर, देर रात को वापस आएगी.. कोई मदद तो भूल ही जाओ, उसके लिए जितना कर सकते हो कर दो!” गुस्से में रमा जी बड़बड़ा रही थी| चारु जो आज ऑफिस से जल्दी वापस आ गयी थी, बाहर खिड़की से आती हुई … Read more

“अहंकार” – ऋतु अग्रवाल

   रूपल दिखने में बहुत प्यारी बच्ची थी। अपनी माँ के अनुशासित लालन-पालन में उसके तौर तरीके भी संयमित हो रहे थे। पढ़ने लिखने व अन्य गतिविधियों में भी अच्छी थी। इन्हीं सब गुणों के चलते स्कूल,रिश्तेदारी और पड़ोस में रूपल की बहुत तारीफ होती थी। सब लोग रूपल की प्रशंसा करते थकते ना थे।              रूपल … Read more

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