वक्त किसी के लिये रुकता नहीं.  –  संगीता त्रिपाठी 

दर्पण के सामने बैठी मीरा, बालों में झलकती सफेदी और चेहरे की गहरी लकीरें देख हतप्रभ थी। क्या ये वही मीरा है जिसके रूप सौंदर्य पर कॉलेज के सहपाठी दीवाने हुआ करते थे।इसी रूप ने तो कॉलेज का सबसे होनहार छात्र सुयश को अपने मोहपाश में बांध लिया था।अपने जिन लंबे केश और गहरी बड़ी … Read more

हिन्दी- दिवस – लेखिका-डाॅ संजु झा

सभी देशवासियों को हिन्दी -दिवस की शुभकामनाएँ!आज 14 सितम्बर  का दिन हमारे देश में हिन्दी-दिवस के रुप में मनाया जाता है।हिन्दी सिर्फ हमारी भाषा ही नहीं,बल्कि हमारी पहचान भी है।आज 60 करोड़ से ज्यादा लोग हिन्दी का इस्तेमाल करतें हैं।आजादी मिलने के  बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान-सभा ने एकमत से हिन्दी को राजभाषा का … Read more

 अहंकार – निधि जैन

क्या हो तुम संभव, तुमको कितनी बार समझाऊं कि बोलते समय गलत शब्दों का चयन मत किया करो, तुम शिखर से जिस अहंकार से बात कर रहे हो,तुमको पता भी है आज़ तुम्हारी वजह से उनको जेल जाना पड़ा, और उसके बाद भी तुम उनसे किस तरह से बात कर रहे हो, अपनी गलती को … Read more

*मैं गुम हो रहा था* – अर्चना नाकरा

मैं खाली ‘लिख लिख कर’ परिवार नहीं चला सकता था.. और बिना लिखे.. जी नहीं सकता था कशमकश के उन पलों में मेरी एक दोस्त ने मुझे टैक्सी चलाने की सलाह दी ! कुछ जमापूंजी मेरी, कुछ उसकी.. ‘बस गाड़ी और सवारी चल पड़ी थी’ पढ़ा लिखा लेखक ‘हिन्दी दिवस’ पर भीतर से दम तोड़ … Read more

वो ट्रेन वाला हादसा…. निधि जैन

उस दिन मुझे बहुत जल्दी में पहुंचना था, पर सड़क पर ट्रैफिक इतना था कि बस भी जल्दी ना पहुंचा पाई, मै जैसे ही स्टेशन पहुंचीं, ट्रेन का हॉर्न हो चुका था, ट्रेन चलने को तैयार थी, मै प्लेटफार्म की तरफ भागी, ट्रेन चल पड़ी, मै चढ़ नहीं पाई, अतत: मै प्लेटफार्म पर खड़ी रह … Read more

बेहद सुंदर धरा – विजया डालमिया 

झील के किनारे बैठी धरा अपने ही ख्यालों में गुम थी। अचानक किसी की आहट से उसकी तंद्रा भंग हो गई। झील में उसे किसी की झलक दिखाई दी। एक साया धीरे-धीरे उसी की तरफ बढ़ रहा था। पर यह क्या….. वह उसे नजर-अंदाज करके आगे की ओर बढ़ चला। धीरे-धीरे वह झील के एकदम … Read more

अहंकार बच्चो की खुशी से बड़ा तो नही है – संगीता अग्रवाल

” सार्थक ये तुम्हारे और सिमरन के बीच क्या चल रहा है ?” बेटे के घर आते ही सुहासिनी जी ने पूछा। ” वो माँ मैं….मै सिमरन से शादी करना चाहता हूँ! ” सार्थक ने अपनी माँ मधु जी से कहा. ” क्या….. पर बेटा वो तो हमारी जाति की नही है.. कहाँ हम ब्राह्मण … Read more

तुम मेरे लिए सब कुछ हो – के कामेश्वरी

कमल रेलवे में नौकरी करते थे । उनके दो बड़े भाई और चार छोटी बहनें थीं । बहनें सुंदर नहीं थी और उनके गुणों में भी कमी थी । सब की सब माँ पर गई थी । तेज़तर्रार लड़ाकू टाइप की । बड़े भाई दोनों शादियाँ करके अपनी ज़िंदगी आराम से गुज़ार रहे थे । … Read more

गुल्लक टूट गयी… – दीप्ति सिंह

———————  पति की तेरहवीं के पश्चात ललिता ने तीनों बेटों के समक्ष एक प्रश्न रखा कि “अब वह अकेली कैसे रहेगी ” ? बड़े बेटे ने तुरन्त कहा ” माँ !  तुमने ही कहा था यह घर मेरा है अतः मैने भी कह दिया हमें हिस्सा नही चाहिए और ना हम यहाँ रहने आएगें। इसलिए … Read more

अहंकार – डाॅ संजु झा 

अहंकार  मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।अहंकारी  मनुष्य को अच्छे-बुरे ,अपने-पराए का विवेक नहीं रहता है।अहंकार  मनुष्य की बुरी वृत्ति है।जगविख्यात  है कि अहंकार के कारण  ही प्रकांड पंडित, महान ज्ञानी,बलशाली  रावण का समूल नष्ट हुआ था। अहंकार  से सम्बन्धित वर्षों पढ़ी हुई कहानी मुझे याद आ रही है,जिसे लिखने का प्रयास कर  रही हूँ।प्राचीन … Read more

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