बेटा होगा या बेटी – अंकिता मंजुल

   माफ़ करना रिया लेकिन माँ अगर चाहती है तो………… तो क्या दर्पण (रिया एकदम चीखती हुई बोली ) , मतलब कि माँ के साथ साथ तुम भी यही चाहते हो की हम अपने बच्चे को दुनिया में आने ही न दें बोलो ……. नहीं रिया माँ बस ये कह रही थी की एक बार … Read more

धोखा स्वयं को – पुष्पा जोशी

आत्माराम ने कितने प्रेम से अपने बेटे का नाम रखा था,  सेवाराम, बडे़ जतन से पाला था उसे, इकलौती संतान थी किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. उसे क्या पता था,कि उसका बेटा नाम के बिल्कुल विपरीत निकलेगा.आत्माराम जाना माना किराने का व्यापारी था, गाँव के चंद रईसों में उसकी गिनती होती थी.अपना काम … Read more

सौतेली माॅ॑ – माता प्रसाद दुबे

रमादेवी गुमसुम उदास बैठी कमरे की दीवार पर लगी तस्वीर को एकटक देख रही थी। एक साल पहले का,आज वही दिन था..जिस दिन रवि के पापा एक दुर्घटना में परलोक सिधार गए थे। पैंतीस वर्ष तक रेलवे में गार्ड के पद पर ईमानदारी से कार्य करते हुए कुछ महीनों बाद ही वे सेवानिवृत्त होने वाले … Read more

क्या  एक पति में पत्नी का धोखा सहन करने की सहनशक्ति होती है – गीतु महाजन 

बहुत बार ज़िंदगी आपके सामने ऐसा सवाल खड़ा कर देती हैं जिसका ना तो आपके पास कोई जवाब होता है और ना ही आप उस सवाल से बच सकते हो।ऐसा ही एक सवाल रजत की जिंदगी में भी आ खड़ा हुआ था। रजत दिल्ली की मध्यम वर्गीय सोसाइटी में रहने वाला एक आम इंसान था … Read more

प्रभा…….. तुमने मुझे धोखा क्यों दिया – किरन विश्वकर्मा

एक स्त्री तब अपने कष्ट को भुला देती है जब उसके परिवार का कोई सदस्य बीमार हो और परेशान हो उम्र पैंसठ, घुटनों में आर्थराइटिस कहां तक वह भागदौड़ कर सकती थी किंतु बिस्तर पर पड़े अपने पति जनक जी की देखभाल तो करनी ही थी। बेटे से कितनी मदद लेती वह प्राइवेट नौकरी करता … Read more

 धोखा अपनो का – बेला पुनीवाला

आज सुबह-सुबह ही उनकी चिठ्ठी मिली, वह आज आ रहे हैं, दो साल  के इंतज़ार के बाद, वह  आज आ रहे है, दिल ख़ुशी से ज़ूम उठा ये जानकर कि  वह  आज आ रहे हैं, दीवानी सी हुई में भागी अपनी सखी को बताने की, वे आज आ रहे है,  मेरे पैर ख़ुशी से टिक … Read more

“कपूत” – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

सर ,बाहर एक नव-युवक काफी देर से आश्रम के दरवाजे पर बैठा है। वह आपसे मिलना चाहता है । कहिये तो बुला दूँ उसे…..। ऐसे कैसे किसी को भी ऑफिस के अंदर बुला लोगे तुम? सर, मैं दस बार उसे कह चुका हूं पर वह जिद पर अड़ा है आपसे मिलने के लिए। जाकर पूछो … Read more

“बेबस पिता” – सीमा वर्मा

यह कहानी मेरी है।  मैं बाबू ‘ दीनदयाल शर्मा’  प्राथमिक विद्यालय का रिटायर्ड टीचर हूं। मेरी दो संतानें एक बेटा ‘सुप्रिय’ और दूसरी बिटिया ‘रूपा’ जिसकी शादी कानपुर शहर में मध्य वित्त परिवार के सरकारी मुलाजिम बेटे से मैंने अपनी ऐक्टिव सर्विस में ही कर दी थी। लेकिन उसकी बदकिस्मती या इसे किस्मत का खेल … Read more

 ” आ, अब लौट चलें” (भाग-2) – नीति सक्सेना      

सुबह पांच बजे तैयार होके सुरेश जी ने अमित के बेडरूम का दरवाज़ा खटखटाया।अमित ने आंखें मलते हुए दरवाज़ा खोला तो पाया कि मां ,पापा दोनों हाथ में अटैची और बैग लेकर तैयार खड़े थे। ” हम गांव वापस जा रहे हैं बेटा,सोचा जाते वक्त तुमको बता तो दें ताकि तुम  मुख्य दरवाज़ा अंदर से … Read more

सखी का घरौंदा – निभा राजीव “निर्वी”

विधि और सुमन का फ्लैट एक ही अपार्टमेंट में आमने-सामने था। विधि के पति बैंक में अधिकारी थे जबकि सुमन के पति एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत थे। दोनों परिवारों में बहुत गहरी मित्रता थी या यूं कहिए कि एक परिवार के जैसी घनिष्ठता थी। आए दिन दोनों परिवार एक ही जगह एकत्रित हो जाते … Read more

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