“जो भी प्यार से मिला हम उसी के हो लिए” – सुधा जैन 

 शादी की 35 वी सालगिरह सभी के साथ बहुत खुशी खुशी मनाई… एक दिन पहले ही मैंने अपने हाथों में सुंदर सी मेहंदी बनवाई और और इतनी खुशी हो रही थी कि “मेरे दिल की खुशी के क्या कहने ? सुबह-सुबह ही जब बाहर बैठकर पेपर पढ़ रही थी, तब पास में  छोटे दीदी ने … Read more

  धोखा /  प्यार का -बेला पुनीवाला

 श्यामली, जैसा नाम  वैसा रंग। श्यामली एक मिड्ल क्लास फॅमिली में पली बड़ी हुई, एक लौटी अपने माँ-पापा की बेटी थी। घर में चाहे पैसो की कितनी भी कमी हो, लेकिन श्यामली के माँ-पापा श्यामली की हर माँग को पूरा करते थे। श्यामली दिल की बहुत ही अच्छी और संस्कारी लड़की थी, श्यामली के दिल … Read more

एक प्यारा सा रिश्ता – संगीता अग्रवाल

माधव का आज घर मे मन नही लग रहा था खाली घर वैसे भी खाने को ही दौड़ता है रोज मे तो ऑफिस होता है पर इतवार का दिन काटना उसके लिए मुश्किल हो जाता है इसलिए यूँही बेसबब सड़को पर घूमने लगता है और थक कर घर लौट जाता आज भी बाइक खड़ी कर … Read more

  पराए का साथ अपनों से कही बेहतर – रश्मि प्रकाश 

घर में घुसते ही निकुंज की नजर अपनी बेटी को खोज रही थी…. दो महीने का बेटा पालने में लेटा हुआ था और राशि रसोई में जल्दीजल्दी हाथ चला रही थी ताकि रात का खाना बना कर बेटी को खिला सके। “ राशि दीया कहाँ है … जब घर आया दरवाज़ा भी लॉक नहीं था … Read more

 वो मरकर भी ज़िन्दा हैं – गुरविंदर टूटेजा

     युग कहाँ जा रहा हैं बेटा रात के दस बज रहें हैं…??    मम्मी जल्दी आ जाऊँगा…बोलकर अपनी बाईक निकाली और ये गया वो गया…!!   रागिनी ने अजय को बोला…इतनी रात को बाईक से जा रहा है..आप कुछ कहते ही नहीं उसको…!!!!   जाने दो रागिनी बच्चों को ज्यादा टोका टाकी नहीं करनी चाहियें वो पंसद … Read more

दिल के रिश्ते – रीटा मक्कड़

“अरे वाहः रीना आज तो बड़ी प्यारी लग रही हो”  रक्षाबंधन वाले दिन मैं अपने मायके से वापिस आयी ही थी कि रीना मुझे बाहर ही मिल गयी। चटक हरे रंग के लहंगा चोली और मांग टीका लगाए  सजीधजी आज तो वो बिल्कुल अलग और बहुत सुंदर दिख रही थी। ‘हांजी आंटी मैं भी अभी … Read more

 स्वाद अपनेपन का….! – लतिका श्रीवास्तव

सोमेश अभी सोकर भी नहीं उठा था की उसने कालिंदी को कहीं जाने के लिए तैयार पाया….! अरे श्रीमतीजी आज सुबह सुबह कहां की तैयारी हो गई….आश्चर्य और उत्सुकता से उसने पूछा ही था कि कालिंदी ने घड़ी दिखा कर कहा….”सुबह सुबह!!!ये सुबह है.!9 बज गए हैं..! अरे भाई आज सन्डे तो है….सोमेश ने उसे … Read more

मैं हूं ना – प्रेम बजाज

सुहानी एम. बी.ए. है अच्छी नौकरी है, खूबसूरती ऐसी कि जो देखे तो पलक झपकना भूल जाएं।   गहरी नीली आंखें, पतले कमान से होंठ, सुराही सी गर्दन,तीखी नाक उफ़्फ़्फ़्।  उस पर कयामत ढा रहा गोरे रंग पे, गालों पे छोटा सा काला तिल, सीना कामदेव को आमंत्रण देता, कई रिश्ते आए मगर अक्सर कहीं ना … Read more

“स्थापना” – ऋतु अग्रवाल

    “दुलारी काकी! दुलारी काकी!”     “कौन है? क्या हुआ?”      “काकी तनिक बाहर आओ।”       “अरे लखनवा! क्या हुआ? काहे गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहा है?”     “काकी! जरा जल्दी चलो। आज सुबह जो तुम रामशरण की बहुरिया की बच्ची जनवाई हो, वह रामशरण उसे मारे खातिर अफीम का गोला लेने गया है।”     “क्या? उस रामशरण की तो … Read more

मुझे स्वीकार नहीं है  – पुष्पा पाण्डेय

श्वेता शाम में चाय लेकर वाॅलकनी में आ गयी। चाय की चुस्की लेते-लेते वह एक नजर अपनी काॅलोनी पर डाली। मन- ही-मन सोचने लगी- इन बीस सालों में कितना कुछ बदल गया। कभी सोचा भी नहीं था कि यह जगह मेरी कर्मभूमि होगी। ——————- हरि प्रसाद जी इस बार नवरात्र में विन्ध्याचल जाकर दस दिन … Read more

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