सांझ की बेला पंछी अकेला – सुषमा यादव
,, एक मूलमंत्र मैंने पा लिया है, नज़रिया बदलो तो नज़ारे बदल जायेंगे, चारों तरफ़ खुशनुमा माहौल नजर आयेंगे,, जहां हमारे भीतर कहीं खो जाने का डर है, वहां हम अपने साहस और उम्मीद को बनाये रखेंगे,,, बड़ी बेटी रीना जब छः साल की थी,तब से उसके पापा राम उसे बोर्डिंग स्कूल में डालने की … Read more