बहू का नामकरण – पुष्प ठाकुर 

  साध्वी जी के यहां शादी की खासी रौनक है,उनके इकलौते बेटे सुयश की शादी जो थी। आज बहू की मुं दिखाई और नामकरण का कार्यक्रम है ।मोहल्ले पड़ोस में नाई से बुलावा लगा दिया है और पहले से ही घर में कुछ रिश्तेदार भी रुके हुए हैं ।          ” बहू ,तुम तैयार हो जाओ … Read more

हमें तो बस आपकी बेटी चाहिए – मीनाक्षी सिंह 

रमेश जी – अरे भाई साहब ,दहेज की कौन कह रहा हैं ! हमें तो बस अपनी बेटी दे दिजिये !  भूषण जी – वो तो ठीक हैं समधी जी ,पर फिर भी आपकी कोई मांग हो तो बता दिजिये ! जैसे सब बातें साफ रहे ! कोई समस्या ना हो आगे !  रमेश जी … Read more

 एक स्त्री माँ बनने के बाद ही सम्पूर्ण होती हैं – संगीता त्रिपाठी 

लो बहन लड्डू खाओ, आज मेरे पुन्नू का जन्मदिन है। विमला जी  काँपते हाथों से वृद्धाआश्रम में लड्डू बाँट रही थी। उसके लाडले पुन्नू यानि पुनीत का जन्मदिन है। सब ने उसे बधाई दिया। किसीने पूछा भी -तुम्हारे बेटे ने ही तुमको यहाँ भेजा। मिलने भी नहीं आता कभी,फिर भी तुम उसका जन्मदिन याद रखी … Read more

“सुजाता”( स्वाभिमान और संघर्ष) – रचना कंडवाल : Moral Story In Hindi

सुजाता ने आज दस साल बाद दोबारा “बसेरा” में कदम रखा था। ये वही “बसेरा” था जहां कभी वह दुल्हन बन कर आई थी। ये कभी उसका घर हुआ करता था। उसके ससुर रिटायर्ड जज अविनाश शर्मा की कोठी उसके पति आइपीएस निशांत शर्मा का घर। घर में शोक पसरा हुआ था, मृत शरीर को … Read more

क्या बेटी सन्तान नहीं – सुल्ताना खातून

बेटियों के माता- पिता की समाज में  स्थिति क्या है? हमारा समाज  बेटों को ही वंश क्यों मानता है? जीवन भर बेटियों को नाजो से पालने वाले माता-पिता बेटियों कि पैदाइश पर बुझ क्यों जाते हैं?  इन सारे सवालों के जवाब हर वे माँ बाप चाहते हैं जिनकी केवल बेटियां हैं। मेरी भी दो बेटियां … Read more

इक दूजे के वास्ते – नीरजा नामदेव   

           आज विधु शरद पूर्णिमा के चांद को देखते हुए अपने बीते दिनों को याद कर रही है। सोमांशु जब उसे शादी के लिए देखने आए थे तब बात करते हुए विधु ने  पूछा था कि क्या मैं शादी के बाद नौकरी करना चाहूं तो कर सकती हूं ।तब सोमांशु ने उसे स्पष्ट बताया कि … Read more

 “छोटी सी बात” – नीरजा नामदेव

अतुल की शनिवार को छुट्टी रहती थी।इस शनिवार को विहान ने स्कूल जाते समय कहा” पापा आज स्कूल से आकर  हम दोनों कैरम खेलेंगे।” उसकी मम्मी अनीशा दोनों की बात सुन मुस्कुरा रही थी। वह मन ही मन सोचने लगी दोनों बाप बेटा कैरम खेलते सब भूल जाएंगे । मैं उनका मनपसंद नाश्ता बनाने की  … Read more

” समझौता अब नहीं ” – गोमती सिंह

—-समझौता! समझौता जैसे उसकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन गया था।  पग पग पर समझौता, बचपन में भाई बहनों के बीच ऊंच नीच होता  वह समझौता कर लेती , सखियों संग कुछ हुआ वह समझौता कर लेती धीरे-धीरे उम्र आई विवाह करनें की ; वह दहेज के सख्त खिलाफ़ थी । विवाह तय करनें के … Read more

हीरा – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

हीरा कृषि विज्ञान से ग्रेजुएट था, उसके साथ के कई लड़के नौकरी करने के लिए गाॅ॑व छोड़कर शहर चले गए। परन्तु हीरा गाॅ॑व छोड़कर नही गया, क्योंकि उसे अपने गाॅ॑व से बहुत लगाव था। वह गाॅ॑व मे ही रहकर खेती करना और खेती से ही जीविकोपार्जन करना चाहता था। हीरा को खेती करना बहुत अच्छा … Read more

 समझौता – ज्योति अप्रतिम

उसे अपनी बच्ची के लिए स्कूल और स्कूल वालों से शिकायतें और शिकायतें रहतीं। कभी बस में सीट न मिल पाना ,कभी अत्यधिक भीड़ ,कभी किसी बच्चे की बोतल से चोट लग गई कभी बैग से !और चोट से कभी आँख में सूजन और कभी दाँत में चोट।   सुनते सुनते श्रीमती राजे भी तंग … Read more

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