पल में तोला पल में माशा, – सुषमा यादव

  मैंने गुस्साते हुए बेटी रीना से कहा,,अभी तुरंत अपने फैमिली ग्रुप से अपना मैसेज डिलीट करो, कितनी बार मना किया, समझाया तुम्हें,कि अपने घर की बातें, अपने झगड़े अपने तक ही सीमित रखो,पर तुम्हें तो मेरी बात मानना ही नहीं,, तुम क्यों नहीं समझती हो कि तुम्हारा कोई साथ नहीं देगा,, वो उनका बेटा … Read more

नालायक बेटे के लिए,हमेशा बहु ही जिम्मेदार क्यों ….? – यामिनी अभिजीत सोनवडेक

अर्पिता,गुस्से में आज,दिल का गुबार निकाल रही थी,थक चुकी थी वो,इस अनचाहे भेदभाव और अनावश्यक ताने सुन सुनकर.. आपका बेटा नालायक है, तो मैं क्या करूं ? ये जिम्मेदारी और जवाबदारी मेरी नहीं है,सासु माँ… जब हमारी शादी,हुयी,तब आपका बेटा मयंक 30 साल का था,और मैं उसकी दुनिया में 30 साल के बाद आयी,तो उसकी … Read more

बदलाव – संजय मृदुल

मैं अरुण के सीने से लगी जोर जोर से रो रही थी, उनका हाथ मेरे सर पर था और वो मुझे चुप कराने की कोशिश कर रहे थे।   आज मैने जीवन मे रिश्तो की सम्बन्धो की लोगो की कद्र समझी। मैं रोते हुए बार बार उनसे माफी मांग रही थी। आज लग रहा था … Read more

समझौता – अभिलाषा कक्कड़

दौर आते जाते रहते हैं लेकिन यादें मीठी कड़वी छोड़ जाते हैं । जी हाँ मैं बात कर रही हूँ दौर दशक 80 और 90 के बीच का जब बहुत कुछ आज के समय से अलग था । बच्चों की शिक्षा से लेकर शादी ब्याह तक के फ़ैसले माता-पिता ही लेते थे , औ र … Read more

तैयारी – कंचन श्रीवास्तव 

कहते हैं शरीर साथ न दे तो छोटा सा छोटा काम भी भारी लगता है, ऐसे में कोई हाथ बटा दे।तो लाखों लाख दुआएं निकलती हैं। पर आज के समय में इसकी उम्मीद झूठी दिलासा दिलाने जैसा है। बस इसी बात को लेके सुलेखा परेशान हैं ,होना  लाजिमी भी  है। भाई दौर ही ऐसा चल … Read more

गुलाबी फ्राॅक – नीरजा कृष्णा

शालिनी  अपनी सहेली निशा  के बुटीक में  बड़े शौक से  तरह तरह की लेस वाली फ्रॉकों को देख रही थी।   सहेली पूछ बैठी, “ये लड़कियों की फ्रॉकों को इतने ध्यान से क्यों देख रही हो? तुम क्या करोगी…तुम्हारे तो दोनों बेटे ही हैं…बिटिया तो है नहीं” उसकी आँखों में पानी भर आया। उनको छुपाने … Read more

रिश्तों की नई परिभाषा – नीरजा कृष्णा 

मोहिनी की खुशी का ठिकाना ही नही था….अभी अभी अविनाश का मोबाइल पर फोन आया था…. “मोहिनी! बहुत बढ़िया खबर है…. इस मायानगरी मुंबई में कंपनी की तरफ़ से तीन कमरों का काफ़ी सुंदर और आरामदेह क्वार्टर मिल गया है… अब हम सबकी तपस्या पूरी हो गई… एक सप्ताह के अंदर ही मैं सबको लेने … Read more

दहेज़ मांगना गलत है तो दहेज़ के झूठे मुक़दमे करना क्या है ? – संगीता अग्रवाल

पुलिस को सुबह सुबह घर आया देख सुरजीत जी चौक गए.. ” जी इस्पेक्टर …? ” उन्होंने दरवाजे पर आ पूछा! ” मेहुल यहीं रहता है ” एक पुलिस वाले ने रौबदार आवाज़ मे पूछा. ” जी बिल्कुल.. बताइये क्या बात है.. मैं उसका पापा सुरजीत हूँ ” सुरजीत जी ने शालीनता से जवाब दिया … Read more

‘शरद् पूर्णिमा और चावल की खीर’- प्रियंका के रसोड़े से

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं।  पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। ऐसा माना जाता है कि  शरद पूर्णिमा की रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत बरसता  है। इस दिन उत्तर भारत में चावल की खीर बनाकर रात … Read more

भरोसा मतलब की पूंछ पकड़ कर आता है… – यामिनी अभिजीत सोनवडेक

आज के वक्त में, कहाँ फुर्सत होती है लोगों को अपने रिश्ते निभाने की और बिना कारण किसी से मुलाकात करने की, फिर भी विजया गाहे बगाहे अपने ससुरालियों को किसी पूजा या फिर किसी कार्यक्रम के उपलक्ष्य में बुलाती रहती थी, जो उसकी सासु माँ को कतई पसंद नहीं था, लेकिन कहती भी कुछ … Read more

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