रिश्ते जोड़ता चाँद – संजय मृदुल

जीजी चाँद निकल आया जल्दी आ जाइये। छोटी भाभी की छत पर से आवाज आई। मन तो नही हो रहा था पर जाना तो पड़ेगा। ज्योति का ये मायके में पहला अवसर था करवा चौथ पर। और शादीशुदा जिंदगी का शायद आखरी। पंद्रह साल की शादी आज दांव पर लगी थी। फेमिली कॉउंसलिंग में कोई … Read more

पत्नी के विश्वास का पर्व – संगीता अग्रवाल 

” मीनल  परसो करवा चौथ है क्या पहनेगी तू!” मीनल की सहेली चारु ने पूछा । ” चारु सुरजीत से बात नहीं हो पा रही मेरी बहुत परेशान हूं ऐसे में करवा चौथ के बारे में कुछ नहीं सोचा मैने !” मीनल चिंता से बोली। ” क्या ….कबसे बात नहीं हुई तेरी …तूने हेड क्वार्टर … Read more

प्रेम और विश्वास  कहानी –       डॉ अंजना गर्ग

मोनिका कृष्णा कॉलोनी में नई नई आई थी इतने में करवा चौथ का त्यौहार आ गया ।शाम को पार्क में सैर करते हुए महिलाओं में करवा चौथ पर ही चर्चा होती थी कि वह आने वाले इस करवा चौथ पर क्या करने वाली है ।कोई नई ज्वेलरी खरीद रही थी। तो कोई नई डिजाइनर साड़ी, … Read more

हीरों का हार – डाॅ उर्मिला सिन्हा

 करवा चौथ की गहमा-गहमी में  राधा  कुछ ऐसा उलझी की पूछो मत। हाट-बाजार गहने कपड़े  ।सोसायटी में सबसे सुंदर ,धनवान  विशेष पिया की प्यारी  साबित करने का होड़ मचा हुआ था।     आज सभी सखियां  सामूहिक रुप से  मेंहदी लगवा रही थी। एकसाथ गपशप भी हो जाती आपस में तैयारियों का जायजा भी लिया जाता  और  … Read more

आखिर खुशियों ने दस्तक दे ही दी – संगीता अग्रवाल 

वो खुशबू दार मोमबत्तियों की लडी और खिड़की से झांकती चाँद की रौशनी.. बहुत सुंदर इंतज़ाम किया था राघव ने सिया के लिए.. पर सिया कहीं ओर ही गुम थी… ” सिया.. क्या तुम मुझसे शादी करोगी!” घुटनों पर बैठ राघव ने सिया को गुलाब देते हुए कहा. ” राघव, जो लड़की तुम्हारी दुल्हन बनती … Read more

कभी गम की धूप कभी खुशी की छाँव – किरन विश्वकर्मा

शाम को पतिदेव ऑफिस से आए और मुझसे बोले जरा जल्दी से तैयार हो जाओ मेरे दोस्त ने आज शाम चाय पर हम दोनों को बुलाया है अब उसका ट्रांसफर फिर से इसी शहर मे हो गया है तो आज उसका फोन आया था, तुम चलोगी तो तुम्हारा परिचय भी हो उन लोगों से हो … Read more

मैंने ऐसा तो सोचा न था – के कामेश्वरी

भुवनेश्वर जी के दो लड़के थे । वे कपड़े बेचने का व्यवसाय करते थे । रोज सबेरे साइकिल पर कपड़ोंकी गठरी रखकर बेचते थे । छोटा बेटा पढ़ लिखकर शहर में ही नौकरी करने लगा था । बड़ा बेटाकल्याण ने डिग्री के बाद पिता के साथ ही काम करने का फ़ैसला कर लिया था ।  … Read more

मैडम, मेरे सौतेले बाप से मुझे डर लगता है – सुल्ताना  खातून 

उस व्यक्ति की उम्र कोई 40 साल के करीब रही होगी, वह पाँच साला छोटी बच्ची के साथ खेल रहा था, कभी वह बच्ची को गोद में बैठा लेता, कभी उसके गालों पर प्यार करता, कभी गोद में बैठा कर उसके सीने को सहलाता, सलोनी को यह सब देख उसका दिमाग फटने लगा। वह शहर … Read more

‘भागोंवाली अभागी!’ – प्रियंका सक्सेना

‘बड़े भागों वाली’ हां सब यही तो कहते हैैं, सुहासिनी भाभी को। बड़ी हवेली के जमींदार महाशय  के इकलौते बेटे लखनपाल की पत्नी सुहासिनी एक बराबर के समृद्ध परिवार की बेटी हैं। दस साल पहले विवाह उपरांत राजनगर आईं थीं। कुम्भलनगर के जमींदार की बेटी सुहासिनी बड़े लाड़-प्यार और नाजों से पली हैं। मैं, इमली … Read more

“ज़िंदगी दूसरा मौका जरूर देती है”  (कभी खुशी कभी ग़म है) – भावना ठाकर ‘भावु’ 

परिस्थितियों से हार कर अगर ज़िंदगी से विमुख हो गए तो ज़िंदगी जहन्नुम बन जाती है, मेरे साथ हुए हादसे से एक समय में टूट चुकी थी, पर हौसलों ने मेरा साथ दिया। जरूरी नहीं आपकी ज़िंदगी में आने वाला एक इंसान गलत निकला तो दूसरा कोई सही मिल ही नहीं सकता। प्यार भी दोबारा … Read more

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