जिंदगी कभी धूप तो कभी छांव भी – ज्योति आहूजा

समीर और गौरी एक ऐसा जोड़ा जिन की मिसाल पूरा खानदान और सभी दोस्त दिया करते| इनकी शादी को दो साल हो चुके थे|  समीर बैंक में काम करता था और गौरी एक  होम  मेकर| खाना बनाने में माहिर थी  गौरी| कुछ चीजें तो वह इतनी टेस्टी बनाती कि समीर उंगलियां चाटता रह जाता| उसके … Read more

भाभी बिना मायका सूना है – सविता गोयल

” हैलो माँ , मैं कुछ दिनों के लिए वहाँ आ रही हूँ । ,,  प्रिया ने फोन पर अपनी माँ नीता जी से कहा। ” ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा…. लेकिन तूं तो बोल रही थी इस बार तुमलोग कहीं बाहर घूमने जा रहे हो   !! ,, ” अरे माँ, रहने … Read more

भटकती राहें -सोनिया निशांत कुशवाहा

रिया स्कूल से वापस आई तो मुझे उसका बैग कुछ ज्यादा ही भारी भरकम सा महसूस हुआ। स्कूल बैग रैक में रखने की बजाय वो उसे लेकर कपड़े बदलने चली गई। मेरा दिमाग कुछ खतरे का संकेत दे रहा था। आखिर ऐसा क्या है मेरी 15 साल की बेटी के बैग में जो वो छिपाने … Read more

एक पुराना फ़ोटो – ज्योति अप्रतिम

आज एलबम के फ़ोटो पलटते हुए एक फोटो सामने आ गया।एक दो नहीं पूरे साढ़े चार दशक से अधिक पुराना! स्मृति ….वो भी इतनी पुरानी फ़ोटो देखते ही एकदम ताजा हो गई।परिवार में पहली शादी थी।जी हाँ मेरी ममेरी बहन की शादी।सबसे बड़ी हैं परिवार में मैं उस वक्त मात्र  ग्यारह बरस की रही होऊँगी। … Read more

खुशियों में ढल गए ग़म – प्रेम बजाज

शहर यमुनानगर सागर स्कूल में पांचवीं क्लास में और आरती चौथी क्लास में है, सागर के चाचा की शादी आरती की बुआ रानी से तय हुई। ठीक समय पर बारात पहुंच गई, सभी रस्में निभाई गई, अब फेरों का समय शुरू होने वाला था, और लड़की वालों को इसी समय का इंतजार होता है कि … Read more

रेवा की पहल – नीरजा नामदेव

रेवा स्कूल में शिक्षिका है । घर से स्कूल के रास्ते में उसे रोज रेलवे क्रॉसिंग पर रुकना पड़ता था क्योंकि अक्सर गेट बंद होता था। इस बार बहुत दिनों बाद जब वह स्कूल जा रही थी तो उसने देखा कि रेलवे क्रॉसिंग के किनारे छोटी-छोटी लड़कियां खेल दिखा रही थी। वहां मौजूद लोग खेल … Read more

अंजानी सी इक लड़की” – नीरजा नामदेव

आयरा को एक म्यूजिकल कॉन्सर्ट में शामिल होने दूसरे शहर  जाना रहता है। वह ट्रेन से अपना सफर शुरू करती है।एक स्टेशन पर ट्रेन रूकती है ।उसे सहयात्रियों की बातचीत से पता चलता है कि ट्रेन यहां लगभग आधे घंटे तक रुकेगी ।वह अपना पानी बॉटल देखती है जो खाली हो गया है। वह सोचती … Read more

 पुरूष – विनय कुमार मिश्रा

“तुम्हारा नियुक्ति पत्र आया है कुसुम! तुम्हारा प्राइमरी स्कूल में चयन हो गया है “ मैं स्तब्ध थी मगर इन्हें विश्वास था।अपने चश्मे के पीछे अपनी खुशियों और संघर्ष को छुपाते हुए इन्होंने नियुक्ति पत्र मेरे हाथों में रख दिया। मेरी आंखों में भी दो बूंद खुशी के आ गए। मैं कोई ज्यादा पढ़ी लिखी … Read more

हाँ मेरी माँ अनपढ़ है, लेकिन… स्मिता सिंह चौहान 

“मैंने अपनी स्पीच अच्छे से याद कर ली है। रोहन आज जब स्टेज पर अवार्ड लेगा मुझे पता है मेरा नाम जरूर लेगा। क्या खुशी होगी? वो जब वो कहेगा कि मेरी इस जीत के हकदार मेरे पापा है जिन्होंने मुझे यहाँ तक पहुंचाने के लिए अपनी कमाई को बेहिचक खर्च कर दिया। ” सुरेश … Read more

बहु से बेटी बनने का दुख – सुषमा तिवारी

पानी सर से पार भी हो जाए तो शांत रहने की कला सिर्फ एक माँ, पत्नि, बेटी, बहू के रूप में कार्यरत स्त्री जानती है। मीना उठी तो आंखे हल्की सूजी थी, साफ दिख रहा था कि रात भर सोई नहीं ढंग से। काम बहुत था, अमित ने भी छुट्टी ली थी। आज मीना के … Read more

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