ममता – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

“सर जितनी फीस आप के मैनुअल में लिखी हुई थी, मैं सारी जमा करा चुका हूँ। अब ये लैब चार्ज, लाइब्रेरी फीस अलग से कहाँ से आ गई।” “ये तो होता ही है।” सामने बैठे क्लार्क से रुखाई से जवाब दिया।  “मगर मैं तो पिछले बीस दिन से आप के कौलेज का एक एक एक्स्पैंस, … Read more

बेटे के घर रहने का मन नहीं करता – अर्चना खण्डेलवाल : Moral Stories in Hindi

चल,  माधुरी जल्दी से तैयार हो जा, आज हम बाहर खाना खाने चलेंगे, मेरा घर पर खाने का मूड नहीं है,  कमल जी चहकते हुए बोले। हां, वो तो ठीक है, पर आज अचानक कैसे? मैंने तो रात के खाने के लिए सब्जी भी काट कर रख ली है, कोई ना फ्रिज में रख देती … Read more

ज़िंदगी और कुछ भी नहीं , तेरी मेरी कहानी है – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

रिचा एक  प्रतिष्ठित परिवार की संस्कारी लड़की थी संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी, बड़े भाइयों के सानिध्य में सुरक्षित ,अपनी भाभी से मित्रवत व्यवहार रखने वाली रिचा का जीवन बहुत आराम से व्यतीत हो रहा था ।वह पढ़ाई कर रही थी और संयुक्त परिवार में रहने का भरपूर आनंद उठा रही थी। अचानक रिचा के जीवन … Read more

विश्वासघात – के आर अमित : Moral Stories in Hindi

दोनों गाड़ी में बैठ गए पहले से ही सोचकर आए सोहैल की नीयत उसके कपड़ो उसके गले मे सोने की चैन हाथों में अंगूठियां देखकर खराब हो गई और मन ही मन उसने सोचा कि ये घर आने वाला है मेरे अलावा किसी को पता नही है अगर मैं इसको ठिकाने लगा दूं तो ये … Read more

विश्वासघात – उर्वी झुनझुनवाला : Moral Stories in Hindi

कहते हैं, रिश्ते विश्वास पर टिके होते हैं। एक बार यह धागा टूट जाए, तो फिर लाख जोड़ने की कोशिश करो, कहीं-न-कहीं दरार बाकी रह ही जाती है। राजीव एक महत्वाकांक्षी युवक था। छोटे से कस्बे से निकलकर उसने शहर में अपनी पहचान बनाई थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही वह बेहद होशियार और … Read more

भाईयों का विश्वासघात – गीतू महाजन : Moral Stories in Hindi

“तेरा बाप यहां नौकर था समझा”, मंझले चाचा के मुंह से निकली यह बात रजत के दिल में तीर की तरह चुभ गई थी।वह जानता तो था कि उसके तीनों चाचा बेईमानी की सारी हदें पार कर चुके हैं पर अपने पिता के लिए अपमान भरे शब्द सुन उसका खून खौल गया था।  रजत के … Read more

अपनों की पहचान – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

लता दी के दूर के रिश्ते के भाई का बेटा था मानव… जब पहली बार मानव लता दी के घर आया, उसे देखते ही लता दी का मन… एक अनजाने अपनत्व से भर उठा…   लता दी कि अपनी भरी पूरी गृहस्थी थी… उनके पति की अच्छी नौकरी थी… दो बेटियां थीं… कमी तो कोई नहीं … Read more

उल्टी पट्टी पढ़ाना – गीता अस्थाना : Moral Stories in Hindi

शादी होकर माधवी का गृह प्रवेश संयुक्त परिवार में हुआ था। तब से वो परिवार के साथ बड़े प्रेम भाव और अपनत्व से रह रही थीं। परिवार के नाम पर उनका अपना परिवार -पति विमल,तीन बच्चे और स्वयं माधवी।दूसरा परिवार था उनके देवर शिवम, उनकी पत्नी और एक बेटी। दोनों भाइयों का परिवार आपसी प्रेम, … Read more

कसक – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

शारदा देख रही थी कि जबसे उसकी प्यारी पोती गोपिका का विवाह तय हुआ है, उसके चेहरे की मुस्कान और हॅसी नकली हो गई है। वह बाहर से सबको दिखाने के लिये हंसती मुस्कुराती है लेकिन उसके अन्दर कोई द्वंद्व चलता रहता है।  ऐसा भी नहीं है कि नवल से विवाह के लिये किसी ने … Read more

विश्वास घात – हेमलता गुप्ता : ries in Hindi

शिवानी बेटा..  तेरे पापा मम्मी भैया भाभी तेरी बड़ी बहन, तू मेरा बेटा सब वैष्णो देवी माता के दर्शन के लिए जा रहे हैं, मेरी तो कितने सालों से इच्छा थी कि मैं भी माता रानी के दरबार में जाऊं पर मेरी यह इच्छा कभी पूरी ही नहीं हो पाई, विवेक के पिता  मेरी हर … Read more

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