मां का संदूक – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

राहुल उस दिन घर आया तो आँगन में धूप सुनहरी चादर बिछाए खड़ी थी। कोने में माँ बैठी थीं—झुकी कमर, काँपते हाथ, आँखों पर मोटा चश्मा। उनके सामने रखा था एक पुराना लकड़ी का संदूक, जिसकी काली पेंट जगह-जगह से उखड़ चुकी थी। राहुल ने अनमनेपन से कहा— “माँ, इस जंग लगे संदूक में अब … Read more

उल्टी पट्टी पढ़ाना – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

आशा की शादी कानपुर के जाने माने जूट कारोबारी अनिल गुप्ता के छोटे बेटे अमित से हुईं। दोनों भाई पिता के कारोबार में हाथ बटाते थे ओर एक ही घर में रहते थे। आशा की सास ओर उनकी बड़ी बहू घर संभालते थे। आशा के पीहर में उसके माता पिता ओर भाई भाभी थे। आशा … Read more

स्वाभिमान के लिए – डा० विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi

जगत नारायण जी अपने घर के बैठका में बैठे थे। चेहरे पर गहरी झुर्रियाँ थीं, पर उनमें जीवन का अनुभव भी झलकता था। उसी समय पड़ोसी सुबोध जी आकर पूछ बैठे— “अरे सर जी! आप यहाँ कैसे ? आपके तो तीन-तीन बेटे हैं, तीनों अच्छी नौकरियों में हैं, फिर भी आप उनके साथ क्यों नहीं … Read more

अपने मन की सुनना – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

     “ ओह माँ जी, ये बहूजी भी ना, मजाल है किसी काम को हाथ लगा ले, नाशते के बर्तन तक नहीं उठाती, और कमरा कितना बिखरा पड़ा है, सारे कपड़े पंलग पर फैला दिए” नौकरानी रामी काम भी कर रही थी और बुड़बुड़ा भी रही थी।        सुषमा सामने ही बाहर चारपाई पर बैठी मेथी साफ … Read more

उल्टी पट्टी पढ़ाना – खुशी : Moral Stories in Hindi

रमा जी की बहु आज पांचवीं बार डिलीवरी के लिए दाखिल हो रही थी।बहु श्यामा डरी सहमी सी थी कमजोरी से चेहरा पीला पड़ रहा था और उनके पति विद्याधर भी पीछे पीछे हस्पताल में दाखिल हुए। रमा जी डाक्टर से बोली इस बार लड़का ले कर जाऊंगी वरना इसे और उस कुलक्षिणी को यही … Read more

बोझ नहीं डालना – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

रात के सन्नाटे को चीरती हुई एक ऐसी खबर आई थी की मां बाप को पूरी तरह तोड़ गई थी। कोचिंग सेंटर से एक विद्यार्थी मनीष जो मेरे बेटे संदीप का मित्र था, उसने बताया की “संदीप ने खुदकुशी करने की कोशिश की है। अंकल वो अस्पताल में भर्ती है आप जल्दी से आ जाइए।” … Read more

पछतावे का बोझ – अंजु गुप्ता ‘अक्षरा’ : Moral Stories in Hindi

दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेज के हरे-भरे कैंपस की भीड़-भाड़ के बीच रिया अक्सर पेड़ों की छाया तले किताब लेकर बैठी मिलती। आस-पास दोस्तों की हंसी-ठिठोली गूंजती रहती, क्रिकेट और डिबेट्स की आवाज़ें माहौल में तैरतीं, पर उसकी दुनिया किताब के पन्नों और सपनों की खामोश गलियों तक ही सिमटी रहती। उसी भीड़ में एक चेहरा … Read more

अब छोटी बहू किसी काम की नहीं रही – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

जब से डिलीवरी हुई हैं , छोटी बहू कामचोर हो गई हैं मांजी , वर्ना पहले तो फटाफट हाथ चलाती थी , अब तो महारानी को बच्चे का ही ख्याल रहता हैं पुरे दिन , मैं अभी बाथरूम में गई थी तो मैंने देखा कि मैले कपड़े अब तक यूं ही पड़े हैं मांजी , … Read more

आँखें नीची होना – लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi

ताराचंद जी ‘,टेलीविजन पर समाचार देख रहे थे ,तभी एक ऐसी खबर आई, जिसे देखकर ,उनकी ”आँखें नीची हो गयीं। ” और उन्होंने तुरंत ही टेलीविजन बंद कर दिया। तब अपने बेटे ‘प्रभात’ को बुलाया और उससे पूछा -क्या तुमने आज का ”समाचार- पत्र ”पढ़ा है ? नहीं तो….. आज ऐसी कौन सी ख़बर ख़ास … Read more

उल्टी पट्टी पढ़ाना – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

हरीश बेटा देख कर आओ, चाची अपने कमरे में क्या कर रही है। उसके मायके वाले आए हुए हैं। जरा सुन के आओ। उनकी आपस में क्या बातें चल रही है। मैं जानती हूं, तुम्हारी चाची और उसके मायकेवाले जितने भले दिखते है। उतने वो है नहीं इसीलिए पता तो रखना ही पड़ेगा।  रमा यह … Read more

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