सार्थक पहल – कमलेश राणा
शाम को जब आकाश घर आया तो महक ने चाय बनाते हुए उसे याद दिलाया। आशु की यूनिफॉर्म छोटी हो गई है, किराने का सामान भी खत्म हो रहा है, कल तो बाजार चलना ही पड़ेगा। कितने दिन से टाल रहे हो तुम, उसको रोज स्कूल में डांट पड़ती है। महक मैं तो नहीं जा … Read more