मर्यादा – निभा राजीव “निर्वी”

“तेरा दिमाग तो नहीं चल गया कहीं! क्या अनाप-शनाप बके जा रही है तू! तू इस घर की बहू है बहू! हमारा मान और सम्मान !हमने तुझे थोड़ी छूट क्या दे दी तू तो सर पर चढ़कर बैठ गई। अरे मेरे बेटे को तो खा ही गई, अब क्या घर की मान मर्यादा और इज्जत … Read more

मंत्र – नीलम सौरभ

“अरे दीपक! क्या है ये सब? इतना पढ़ा-लिखा होकर तू कैसे इन सब चक्करों में फँस गया भाई!” दोस्त से मिलने पहुँचा गौरव उसके कमरे का दृश्य देख कर अचरज से बेसाख़्ता बोल उठा। टीवी के कुछ चैनलों पर रोज दिखने वाले उस चीज को वह तुरन्त पहचान गया था। दीपक व गौरव प्रतियोगी परीक्षाओं … Read more

परिवर्तन – शालिनी गुप्ता

सुबह का वक्त है और आरती जी टेबल पर बैठी चाय पी रही है। अभी थोड़ी देर पहले उनका बेटा शोभित ऑफिस के लिए निकल चुका है और उनके पति शेखर बाहर लॉन में बैठे अखबार पढ़ रहे हैं। तभी उनकी नई नवेली बहू सोनिया किचन में आई और अपने लिए ब्लैक कॉफी बनाकर वापिस … Read more

मर्यादा – उमा वर्मा

माँ, मै जा रही हूँ ।तुम मेरे पास नहीं हो ।एक परम शान्ति महसूस कर रही हूँ माँ ।गहन अंधकार छा रहा है ।कल ही दिन  में तो तुम से बात हुई ही थी ।तब कहाँ पता था कि यह मेरे जीवन की आखिरी तारीख होने वाली है ।कल शाम को अचानक तबियत खराब होने … Read more

 दाखिला – गुरविन्दर टूटेजा

  वंशिका जल्दी करो जरा भी देर हो गयी तो सारे किये धरे पर पानी फिर जायेगा….तुम्हे पता तो है मैं सुबह चार बजे लाईन में लगा  तब जाकर एडमिशन फार्म मिला…!!!   हाँ समर पता है मुझे सबसे अच्छा स्कूल है ये दिल्ली का….वंश का एडमिशन तो हमें इसी स्कूल में कराना है…चलो चले |  स्कूल … Read more

प्रबंधन” – प्रीता झा

लैपटॉप पर नजरें गड़ाए  ईशा ने मुड़ कर देखा  आरव को गोद में उठाये उसकी आया लक्ष्मी खड़ी थी | ” इस महीने से मुझे 15000 रुपये चाहिए | नहीं तो मुझे दूसरा काम देखना होगा फिर मैं इतना टाइम नहीं दे पायेगी | ” ईशा वापस लैपटॉप की ओर देखने लगी लेकिन दिमाग़  लगातार … Read more

शहर की लड़की – संगीता अग्रवाल

“क्या बात है रोशन की मां क्या सोच रही है यूं अकेले बैठे?” हरिहरन ने अपनी पत्नी रमिया से पूछा। ” रोशन के बापू आप तो हमारा बेटा पढ़ लिखकर अफसर बन गया है अब जल्द ही उसका ब्याह करना पड़ेगा !” रमिया बोली। ” हां ये तो तू ठीक कहे है पर छोरा अब … Read more

तन्हाई – डा.मधु आंधीवाल

सविता जैसे ही बालकनी में सुबह की चाय लेकर बैठी सामने पेड़ पर चिड़ियाँ का जोड़ा बैठा चींची करके एक दूसरे की चोंच पर प्यार कर रहे थे । बहुत देर तक वह अपलक उसे निहारती रही । इन पक्षियों के पवित्र प्यार को ना कोई बनावट ना दिखावट । उसका और सुमित का प्यार … Read more

बायपास – ज्योति अप्रतिम

मम्मीजी , मुझे अभी अपनी माँ के पास जाना है । भूमिका ने रोते हुए कहा ।  अरे !,क्या हुआ इतना क्यों रो रही हो ?पहले यहाँ बैठो ,पानी पियो और बताओ ,क्या हुआ ? बस कुछ नहीं ।मुझे माँ की बहुत याद आ रही है। ठीक है ,चली जाना पर पहले बताओ क्या हुआ? … Read more

आखिरी विदाई – रश्मि प्रकाश

“अरे बेटा ध्यान से अपनी माँ को तैयार करो…. बिल्कुल सोलह श्रृंगार करना उसका… और हाँ उसकी शादी वाली चुनरी भी ज़रूर ओढ़ा देना।”अपनी बहुओं को हिदायत देते किशोर बाबू अपनी धर्मपत्नी को निहार रहे थे। सुनंदा जी की आँखें ज़रूर बंद थीं पर चेहरे पर मुस्कुराहट विराजमान थी ….दोनों बहुएँ जया और हिना और … Read more

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