‘नदी सी मर्यादा’ – अनीता चेची

जैसे ही पलक को कॉलेज की ओर से मनाली भ्रमण की सूचना मिली  खुशी से झूम उठी। सफर पर जाने के सपने बुनने लगी परंतु भीतर ही भीतर संशय भी था कि पापा जाने देंगे या नहीं। अगले दिन सुबह पलक ने अपने पापा  से कहा ,पापा जी कॉलेज की सभ छात्र-छात्राएं ट्रिप पर मनाली … Read more

फिर से – सुधा शर्मा

 आज अपने को बार बार बहला रही थी वसुधा ।’ठीक किया मैने , यह कोई समय है प्यार मुहब्बत में पडने का ?कितनी पागल हूँ न मै ? कैसे इतनी जल्दी भावनाओं में बह जाती हूँ ।      बस खूबसूरत शब्दों के मोह जाल में भूल जाती हूँ कि जीवन के इस मोड पर क्या हक … Read more

‘ गुल्लक ‘ – विभा गुप्ता

    ” माँ, आप इसमें पैसे क्यों रखती हैं?” मुझे गुल्लक में पैसे रखते देख मेरे छोटे बेटे चेतन ने मुझसे पूछा तो मैंने कह दिया कि इससे मेरी बचत होती है।कभी ज़रूरत पड़ने पर ये पैसे काम आ जाते हैं।मेरे छह वर्षीय बेटे ने क्या समझा,ये तो मैं नहीं जानती लेकिन उसने कहा कि माँ,मुझे … Read more

धूसर चंद्रमा – राजेन्द्र पुरोहित

पूजा की थाली सजाती उर्मि के सामने बैठी भागवंती मन ही मन बुदबुदा रही थी, “सुबह से भूखी प्यासी सोलह श्रृंगार कर के किसकी प्रतीक्षा कर रही है पगली। वह नीच तो पड़ा होगा उसी लिली की बाहों में। हे माँ भवानी, तूने मुझे इतनी गुणवंती बहू दी तो बेटा इतना अधम क्यों दिया?”  तभी … Read more

मर्यादा-एक सीख – शुभ्रा बनर्जी

आज बच्चों का लंच बॉक्स पैक करते हुए विनीता की आंखों से आंसू गिर रहें थे।सुबह से उठकर सास ससुर की देखभाल,नाश्ता,खाना सब कुछ करके बच्चों को तैयार‌ करके फिर ख़ुद स्कूल जाती थी।हर दिन देर हो जाती थी पहुंचने में।दौड़ते दौड़ते थक‌ गई थी।फ़िर दोपहर में आकर सब को खाना परोस कर दो।पांच मिनट … Read more

बेटे की मर्यादा निभाए मातृभक्त कहलाए,, पत्नी के प्रति मर्यादा निभाए जोरू का गुलाम हो जाए.. गलत कौन?? – नीतिका गुप्ता

 क्या हुआ… इतनी रात में कमरे में क्यों टहल रही हो?? यार मुझे ना गुलाब जामुन खाने की क्रेविंग हो रही है लेकिन फ्रिज में है ही नहीं… ऐसे कैसे तुमने ठीक से नहीं देखा होगा,, आज ही तो दोपहर में मैंने आधा किलो का डब्बा ला कर रखा है.. चलो मैं तुम्हें देता हूं। … Read more

ह्रदय से सींचा है – नीरजा कृष्णा

विभा इधर काफ़ी दिनों से महसूस कर रही थीं…उनका सात वर्षीय पुत्र अनुपम बहुत उदास और सुस्त सा हो गया है। खाना पीना भी कम हो गया है। आज तो हद ही हो गई। स्कूल से आकर सीधे अपने कमरे में जाकर रोने लगा था। वो व्याकुल होकर उसके पास गई और उसे गोद में … Read more

 मैं ही क्यों * –  मधु शुक्ला

सुबह नम्रता जैसे ही बिस्तर त्यागती, उसकी पाँच महीने की बेटी रोने लगती। वह उसको गोद में लेकर घर के काम निवटाया करती थी। लेकिन फ्रेश तो उसको लेकर नहीं हो सकती थी। यह बात। कोई नहीं सोचता था। बल्कि जब वह अकेले होने पर रोती तो उसकी ननद और पति दोनों ही उसको खरी … Read more

घर की मर्यादा – सविता गोयल

मिनाक्षी की शादी एक सम्पन्न परिवार में हुई थी। किसी चीज की कोई कमी नहीं थी ससुराल में| शहर में बहुत इज्जत और नाम था उसके ससुर जी का| घर में एक जेठ-जेठानी और एक कुंवारा देवर था जो बाहर पढ़ता था| मिनाक्षी की जेठानी बहुत ही सीधी-साधी सी थी, बस अपने काम से मतलब … Read more

मुझे अपने संस्कारों से समझौता पसंद नहीं – अर्चना कोहली “अर्चि”

माया का रंग कुछ दबा हुआ था। इस कारण उच्च पद पर होने के बावजूद उसकी शादी में रुकावट आ रही थी। माता-पिता द्वारा बहुत चप्पलें घिसने के बाद एक जगह उसकी बात बन गई। शादी का मुहूर्त दो दिन बाद निकला। समय कम था। ज़ोर-शोर से शादी की तैयारियाँ शुरू हो गई।। एक दिन … Read more

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