अतीत का सबक – डॉ. पारुल अग्रवाल

संजना को आज बेटी सांभवी के करुणा से भरे हुए शब्दों और विनती ने आज से लगभग तीस साल पहले पहुंचा दिया था। जब वो बीस बाइस साल की कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा थी। जिसकी दुनिया घर से कॉलेज और कॉलेज से घर तक ही सीमित थी। जिसे कॉलेज में पढ़ने के लिए तो … Read more

पुनर्मिलन अपने प्यार से – संगीता अग्रवाल 

” शुक्र है अब सब कुछ सामान्य हो गया ..इस मास्क से भी लगभग छुटकारा मिल ही गया है !” नताशा फोन पर अपनी दोस्त शालिनी से बोली। ” हां यार सही कहा तुमने इस मास्क के चक्कर में कितनी लिपस्टिक खराब हो गई पड़े पड़े अब जब सब कुछ खुल गया अब नए शेड्स … Read more

बेटा है तो क्या इसे संस्कारों की जरूरत नहीं – सुल्ताना खातून

सुमित्रा मैंने तकिये के नीचे छूट्टे पैसे रखे थे मिल नहीं रहे….. तुमने रखे हैं क्या…. केशव विस्तर टटोलते हुए बोला, केशव जल्दी में था…. छुट्टे पैसे रखने से किराया देने मे देरी नहीं होती…घर का इकलौता स्कूटर तायाजी ले गए थे….. रजत से पूछिये चाचाजी मैंने उसे नुक्कड वाली दुकान से ढेर सारे चिप्स … Read more

संस्कार बड़ों से ही बच्चों को मिलते हैं – के कामेश्वरी

विनय मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मा था । अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था । पिता एक बहुत बड़े प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे ।विनय बहुत ही होनहार छात्र था इसलिए उसने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बिट्स पिलानी में पूरी की थी।अहमदाबाद के कॉलेज में आइ बी एम की पढ़ाई पूरी की थी । … Read more

संस्कार – डाॅ संजु झा

संस्कार  मानव जीवन  का अनमोल धरोहर  है।प्रत्येक माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों में  अच्छे संस्कार के बीज बोते हैं।हाँ!यह अलग बात है कि कुछ बच्चे बड़े होने पर  भी अपने संस्कारों के प्रति सजग रहते हैं और कुछ उन संस्कारों  को विस्मृत कर जाते हैं। संस्कार  से सम्बन्धित एक कहानी मेरे जेहन में आ … Read more

मैं ग्वांर नहीं संस्कारी हूं – सुल्ताना खातून

ये क्या पूजा भाभी आप नित नए डिज़ाइन की मेंहदी हाथों पर लगाएं रखतीं हैं…एकदम गवांरो की तरह… सात साल हो गए आपकी की शादी को पर आपको पर आपने शहर का रहन सहन नहीं सीखा…ये पूजा की छोटी नंद कह रही थी जिसकी अब शादी होने वाली थी। पूजा गांव की रहने वाली थी…लेकिन … Read more

संस्कार ही रिश्तों को मज़बूत करते हैं – के कामेश्वरी 

सुभाष चन्द्र के दो संतान थे । एक लड़की जो बड़ी थी बिंदु और उसका छोटा भाई रमेश चंद्र था । सुभाष चंद्र की शादी पहले ही एकबार हो चुकी थी परंतु उनकी पहली पत्नी बिंदु को जन्म देते ही गुजर गई थी । बिंदु की परवरिश करने के लिए उन्होंने फिर से मंजू से … Read more

बेटी के घर में माँओं का दख़ल – कल्पना मिश्रा

“आज क्या-क्या खाया? किसने बनाया?”  “अच्छा, तो तेरी सास क्या कर रही थीं? वो आराम फ़रमाती रहती हैं क्या? “ “क्या? तेरे सास,ससुर भी तेरे साथ पिक्चर /बाज़ार जाते हैं? मतलब? हर जगह पीछे-पीछे लगे रहते हैं, तुझे प्राइवेसी नही देतें?” “नौकरानी नही है तू, क्यों जुटी रहती है?अबकी बार कह देना मुझे ज़्यादा काम … Read more

संस्कार- यात्रा – कमलेश राणा

मैं शायद उस समय छः महीने का था जब मेरे पापा मुझे और माँ को लेकर मुंबई आ गये थे क्योंकि उत्तराखंड के पहाड़ों पर जीवन यापन करना बहुत ही मुश्किल कार्य है। उनके एक मित्र मुंबई में टैक्सी ड्राइवर थे। जब वो गाँव आये तो पापा उनके साथ इस महानगर में भाग्य आजमाने चले … Read more

मिन्नू के संस्कार – दीक्षा शर्मा

‘ आप क्यूं उस छोटे बच्चे को मार रहे हैं अंकल!’ मिन्नू चिल्लाकर बोला। ‘ तुझसे क्या, तू कौन होता है बोलने वाला, छ्टांग भर का लड़का!’ उस आदमी ने अपनी भारी आवाज़ में मिन्नू को डराकर कहा। मिन्नू छोटा था। वह रोने लगा।पर फिर पता नहीं क्या हुआ वह दौड़कर उस नन्हे पिल्ले के … Read more

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