सीता – कल्पना मिश्रा

“सीता! जल्दी से मेरे लिए चाय बना दे,फिर उसके बाद साहब के लिए नाश्ता तैयार कर देना।” “सीता आँटी! मेरे लिए कॉर्नफ़्लेक्स”..बिट्टू कमरे से ही चिल्लाया।” “सीता बेटा! मेरे लिए तो कम तेल लगाकर दो पराठें ही बना दे और हां,मुलायम बनाना,वरना फिर दाँतों से नही कटते”…दादी माँ ने भी अपनी फरमाइश सुना दी। “जी … Read more

“जब बहू ने किया शुभारंभ” – पल्लवी विनोद

जब से मुम्बई आयी हूँ जाने क्यों मन बार-बार पुराने दिनों में चला जा रहा है। ‘चंचला’ दादाजी ने यही नाम दिया था मुझे ! अक्सर माँ से कहते बहू इसका नाम शालिनी से बदलकर चंचला कर दो, तब माँ कहती अरे पिताजी ! इस नाम पर तो ये लड़की एक जगह नहीं ठहरती ! … Read more

मेरी बेटी अपनी खुशियों की बलि नहीं चढ़ाएगी –  मनीषा भरतीया

सिम्मी जब तू इतनी सी थी बस पैदा ही हुई थी….तब मैंने तुम्हें अपने हाथ में लेकर अपने आप से वादा किया था….कि मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करूंगी….जिस तरह मेरी खुशियों मुझसे छीन ली गई है मैं अपनी बेटी की खुशियों को किसी को छीनने नहीं दूंगी….. कभी बेटी ,कभी बहन, तो कभी पत्नी … Read more

आदमी – बेला पुनिवाला 

   तो दोस्तों, आज तक सब औरत के लिए ही बातें हो रही है, उनके मान, सम्मान, उनका हक़ और वह क्या – क्या सेहेन करती है, उस के बारे में बहोत कुछ सुना होगा आप लोगो ने। अच्छा चलो माना की ये बात सही, औरत प्रेम की पुजारन और समर्पण की देवी और भी बहोत … Read more

काश तुम लौट आती – मीनाक्षी सिंह 

श्याम लाल की पत्नी का हाल ही में स्वर्गवास हो गया ! उनके मन की व्यथा वो कुछ इस तरह बयां कर रहे हैँ ! कितना अच्छा होता मधू कि तुम देख पाती तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे बहू बेटे कितना बिलखकर रो रहे हैँ ! कहती थी कोई नहीं रोयेगा तुम्हारे सिवा ! सब … Read more

ऐसा भी होता है – नीरजा कृष्णा

आज मीरा अपनी बेटी दिव्या से बहुत चिढ़ गई थी। उसी चिढ़ में खिसिया कर दो झापड़ भी रसीद कर कर दिए…अब क्या था…वो गला फाड़ फाड़ कर रोने लगी। पहले से ही परेशान मीरा और भी चिढ़ गई… उसे और मारने दौड़ी, तब तक विनय ने आकर उसके बढ़े हुए हाथ पकड लिए ,”ये … Read more

असल से ज्यादा सूद प्यारा होता है – नीतिका गुप्ता

 रागिनी जी आज बहुत खुश हैं, हो भी क्यों ना भला..?? आज उनकी बेटी के साथ साथ उनकी इकलौती नातिन भी अपनी नानी के घर आ रही है। टिम्मी को उसके जन्म के समय ही तो देखा था जब नामकरण में छोछक भरने गई थीं। जब पहली बार उसे गोद में लिया तो लगा मानो … Read more

घर बिखरा है रिश्ते नहीं – पूजा अरोरा 

बच्चे स्कूल जा चुके थे और पीयूष भी अपने दफ्तर को जैसे ही निकले हर रोज की तरह माधवी ने जल्दी से रसोई घर में जाकर दो कप इलायची वाली कड़क चाय बनने के के लिए रख दी | यही तो समय होता था जब सुबह की भागदौड़ और शोर शोरगुल के बाद दो घड़ी  … Read more

तलाक- लड़की की बदनामी या नवजीवन ?? – संगीता अग्रवाल 

” बेटा नताशा कैसी हो तुम ?” रोहिणी जी ने अपनी नवविवाहित बेटी को फोन किया और पूछा। ” मैं ठीक हूं मां आप बताओ !” नताशा ने उत्तर दिया। ” बेटा हम भी ठीक हैं तुम्हारे पापा तुमसे मिलना चाहते है तो परसो हम लोग आ रहे हैं तुम्हारे ससुराल !” रोहिणी जी बोली। … Read more

उसने हमारी ख्वाहिश को तिरस्कृत नहीं किया पर पुरस्कृत किया है….. – भाविनी केतन उपाध्याय 

 वाह, भाभी,नई साड़ी और उस पर से सब मैचिंग क्या बात है ? कोई लॉटरी लगी या कोई नई दोस्ती हुई ? वैसे आप बहुत जंच रही है ” नीलम ने अपने मामा की बेटे की बहू दिपिका का सब के सामने मज़ाक उड़ाते हुए कहा । ” नहीं दीदी, यह तो आप के भतीजे … Read more

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