भरोसा खुद पर – गोमती सिंह 

—–आज रीना ससुराल में  पूरे एक महीना दस दिन ब्यतीत करके पहली बार मायका आ रही थी।  माँ की धड़कन तेज़ तेज़ गति से चल रहा था। पता नहीं रीना का ससुराल का पहला अनुभव कैसा होगा ! वह अच्छी तरह से जांच परख कर रिश्ता तय की थी । मगर माँ जब बेटी को … Read more

फिर भरोसा क्यों टूटा?? – रश्मि प्रकाश

कभी-कभी इंसान इतना बेबस हों जाता है कि उस इंसान को भी सुना देता है जिसे वो बहुत अच्छी तरह से जानता हो…. ऐसा ही आज सद्भावना निवास में हुआ था जहाँ घर की बेटी तो नहीं पल बेटी जैसी पर भरोसा नहीं किया जा सका था….कनिका वो लड़की जो इस घर को अपना और … Read more

अपने – ज्योति अप्रतिम

सुनो ,एक बात कहना है तुमसे।बहुत दिनों से सोच रहा हूँ ,तुम्हें बताऊँ। नौकरी का कोई भरोसा नहीं है। मंदी को देखते हुए छंटनी हो सकती है। राम ने पत्नी से कहा। तो फिर क्या सोचा आपने ? पत्नी ने चिंतित स्वरों में पूछा। मैं सोच रहा हूँ कि एक छोटा सा बिज़नेस शुरू करूँ … Read more

बिखरते रिश्ते – के कामेश्वरी

यश ऑफिस से थक कर आता है देखता है कि बैठक में सूटकेस रखे थे उसे आश्चर्य होता है कि इंडिया से कौन आया है क्योंकि इतने बड़े सूटकेस तो वहाँ से ही आते हैं । दीप्ति को पुकारता हुआ अंदर जाता है और पूछता है कि दीप्ति इंडिया से कोई आए हैं क्या ? … Read more

मेरी माँ–कहानी–देवेन्द्र कुमार

मुझे बाज़ार जाने के लिए रिक्शा की तलाश थी। आसपास कोई रिक्शावाला दिखाई नहीं दे रहा था। मैं इधर उधर देखता खड़ा था,तभी एक रिक्शा मेरी ओर आती नजर आई। रिक्शा चालक को देख कर मैं चौंक गया। वह तो कोई बच्चा लगा मुझे। वह रिक्शा चला नहीं पा रहा था। आखिर एक बच्चे को … Read more

हरी चूड़ियाँ – ऋता शेखर ‘मधु’

ऑफिस जाते समय ट्रैफिक सिग्नल पर दो मिनट के लिए रुकना रोजमर्रा की बात थी| जब गाड़ी वहा़ँ पर रुकती तो कार का शीशा खटखटा कर अपने हाथ फैलाने वाले उन विशेष टोली के सदस्यों को देखना भी आम हो चुका था| उस समय नेहा कभी शीशा उतारने के लिए सोच नहीं पाती क्योंकि उन्हें … Read more

मैं लौट आया वापस – मंगला श्रीवास्तव

रोज की तरह ही शाम को दरवाजे पर खड़ी सुनयना सागर का इंतजार कर रही थी।हालांकि वह जानती थी उसका इंतजार व्यर्थ ही है। क्योंकि सागर आजकल कभी कभी हफ़्तों तक नही आता था, या बहुत देर रात को नशे में धुत होकर आता था l परंतु सुनयना फिर भी हर शाम को सात बजे … Read more

मान अपमान – ज्योति अप्रतिम

“अब आ रहीं  हैं आप !जब सब काम हो चुका है। “ आफिस में आज नए डी जी एम के स्वागत में होने वाले कार्यक्रम की व्यवस्थापिका ने दहाड़ लगाई । जी ,जी वो …… प्रीतिका नई आई हुई क्लर्क ने धीरे से अपना पक्ष रखना चाहा लेकिन डर के बारे शब्द नहीं मिल पाए। … Read more

 बेटा हमारे साथ धोखा हुआ है..…  – भाविनी केतन उपाध्याय

“माँ. इस एफ. डी. में आप के हस्ताक्षर कर दीजिए, मुझे अभी पैसों की जरूरत है ” नविन ने अपनी माँ रमा जी से कहा। पर बेटा, ये पैसे तो समीर के बेटे की कॉलेज फीस के है, मैं तुम्हें कैसे दे सकती हूँ? और फिर तुम्हें तुम्हारे हक के पैसे तो दे दिया है … Read more

मुझे मेरे बेटे पर पूरा विश्वास है। – नीरू जैन

कहते हैं ना खुशियां जब भी आती है चारों और से आती है शायद दुख भी ऐसे ही आता है। चारों तरफ पूरी दुनिया में हाहाकार मच रहा है। पिछले साल अक्टूबर 2020 में पूरी दिल्ली में कोरोना की लहर थी। उसमें मेरे घर में और अधिकतर सभी रिश्तेदारों के यहां कोरोना हो रहा था। … Read more

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