भरोसा – दीपा माथुर
राधा चौक में दरी बिछाए कपड़े तह करती हुई बडबडा रही थी। धूप जाने का समय हो गया घड़ी भर कमर आड़ी की हो तो ? और ऑफिस और स्कूल से आते ही सब ऐसे रॉब मारेंगे जैसे बहुत आराम फरमा रही थी। ” मम्मी नाश्ता दो मुझे खेलने जाना है।” विपिन ( बड़ा बेटा) … Read more