दूध और शक्कर- ज्योति व्यास

“भाभी , ये साड़ी  मुझे मेरी जेठानी के सामने दे देना जब मैं भाई और आपको तिलक लगाऊंगी।” सीमा ने अपनी नई भाभी को  किचेन में ले जाकर एक पैकेट थमाते हुए कहा।सीमा भाईदूज पर अपने पीहर आई थी। भाभी ने  सीमा की ओर प्रश्नात्मक दृष्टि से देखते हुए कुछ पूछना  चाहा जिसे सीमा ने … Read more

आखिर  क्यों – विजया डालमिया

कृष्णा ,ओ कृष्णा ,रुक जाना ।तेज -तेज दौड़ते हुए सुरभि हाँफने लगी थी। नाजुक सुरभि छोटे-छोटे कदमों को तेजी से भागने के चक्कर में घायल कर रही थी। पर कृष्णा ….उसे तो मजा आ रहा था ।वह सुरभि को और ज्यादा थकाना चाहता था ।बात तो सिर्फ एक खिलौने की ही थी। सुरभि की प्यारी … Read more

अन्धविश्वास – बीना शुक्ला अवस्थी

आज गौरांगी आफिस से आई तो घर के निचले भाग में स्थित सदा खुली रहने वाली देवर की दुकान बन्द थी। ऊपर आई तो देवर बुखार के कारण लेटा था, पास बैठी सास और ननद उसे सहला रहीं थी। देवर की तबियत पूॅछने पर दोनों ने किसी अज्ञात टोने टोटके करने वाले को रो रोकर … Read more

हर गलती की क्षमा नहीं  – डॉ उर्मिला शर्मा

   मंदाकिनी अपने माता-पिता की इकलौती सन्तान थी। बड़ी ही मधुर स्वभाव की लड़की थी। आमतौर पर एकलौती सन्तान लाड़-प्यार में थोड़े बिगड़े होते हैं, किंतु मंदा (सब प्यार से उसे यही बुलाते थे) के साथ यह बात न थी। जब वह 12 वीं में थी तभी एक दिन रात को जब वह मां के साथ … Read more

बहू से उम्मीद तो दामाद से क्यों नहीं !! – मीनू झा

रेवती को समझ आ गया उसे अब क्या करना है.. क्योंकि इस मुद्दे पर जिस तरह विनीत का व्यवहार हो जाता है उसे बड़ा ही अजीब लगता है…मतलब…समझ ही नहीं पाती वो कि इतना सभ्य,सुशील संस्कारी और व्यवहारिक विनीत ऐसा क्यों करने लगता है,कारण पूछो तो कहेगा—पता नहीं क्यों मुझे अच्छा नहीं लगता…तुम उनकी बेटी … Read more

उम्मीद रखो पर स्वार्थी ना बनो! – प्रियंका सक्सेना

“आ जाओ ना माॅ॑ !भाभी को गर्मी में लू लग गई है, जरा सा बुखार ही तो है भाभी को और आप इस चक्कर में मेरी महीने ‌भर में एक बार होने‌ वाली किटी पार्टी बिगाड़ने पर तुली हो।”मालिनी ने बड़े अधिकार पूर्वक अपनी माॅ॑ से कहा, उसे पता है कि उसकी माॅ॑ गर्मी- सर्दी … Read more

एक औरत का माँ बनने  का सफर – मीनाक्षी सिंह

हम लड़किया बचपन से ही एक धारणा  बना लेती है कि बड़े होकर हमारी शादी होगी और फिर बच्चे और फिर हमारा जीवन ख़ुशी ख़ुशी बीतेगा. लेकिन ज़िन्दगी हर कदम पर कोई ना कोई नया संघर्ष देती है जिसकी वजह से हम टूट जाते है. मीता एक बहुत ही अल्हड़ सी मस्त मौला मिजाज की … Read more

आखिर औरत को ही सबकी उम्मीद पर क्यूँ खरा उतरना पड़ता हैँ ???? – मीनाक्षी सिंह

सनी -भाभी बाहर मेहमान आये हैँ ,,मम्मी कब से आवाज लगा रही हैँ ,,चाय तो दे आईये ! और हाँ मेरी अच्छी भाभी मेरे लिए एक सैंडविच और एक काफी भी रेडी कर दिजिये फटाफट ! मुझे अभी दोस्तों के साथ निकलना हैँ ! बांसुरी का देवर सनी सारी बात एक सांस में बोल गया … Read more

मेरी देवरानी की नजर में मेरी इज्जत क्या रह जाएगी..? – पूनम गुप्ता 

अरे “”बड़ी बहू संध्या तुम कहां बिजी हो अब तक पूजा की कोई तैयारी नहीं की और ना ही थाल सजाकर रखा है”” तुम्हें पता है ना मेरे छोटे बेटे की पत्नी छोटी बहू मेरे घर आने वाली है उसका स्वागत है ऐसे ही करोगी क्या दरवाजे की ओर देखती हुई संध्या की सासू मां … Read more

गुलाबी आभा – नीरजा कृष्णा

सविता का हॉल जगमग कर रहा था। आज उसके यहाँ किटी पार्टी का आयोजन था। थीम थी…पिंक या गुलाबी। सभी महिलाएँ एक से बढ़ कर एक गुलाबी साड़ियों में सुसज्जित थी। सविता की सासूमाँ आई हुई थीं अतः निर्णायक की भूमिका का भार उन्हीं पर डाल दिया गया था। वो किंचित अचकचा कर कहने लगी … Read more

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