सोने का पिंजरा – दीपा माथुर 

बचपन से ही सुनंदा को किताबें पढ़ने का बहुत शौक रहा। जब सुनंदा नन्ही सी थी तब पिताजी अच्छी अच्छी कहानियों के ढेर लगा दिया करते थे। उनको पढ़ कर सहेज कर रखना उसकी आदतों में शुमार था। फिर धीरे धीरे उम्र के साथ किताबों का स्तर भी बढ़ता गया और उन किताबों से मिलने … Read more

घर का ठग  – पूजा मनोज अग्रवाल

जानकी जी कानपुर के एक छोटे से गांव में अपने दो बेटों के साथ रहती थीं , बड़ा अनुज और छोटा मयंक । उनके बड़े बेटे की उम्र करीब छब्बीस वर्ष थी ,,,वह उसके लिए एक पढ़ी  लिखी व सुघड़ लड़की की तलाश में थी ,,, वैसे तो जानकी जी के घर में किसी बात … Read more

‘ अनूठा नया साल ‘ – विभा गुप्ता

     कुछ साल पहले की बात है, मैं अपने बच्चों को कोचिंग कराने के लिए कोटा शहर में रह रही थी।साल के अंतिम दिन यानि कि 31दिसंबर को मैंने सोचा कि अलमारी की साफ़-सफ़ाई की जाए।आलमारी खोलने पर बड़े बेटे के बहुत सारे अनुपयोगी वस्त्र दिखाई दिये।सोचा,इन्हें किसी को दे दूँ,पर किसे,समझ नहीं आ रहा था। … Read more

“आपका प्रभुत्व वाला स्वभाव हमारे रिश्ते को खोखला कर रहा है! बस अब और अन्याय नहीं!” – ज्योति आहूजा 

आज विवेक और कल्पना जी के घर से काफ़ी तेज़ आवाजें आ रही थी। वे इतनी तेज़ थी कि आराम से पड़ोसियो को भी सुनाई  दे रही थीं। एक बहुत बड़ी वजह, एक कारण जो कई सालों से विवेक जी के घर में आपस में विवाद, कलह, मनमुटाव की बड़ी वजह बन चुका था। वह … Read more

” बच्चों बीच संतुलन रखो बहू नहीं तो बड़े के साथ अन्याय होगा ” – अमिता कुचया

आज सुहानी दो बच्चों की मां है , उसका एक बड़ा बेटा जो आठ साल का है, दूसरी बेटी अभी चार महीने की है ।पर बड़े बेटे  को अभी भी लगता कि उसकी मां दूध का गिलास लिए पीछे -पीछे दौड़े, उसे हाथों से खाना खिलाए, उसे नहलाएं कपड़े बदले।पर  छोटी बच्ची के कारण वो … Read more

काश..एडजस्ट करना नही,बल्कि जवाब देना सिखाया होता। – ममता गुप्ता

अरे रितु!! तू अचानक से यहाँ कैसे….तेरे ससुराल में सब ठीक तो है ना..औऱ तेरे चेहरे पर ये निशान कैसे…? कुछ हुआ है क्या….? रमा ने बेटी रितु से कहा।।। माँ मुझे …वहाँ नही रहना… वो लोग इंसान नही दरिंदे हैं..मुझे बचा लो माँ… मैं तलाक चाहती हूं।। तलाक शब्द रितु के मुँह से सुनते … Read more

अपने लिए जीने का कब सोचेगी ? – मीनू झा 

यार मैं तुझसे मिलने आई हूं, बातें करने आई हूं तेरे साथ समय गुजारने आई हूं…ये खाना पीना और खातिरदारी करवाने नहीं पर तू तो समय ही नहीं दे रही मुझे..इससे अच्छा और ज्यादा समय तो तू मुझे वीडियो काॅल पर दे देती थी बस अभी आई चित्रा थोड़ा सा समय दें..सारा काम निपट ही … Read more

वर्ना… वर्ना क्या कर लेंगीं आप?? – सविता गोयल

नीलम एक मध्यमवर्गीय परिवार की पढ़ी लिखी, सर्वगुण संपन्न लड़की थी। उसके पिता उसके लिए रिश्ता देख हीं रहे थे कि नीलम की बुआ एक बड़े घर का रिश्ता लेकर आ गई। देखने सुनने में सब अच्छा लगा तो नीलम के पापा ने नीलम की रजामंदी से उसका रिश्ता वहीं तय कर दिया।    नीलम भी … Read more

बेटी मुझे माफ़ कर दे ,मैं तेरी खुशियों का गुनहगार हूँ। – ममता गुप्ता

आज कई बरसो बाद वो अपनी माँ के आगे बिलख पडी..। अरे !! क्या हुआ मेरी लाडो..तुम इतना रो क्यो रही हो..? इतनी सालों में आज माँ से मिली हैं शायद इसलिए बिलख बिलख कर रो रही है ना… यसोदा जी ने अपनी बेटी नमिता को गले लगाते हुए कहा।। माँ!” मैं अब ससुराल कभी … Read more

हैप्पी न्यू इयर” – उषा भारद्वाज

          आज नव वर्ष का पहला दिन ,सभी लोग कॉल मैसेज कर रहे। शुभकामनाओं का तांता लगा हुआ है। जाने क्यों मन में एक  बात आ रही है कि सब कुछ वैसा ही है, जैसे बीता हुआ कल था । बदली है तो सिर्फ वर्ष की संख्या।  हर बात वही है। दिन की शुरुआत की … Read more

error: Content is protected !!