हैप्पी न्यू इयर” – उषा भारद्वाज

          आज नव वर्ष का पहला दिन ,सभी लोग कॉल मैसेज कर रहे। शुभकामनाओं का तांता लगा हुआ है। जाने क्यों मन में एक  बात आ रही है कि सब कुछ वैसा ही है, जैसे बीता हुआ कल था । बदली है तो सिर्फ वर्ष की संख्या।  हर बात वही है। दिन की शुरुआत की … Read more

अनजान फोन से दिल के रिश्ते मजबूत हो गए – ममता गुप्ता

आज सुबह से ही बार बार फोन बज रहा था। जैसे ही राधा फोन रिसीव करती वैसे ही फोन कट हो जाता। पता नही आज सुबह से कौन फोन किए जा रहा है औऱ बात भी नही करता/करती हैं।। “राधा बार बार अनजान नम्बर से फोन आने से परेशान हो रही थी,उस फोन की वजह … Read more

 रिश्ता कागज के नोटों का!! – मनीषा भरतीया

नीता की शादी जिस घर में हुई थी वो लोग बहुत लालची थे यह बात नीता और उसके घर वालों को पहले समझ में नहीं आई उन्होंने तो बस लड़का देखा अच्छा लगा और कर  दी नीता की शादी! नीता से शादी के पहले ही नरेश (नीता का पति )सारे घर का खर्चा उठाता था|, … Read more

 मानो मेरी बोली लगाई जा रही थी…. – भाविनी केतन उपाध्याय 

” तुम्हारे तो मज़े है भाई , ससुराल भी नजदीक और खुद का घर भी …. रोज़ ससुराल आना जाना लगा ही रहता होगा और मुझे लगता है कि तुम बहुत किस्मत वाले हो जो दो दो घरों का खाना खानें को मिलता है । कभी कभी हमें तुम्हारी ईर्ष्या होने लगती है…” केन्टिन में … Read more

चाहत को मिले पंख – लतिका श्रीवास्तव

अरे सुधांशु ए सुधांशु….पापा की अनवरत आती हुई आवाजों ने सुधांशु को बेचैन कर दिया वो लपक कर कमरे से बाहर निकल आया .. हां पापा क्या हुआ !!!ऐसे क्यों आवाज़ दे रहे हैं आप..!बताइए क्या हो गया बहुत परेशान दिख रहे हैं….!!बेटा बैंक से मेरे रुपए कोई निकालता जा रहा है .. ये देखो … Read more

लव आजकल  – डॉ उर्मिला शर्मा

लड़के- लड़कियां होटल के बाहर ओला कैब के आने का वेट कर रहे थें। तभी शिवानी की मम्मी का कॉल आया- “कहाँ हो बेटे?” “बस! मम्मी निकल रही हूं, ओला का वेट कर रही। होस्टल पहुंच कर फोन करती हूं।” रात के साढ़े ग्यारह हो गये थे। शिवानी जब भी होस्टल से बाहर जाती मम्मी … Read more

चार लक्खी (कहानी) -डॉ उर्मिला सिन्हा

   देवकी कल रात से ही उतावली हो रही है।रात भर वे ठीक से सो नहीं पाईं … नींद आती कैसे जिन आंखों में नन्दलाल की मोहिनी सूरत बैठी हुई हो उसमें नींद कहां?    देवकी का बेटा नन्दलाल आई०पी०एस०भारत सरकार का जिम्मेदार पुलिस अफसर।     पूत के पांव पालने में ही दीखने   लगा। वह बचपन से … Read more

चाह -मीता जोशी

“क, की, कु, छ, घ अक्षर से नाम निकला है जोशी जी। आओ आकर पोती के कान में उसका नाम सुना दो। “      शंख को पीले कपड़े में लपेट, पंडित जी ने जोशी जी के हाथ में दे दिया। उन्होंने उसे पकड़ धीरे से कान के पास जा पुकारा “मेरी प्यारी कृष्णकली। “ दादा जी … Read more

हर बेटा शादी के बाद नहीं बदलता – मीनाक्षी सिंह

सुमित एक एमएनसी में बी .टेक करके एक बड़े ओहदे पर कार्यरत था  ! छह बहनों में एकलौता  भाई और सबसे छोटा था सुमित ! सभी उसी से उम्मीद लगाते थे कि अब ये ज़िम्मेदारियां संभालेगा ! और उम्मीद गलत भी नहीं थी ,सुमित था भी ऐसा ! स्वभाव से बहुत ही सरल ,मृदुभाषी और … Read more

हाथ में – कंचन श्रीवास्तव

कहते हैं, ‘ पुरुष शराब और शबाब के पुजारी होते हैं ।’ ये जहां मिले अच्छे अच्छों का मन डोल जाता है।हां सच भी है, यही कारण हैं कि चढ़ती उम्र के साथ उनके पैर कब डगमगा जाते हैं,पता ही नहीं चलता और अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं। और जो संभलते हैं,उसके पीछे भी … Read more

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