बारिश और भीगी सड़क – आरती झा

भीगी सड़क देख अनायास ही अरुण के चेहरे पर मुस्कुराहट खेल गई। उसने पूरी कोशिश की थी कि सामने बैठी पत्नी विधि की नजर उसके मुस्कुराते चेहरे पर ना पड़े।  विधि चाय का कप उठाते हुए पूछ ही बैठी.. बारिश देख अरुणा की याद आ गई क्या… अरुणा अरुण की छोटी बहन..अरुण से महज दो … Read more

कटा हुआ हाथ – आरती झा

दीप के पिता तन्मय जी जल बोर्ड में क्लर्क हैं.. इतनी आमदनी हो जाती है कि अपने परिवार का जीवन यापन सही से कर सके और माँ छवि जी सुघड़ गृहिणी.. जिन्होंने अपने बच्चे को हर तरह के संस्कार से नवाजा है।      दीप बचपन से ही अपने कार्य के प्रति कर्तव्य निष्ठ और पढ़ाई के … Read more

जादू – नंदिनी

सॉरी शब्द केंसा जादू जैसा होता हेना , पल भर में गिले शिकबे शिकायतें झट से गायब कर देता है।  चलिये खुशी की कहानी सुनते हैं आज , वैसे तो बुरा मानने में सबसे आगे बचपन से ही थी जरा किसी ने तेज बोला तो आखिर बोला कैसे ,एक बार ऐसे ही नाराज होकर छत … Read more

वचन – माता प्रसाद दुबे

गीता के मन में भय समाया हुआ था..कि कही रवि के मम्मी पापा उसे अस्वीकार न कर दें..एक हादसे ने उससे उसका सब कुछ छीन लिया था..पहले पिता फिर उसकी मां भी उसका साथ छोड़कर परलोक सिधार गई थी। एक रवि के सिवा उसका साथ देने वाला और कोई नहीं था।रवि दो साल पहले ही … Read more

ब्लैकमेल – नीलिमा सिंघल

“अरे रे,,,ये कांता की बहू को क्या हो गया, कैसा हुलस हुलस कर नाच रही थी,,,,सास ससुर सामने बैठे थे,,और वो नाचने मे मग्न थी,,,,चलो,,,,नाची तो नाची पर गाना भी कौन सा था,,,,,,सास गारी देवे,,,देवर जी समझा देवे,,ससुराल गेंदा फूल,,,,,,,” अभी अभी किसी रिश्तेदार की शादी से वापस आयी मंजुला जी तिलमिला रही थी,,आगे अपनी … Read more

 सम्मान की मुस्कान – लतिका श्रीवास्तव

नेहा बहुत तत्परता से अपने काउंटर के सभी कार्य निबटा रही थी,उसकी कार्यकुशलता के साथ उसका अपने कार्य के प्रति निष्ठा और रुझान भी स्पष्ट परिलक्षित हो रहा था…एकमात्र उसका ही काउंटर ऐसा था जहां प्रतीक्षा कर रहे लोगो की लंबी कतार नही थी….वो बहुत शांति से अपने कार्य कर रही थी…भाव हीन सा चेहरा … Read more

सुबह का भूला – नीलम सौरभ

“नहीं मम्मीजी, ऐसा तो अब कहीं नहीं होता…और होता भी होगा तो मुझसे नहीं हो पायेगा!”आज यह पहली बार था कि परिवार की छः माह पुरानी छोटी बहू स्तुति सास की असंगत बात सह नहीं सकी थी तो उलट कर बोल पड़ी थी। वह अब तक विदाई के समय माँ, ताई जी व बड़ी भाभियों … Read more

 समन्वय  – पुष्पा जोशी

     शास्त्री जी बोलते कुछ नहीं, इशारे से कविता को कुछ कहने के लिए मना करते,और हौले से उसके सिर पर हाथ रख देते | कविता को अपने सिर पर एक छत्र महसूस होता ,और सासुजी की बात का, उस पर असर नहीं होता | वह जानती थी ,कि वह कुछ गलत नहीं कर रही … Read more

मै हूं न? – संगीता श्रीवास्तव

घर की चहेती, मोहल्ले की चहेती, धोबिन की चहेती , रामू काका की चहेती, कामवाली बाई की चहेती, सबकी चहेती थीं कुम्मु आंटी। कभी भी किसी की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। कभी कामवाली की बेटी की शादी हो, कभी रामू काका के बेटे का जनेऊ हो या साजिदा की मां, धोबिन का रोजा … Read more

घूंघट –  हेमा दिलीप सोनी

सावित्री जी दो देवरानी जेठानी थी, सावित्री की देवरानी गांव में रहती थी, उसके दो बहू थी दोनों गुणी ,सुशील ,सुंदर उनकी बड़ी बहू के हमेशा सर पर घूंघट रहता था। कभी भी किसी ने भी उसे बिना घुंघट के नहीं देखा था, सब उसकी तारीफ करते थे कि आपकी बहू तो बहुत सुंदर, सुशील … Read more

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