परम्परा – नंदिनी

कहते हेना एक स्त्री दीवारों, छत को घर बनाती है ,एक स्त्री घर में सुकून लाती है एक स्त्री घर की अन्य महिलाओं के मनोभावों को समझ ,अपनापन देकर घर को जन्नत बनाती है । ऐसे ही सुशीला ने अपने घर को जन्नत बनाया । ये कहानी  60 70 के दशक की है ,सामान्य ग्रामीण … Read more

लोग क्या कहेंगे..? – रोनिता कुंडू

क्या कहा डॉक्टर ने अनु..? विभा जी ने पूछा…  अनु:  मम्मी जी..! सब खत्म हो गया… अब मैं अकेले दोनों बच्चों को कैसे पालूंगी..?  विभा जी:   क्यों क्या हुआ..? ऐसे क्यों बोल रही हो…?  अनु:   मम्मी जी…? कैंसर है उनको और वह भी लास्ट स्टेज…  विभा जी के पैरों तले, मानो ज़मीन खिसक … Read more

अब है संघर्ष – गुरविंदर टूटेजा 

दिव्या दादी की गोद में सिर रखकर बैठी है उसके आँसू लगातार बह रहें हैं…दादी पापा हमें छोड़कर क्यूँ चले गये मैं क्या करूँगी दादी…पापा दोनों  भाईयों (सनी व वंश ) को हमेशा कहते थे कि मेरी बेटी को कुछ मत कहा करों इसने तो एक दिन विदा होकर चलें जाना हैं…पर पापा पहले ही … Read more

जरूरत की माँ  – पूनम अरोड़ा

बहुत दिनों बाद आज आभास का फोन आया। कुशल क्षेम के आदान प्रदान के पश्चात बोला “माँ आपको तो पता है कि रिया की डिलिवरी की डेट नज़दीक आ गई है, उसे आराम की और आपकी देखभाल की बहुत “ज़रूरत” है, आप अपना और पापा का ज़रुरी सामान पैक कर के रखना, मैं सन्डे को … Read more

सोच – आरती झा”आद्या” 

ओह हो माँजी.. ये क्या। आपको भी ना चैन नहीं है। क्यूँ किया आपने ये सब..बहु साक्षी तौलिया ले बाथरुम में जाते ही बोली।  ठीक है ना बेटा तुम्हारा थोड़ा काम आसान हो गया.. सासु माँ सुधा ने कमरे से ही कहा।  लेकिन माँजी अब आप आराम करे। मैं और कमली सारे काम कर लिया … Read more

सदा सुहागन – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज नंदा की मां सदर्श ताई जी का देहांत हो गया था,सब लोग एकत्रित हुए थे।अधिकतर महिलाओं के मुंह पर एक ही बात थी कि बहुत ही सौभाग्यशाली थी,जो सुहागन ही मृत्यु को प्राप्त हुई।कुछ ये भी कह रही थी कि वैसे भी बहुत ही किस्मत वाली थी जो गरीब परिवार से आई थी और … Read more

वो रद्दी वाला  – दीपा माथुर

वो रद्दी वाला  – दीपा माथुर सुरेखा  वो रद्दी वाला सद्दाम भी ना सोच ही रही थी तभी मोबाइल की रिंग टोन ने जागते हुए स्वप्न मै विघ्न डाल दिया। कान की मशीन लगा कर फोन रिसीव किया हेल्लो कोन तनिक जोर से बोलो। मै आपका रद्दी वाला” “सद्दाम” “हा” “बहुत लंबी उम्र है रे … Read more

माँ की जगह कोई नहीं ले सकता – के कामेश्वरी

रूपा को जब पता चला कि रचना की माँ चल बसी हैं सुनकर उसे बहुत बुरा लगा क्योंकि रूपा और रचना दोनों बचपन की सहेलियाँ थीं । दोनों के परिवार एक-दूसरे को जानते थे । इसलिए शादियाँ हो गई परंतु आज तक दोनों एक-दूसरे से बिना बात किए नहीं रह सकती हैं । रूपा ने … Read more

घर की चौथी बेटी और संघर्ष – मंजू तिवारी

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का मौका था जब मैं 2004 में एक महिला महाविद्यालय से b.ed कर रही थी सुबह से ही महिला दिवस की बात हो रही थी लंच टाइम के बाद से महिला दिवस मनाया जाएगा और सभी लड़कियां अपनी अपनी स्पीच देंगी इससे पहले मैंने कभी महिला दिवस नहीं मनाया था ना ही … Read more

हरे कांच की चूड़ियाँ – कमलेश राणा

आज विम्मो की लगुन थी जब उसकी भाभी ने उसे हरे कांच की चूड़ियाँ पहनाई तो एक अलग सी उमंगें उन चूड़ियों की खनकती आवाज़ के साथ उसके मन में सर उठाने लगीं जैसे ही ये खनकतीं वह चौंक सी जाती और फिर अपने हाथों को देखकर मुस्कुरा देती। आज उसे अपने हाथ बहुत सुंदर … Read more

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