परवाज  – नीरजा नामदेव

 शम्पा  के मन में आज बहुत उथल-पुथल मची हुई थी ।वह बहुत ही ज्यादा रोमांचित औऱ उत्साहित थी। वह अपनी छत पर बैठी  आसमान और चांद तारों को निहार रही थी। उसे अपने बचपन की बातें याद आ रही थीं।बचपन में वह अपने ज्यादा समय दादी के साथ ही रहती थी। गर्मियों में आंगन में … Read more

बोलो क्या चुनोगे – हरीश पांडे 

“ऋतु चल पार्टी में चलते हैं। जल्दी तैयार हो जा।” निशा ने ऋतु की पीठ पे थपथपाते हुए कहा। ऋतु जो श्रेया की गोदी में मुँह छुपाये लेटी हुई थी, वो और जोर से रोने लगी। “ऋतु ऐसे कब तक रोते रहेगी। जो होना था वो हो गया। चल बाहर चलते हैं, कोई मूवी शूवी … Read more

परिवार का हिस्सा – रश्मि प्रकाश 

“ बड़ी अम्मा आज रात आप क्या खाएँगी.. बता दीजिए तो वही बना देंगे ।” खाना बनाने वाली सरला ने लीलावती जी से पूछा  “ क्यों आज क्या स्पेशल है जो मुझसे पूछने आई है… हर दिन जो बनता है वो ही बना दे… जो सब खाएँगे वहीं मैं भी खा लूँगी ।” लीलावती जी … Read more

चिड़िया उड़ जायेगी – डा. मधु आंधीवाल

दादी ने अपनी लाडली पोती से कहा — देखो मानसी अब तुम्हारा सम्बन्ध पक्का होगया । रोका हो गया । एक बात गांठ बांध लो बेटा ससुराल की बड़ी बहू बन कर जा रही हो । सम्बन्धों को एक जगह बांध कर रखना तुम्हारी परीक्षा है। मानसी– दादी आपने मुझे जो संस्कार दिये हैं आपको … Read more

बेटीयांँ  होती है बड़ी प्यारी, है ना ! ( भाग -2) – बेला पुनि वाला

ये तो पता नहीं, मुझे जाना था कहा ?        मगर मैं चल पड़ी थी कहीं दूर,       मंजिल का पता नहीं था, मगर कदम थे,         कि रुके ही नहीं।        मन में लिए एक ही सवाल, आखिर मेरी गलती क्या थी ? और  क्या सच में आज तक मैंने अपनी बेटी के लिए कुछ भी नहीं किया … Read more

मां ही मेरा परिवार है – गीता वाधवानी 

एक बड़े से शहर के छोटे से पार्क में विनय बैठा था। तभी उसका मोबाइल बजा, उसने देखा कि उसके दोस्त देव का फोन है।  देव-“विनय, क्या मैं 2 दिन के लिए तेरे साथ तेरे कमरे में रहने आ जाऊं? मुझे पूरी आशा है कि 2 दिन में मेरे अपने कमरे का इंतजाम हो जाएगा।”  … Read more

चार लोग…..? – मंजू तिवारी

चार लोग यह बड़े ही महत्वपूर्ण होते हैं। हर किसी के लिए लेकिन आज तक इन चार लोगों का नाम नहीं पता चल सका है ।लेकिन एक बात पक्की है। इन चार लोगों की,,, यह हर जगह मौजूद होते हैं। और सभी को इन चार लोगों का डर हमेशा सताता रहता है। परंतु एक स्त्री … Read more

तेरी मेरी प्रेम कहानी – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज बहुत दिनों बाद श्रेया को घर और ऑफिस के काम से छुट्टी मिली थी,बच्चे भी बड़े हो गए थे वो भी सुबह स्कूल के लिए निकलकर फिर अपनी खेल और गायन की कक्षा करके शाम तक ही आने वाले थे।पति भी ऑफिस के कार्य से बाहर चार पांच दिन के लिए विदेश गए हुए … Read more

शक की सुई  –  रश्मि प्रकाश

“ यार तुम अपना सामान क्यों पैक कर रही हो बताओ तो सही हुआ क्या है…. हमने एक दूसरे से वादा किया था ना हम हमेशा एक दूसरेसे सब शेयर करेंगे फिर अचानक आज तुम्हें क्या हो गया……राशि क्या बात है तुम क्यों ऐसे व्यवहार कर रही हो…. यार कुछ तोबोलो…..मेरी गलती तो बताओ……मैंने ऐसा … Read more

क्या हम तुम्हारे परिवार नहीं..? – रोनिता कुंडू

मम्मी जी..! सोच रही थी, इस गर्मी की छुट्टियों में मायके होकर आऊं… काफी समय हो गया है, अपने परिवार से मिले हुए..   राधा ने अपनी सासू मां कावेरी जी से कहा….  कावेरी जी:   पर उस वक्त तो अरुणा आएगी… तुम्हें तो पता ही है, पूरे साल में वह एक ही बार आती है… … Read more

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