परवाज – नीरजा नामदेव
शम्पा के मन में आज बहुत उथल-पुथल मची हुई थी ।वह बहुत ही ज्यादा रोमांचित औऱ उत्साहित थी। वह अपनी छत पर बैठी आसमान और चांद तारों को निहार रही थी। उसे अपने बचपन की बातें याद आ रही थीं।बचपन में वह अपने ज्यादा समय दादी के साथ ही रहती थी। गर्मियों में आंगन में … Read more