वो ईनाम कुल्फी का – लतिका श्रीवास्तव

कॉलेज की सर्वश्रेष्ठ  वक्ता की ट्रॉफी मिली थी स्वाति को आज…. इस बेमिसाल इनाम के बारे में अपने विचार व्यक्त करने के लिए उसे मंच पर आमंत्रित किया जा रहा था..,सभी ये जानने को उत्सुक थे कि आखिर इस वक्तृत्व कला की प्रेरणा क्या है..!! प्रेरणा हैं वो दो कुल्फियां स्वाति ने हंसते हुए कहा … Read more

संस्कार – अंजू निगम

“माँ,आज ऊपर वाली आंटी ने फिर सारा कूड़ा हमारे घर के आगे कर दिया| मैं अभी जा सारा कूड़ा उनके घर के आगे फेंक आता हूँ|”प्रनव के स्वर में गुस्सा था|“फिर उनमें और तुम में क्या अंतर रहा|” ऐसा कह नेहा ने घर के आगे झांडू लगा सारा कूड़ा समेट दिया|प्रनव दसवीं कक्षा में है|पढ़ाई … Read more

बेटियॉं बोझ नहीं होती – गणेश पुरोहित

“दोनो की विचारों की श्रृंखला यकायक टूटी, क्योंकि एयर हॉस्टेट उनकी सीट के समीप ट्राली ले कर आई थी और टी-कॉफी सर्व करते हुए आवाज़ लगा रही थी।“ टू कप टी प्लीज !” नीरा ने एयर हॉस्टेट की और देखते हुए आर्ड़र दिया।       “क्या सोच रहे थे, शिखर..?”…नीरा ने चाय की चुस्की भरते हुए प्रश्न … Read more

अंतिम इच्छा – अनुराधा श्रीवास्तव

सचिन की माॅं एक अनपढ़, मानसिक रोगी और उद्दण्ड महिला थी जिनका विवाह सचिन के पिता से धोखे में रखकर करवा दिया गया। तब के जमाने में बहू लाने से पहले इतनी जांच पड़ताल नहीं की जाती थी और सचिन के नाना नानी ने भी अपनी बेटी के मानसिक बीमारी को छिपाकर अपनी बला टाल … Read more

जिम्मेदारी –  दीपा माथुर

दिनकर जी आपकी बच्ची पाकर हम धन्य हो गए सच में क्या संस्कार दिए है आपने हमारे घर को तो स्वर्ग बना दिया। कोई भी पिता अपनी बच्ची के ससुर से इन शब्दों को सुनकर भावविभोर होना स्वाभाविक है। इसीलिए दिनकर जी की छाती भी दो इंच फूल चुकी थी। तभी दिनकर जी की बेटी … Read more

डर के आगे जीत है – पूनम अरोड़ा

 ईशिता  सुबह से  अलमारी से  न जाने कितनी ड्रेस निकालती — कभी आईने के सामने देखती, कभी पहन के माँ  को दिखाती फिर भी संतुष्ट नहीं  हो पा रही थी। आज उसकी बैस्ट  फ्रेंड  अनाया का जन्मदिन है और वो भी ऐसे ही नहीं  शहर के सबसे राॅयल, भव्य माने जाने वाले होटल में  सेलिब्रेट … Read more

जिम्मेदारी – पूनम श्रीवास्तव

रेखा और निशांत में बहस चल रही थी कि रेखा बार बार कहे जा रही थी कि तुम्हारे मम्मी पापा की जिम्मेदारी क्या मेरी ही है? तुम्हारे और भी दो भाई है क्या उनका फर्ज नहीं है कि वह भी अम्मा बाबूजी का ध्यान रखें लेकिन तुम्हें समझ नहीं आता है! रेखा तुम ही बताओ … Read more

जीवट – बालेश्वर गुप्ता

बचाओ- बचाओ का आर्तनाद गूँज उठा,आस पास के लोग उस आवाज की ओर दौड़ पड़े।देखा सेठ जी की दुकान के गोडाउन में मुनीम जी कई भारी बोरियो के नीचे दबे पड़े थे।सहायता की गुहार उन्ही की थी।झटपट सभी ने मुनीम जी को बाहर निकाला, पानी पिलाया।मुनीम जी जैसे ही उठने को तत्पर हुए तो फिर … Read more

मुझ-पर  हक है उसका – रीमा महेन्द्र ठाकुर

अरे गुरू उठ जा  सुबह हो गयी” मां की तीखी आवाज गुरु  के कानो में पडी”  वो कुनमुनाया”” पप्पा आ रहे होंगे “ मै” कल चला जाऊंगा पढने मां”  ये लडका रोज बहाने करता हैं “” पता नही क्या होगा इसका “ मां बडबडाऐ जा रही थी” गुरू ने वापस आंखें बंद कर ली “ … Read more

मां ” बेटी की दहलीज ” – रीमा महेन्द्र ठाकुर

मां  मै वापस आ गयी “ दरवाज़े की कुंडी खटखटाई ”  विनती ने” अंदर से कोई आवाज न आयी “ मां  सो गयी क्या “ मां “मां “ काफी देर तक इंतजार करती रही विनती” क्या हुआ बिटिया कब आयी! बस अभी काकी “ सोचा मां को सप्राइज  दे दूं”  पर ये तो  घोडा बेचकर … Read more

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