उतरन  – रश्मि पीयूष

शीतल आज बहुत अच्छा महसूस कर रही थी। एक सप्ताह से घर में मेहमानों का आना जाना लगा हुआ था। आज सुबह बेटा बहू भी हनीमून के लिए निकल गए। सारे मेहमान जा चुके थे। घर में केवल शीतल ओर बड़ी जेठानी रह गई थी। उसने चाय बनाई और एक कप जेठानी को देकर खुद … Read more

प्रेतात्मा का प्रतिशोध  (भाग-5) – गणेश पुरोहित

उसके छ: भाई-बहन थे- पांच बहने और एक भाई। पिता प्राइमरी स्कूल टीचर थे। किराये के एक छोटे से मकान में रहते थे। एक सीमित आमदनी में उनके परिवार का मुश्किल से गुजर बसर होता था। उसकी दो बड़ी बहने थी। पुत्र की आस में माता-पिता ने उसे पैदा किया था। यदि पुत्र पहले आ … Read more

 प्रेतात्मा का प्रतिशोध  (भाग-4) – गणेश पुरोहित 

राम प्रकाश देर तक कागजों में और लेपटॉप से कम्पनी के संबंध में कई तरह की जानकारियां ढूंढता रहा। अलसुबह सोया और दोपहर बाद उठा। कमरे से बाहर देखा तो उसे पूरे घर में अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ दिखाई दिया। शायद घर के सारे नौकर डर के मारे भाग गये थे। मालकिन भी धर … Read more

दिल का कारीगर – संजय मृदुल

एक देश के एक छोटे से शहर में एक दिल का कारीगर रहता था। बड़ा नाम था उसका। देश दुनिया के लोग आते उसके पास अपना टूटा, फूटा दिल मरम्मत कराने के लिये। वो हर प्रकार की मरम्मत में माहिर था। उसका बनाया हुआ दिल लगता ही नहीं था कि कभी टूटा होगा। उसके हाथों … Read more

मां का अंधविश्वास या भेदभाव – शुभ्रा बैनर्जी 

भेदभाव एक सर्वव्यापी सामाजिक बुराई है,जिसका सूत्रपात परिवार से होता है और सूत्रधार होतीं हैं औरतें।पुरुष का योगदान नगण्य है।रजनी के परिवार में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मिला,ननद के प्रथम प्रसव के समय।रजनी ने चार महीने पहले ही एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था सामान्य प्रसव द्वारा।अब नव ब्याहता ननद आई थी प्रसव के लिए।रजनी … Read more

संस्कार – नीलिमा सिंघल

ये क्या कर रही हो निशा तुम…..अपनी पत्नी निशा को कमरे में एक और चारपाई बिछाते देख मोहन ने टोकते हुए कहा … निशा – मां के लिए बिस्तर लगा रही हूं आज से मां हमारे पास सोएगी…. मोहन- क्या ….. तुम पागल हो गई हो क्या … यहां हमारे कमरे में …और हमारी प्राइवेसी … Read more

विरासत – नीलिमा सिंघल

महेश के घर आते ही बेटे ने बताया कि “वर्मा अंकल आर्टिगा गाड़ी ले आये हैं। “ पत्नी सरला ने चाय का कप पकड़ाया और बोली  “पूरे 13 लाख की गाड़ी खरीदी और वो भी कैश में। “ महेश हाँ हूँ करता रहा। आखिर पत्नी का धैर्य जवाब दे गया,”हम लोग भी अपनी एक गाड़ी … Read more

ना,ना छूना नहीं – सुषमा यादव

हमारे देश में बहुत तरह के सामाजिक , पारिवारिक आर्थिक, धार्मिक, प्रादेशिक और जातिगत भेद-भाव है,  जातिगत भेद-भाव से हमारा तात्पर्य है कि जाति के आधार पर लोगों के साथ भेद-भाव करना। बहुत से लोग विशेषकर अनुसूचित जाति और निम्न जाति के लोग आज आजादी के बरसों बाद भी इस भेद-भाव से जूझ रहे हैं। … Read more

गलती किसकी..? – रोनिता कुंडू

रीमा और सिया दो बहने थी…. जहां रीमा को अपना हर काम मेहनत और लगन से पूरा करने का जुनून था…. वहीं सीमा को हर काम जल्दबाजी में करना पसंद था… रीमा कोई भी काम को समय से पूरा नहीं कर पाती थी, क्योंकि उसकी बारिकियां छांटते छांटते उसे वक्त लग जाता था और सिया … Read more

कभी कभी ननद को भी खर्च  कर देना चाहिये – मीनाक्षी सिंह 

मीरा बड़ी ख़ुशी से माँ के घर आयी पूरे एक साल बाद गर्मियों की छुट्टी में ! माँ पिछली साल गुजर गयी ! पापा जब वो 8 साल की थी तभी परलोक सिधार गए ! उसे लगा भईया ,भाभी वैसी ही इज्जत देंगे जैसी माँ के सामने मिलती थी ! वैसे भी मीरा को फुर्सत … Read more

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