अटूट रिश्ता – डॉ पुष्पा सक्सेना 

फोन की बेल होते ही पंडित राम चरण जी ने फोन उठाया था.मन में धुकधुकी थी इतनी रात में न जाने किसने फोन किया है. राम सब कुशल करें. फोन के दूसरे सिरे से आ रही आवाज़ ने पंडित जी को संज्ञाशून्य कर दिया. हाथ से फोन का चोगा छूट कर गिर गया, धरती पर … Read more

एक मीरा ऎसी भी – डॉ पुष्पा सक्सेना

डिनर के बाद प्लेजर ड्राइव पर जाते प्रतीक ने पूछा था,यहाँ कोई बार देखा है, आंटी?बार? भला बार से मेरा क्या नाता? क्या करूँगी मैं वहाँ जाकर? वाह! यू एस ए घूम रही हैं और बार में नही गईं। चलिए आज वहाँ ‘कोक’ पीकर आते हैं। मुड़कर पीछे बैठे सुनील से प्रतीक ने पूछा … … Read more

अम्मा – रचना कंडवाल

श्याम लाल जी सुबह फ्रेश हो कंधे पर तौलिया डाल कर नहाने बाथरूम में प्रवेश करने ही वाले थे। अम्मा जो अभी अच्छी भली बाहर बरामदे में बैठकर धूप सेंक रही थी उनके करूण क्रंदन ने उन्हें बाहर आने पर मजबूर कर दिया। श्यामू ओ श्यामू ! बाहर निकल तेरे घर में मेरा गुजारा नहीं … Read more

मेरी बहू सब से अच्छी – उमा वर्मा 

।जी हाँ ।मै अपनी प्यारी बहु की कहानी कहने जा रही हूँ ।एक सुखी गृहस्थी थी उमा की।अच्छे पति, दो प्यारे बच्चे ।घर में सम्मिलित परिवार ।सास ससुर, जेठ जेठानी उनके बच्चे ।सब साथ रहते हुए भी बहुत खुश थे।पति की सरकारी नौकरी थी ।सारी सुख सुविधा मिली हुई थी ।पैसे भले ही थोड़े कम … Read more

 किसान का कर्ज़ – विभा गुप्ता

 अविनाश कृषि महाविद्यालय में प्रोफ़ेसर थें।पढ़ाने के बाद उन्हें जो भी समय मिलता,उसमें वे आसपास के गाँवों में जाकर वहाँ के किसानों को उन्नत खेती करने के तरीके बताते थें,साथ ही,उपज बढ़ाने और बीज-मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार कैसे की जाए, की जानकारी भी उन्हें देते थे।       एक बार ‘कृषि में नई तकनीकि’ विषय पर … Read more

बहु का विश्वास – दीपा माथुर

अम्मा रिटायरमेंट के बाद बाबूजी चिड़चिड़े से हो गए है पहले कितने हसमुख थे। अम्मा  निक्कू के बालो में तेल लगाती हुई बोली ” अब पहले समय ऑफिस में कट जाता था। अब सुबह सुबह सैर पर जाकर आ जाओ फिर दिनभर खटिया पर पड़े रहो। कुछ भी हो दिव्या ( बहु) फर्क पड़ जाता … Read more

तड़का – अंजू निगम

मैंने सास-ससूर दोनो को खाने पर बिठा दिया था| “हमे एक एक रोटी गरम दिया करो|ठंडी रोटी दाँतो से कटती नहीं|”सासूजी ने कहा|    मुझे भी इस बात का अहसास था और दोनो को गरम खाना ही मिले,इस बात का खास ध्यान रखती थी|   “बहू,सब्जी बहुत स्वाद बनी हैं|”ससूरजी ने कहा तो मेरा चेहरा खिल उठा| … Read more

” ननद भाभी ” – डॉ. सुनील शर्मा

बहु आंगन में नल के नीचे रात के झूठे बर्तनों से जूझ रही थी. उधर दालान में बैठी सासू मां नहा धोकर, पूजा पाठ कर चाय के लिए आवाज़ लगा रही थीं. दो-तीन बार पुकारने पर भी जब ‘ अभी लाती हूं, अम्मा जी ‘ ही जवाब मिला तो सासू मां दनदनाती हुई आईं और … Read more

बहू। बहू ना हुई-पिंजरे की मैना हो गई – कुमुद मोहन 

रीना! बहू को अच्छी तरह से समझा दियो मेरे सामने मुंह उधाड़ के खड़ी ना हो जाया करे| बहुओं का खुल्ला सिर मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं” अम्माजी ने अपनी बेटी रीना को कहा जो अपनी नई नवेली भाभी रितु के कमरे में खड़ी थी। अम्मा जी दनदनाती हुई कमरे में चली आई थीं| रितु … Read more

अच्छी बहू बाज़ार में नहीं मिलती – रश्मि प्रकाश

‘बधाई हो सुमिता तेरी बेटी की शादी तय हो गई….तेरी राशि है बड़ी क़िस्मत वाली जो बहुत जल्दी उसका रिश्ता तय हो गया….अब तोबेटी ससुराल चली जायेंगी….देखना कही उसकी सास रति की सास जैसी नहीं हो….बेचारी रति का जीना दुश्वार कर दिया है उसकीसास ने।“सुमन अपने लय में सुमिता से कहे जा रही थी सुमिता … Read more

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