अधूरे रिश्ते – किरण फुलवारी
ट्रेन में बैठी ख्याति के मन में कई सारे विचार चल रहे थे। खिड़की के बाहर पीछे छूटते खेत, दूर भागती बिजली की तारें और स्टेशन के छोटे-छोटे बोर्ड—सब जैसे उसके भीतर उठते तूफान के सामने फीके पड़ गए थे। रक्षाबंधन के एक दिन पहले ही वह अपने पीहर आई थी, बड़े भाई के बुलाने … Read more