अब आंसू और नहीं गिरने दूंगी – कामिनी मिश्रा कनक : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: राजकमल जी के घर में मेहमानों का आना जाना शुरू हो गया और हो भी क्यों नहीं उनके इकलौते बेटे की जो शादी थी पूरे गांव मोहल्ले में खबर फैल गई थी कि राजकमल जी बेटे का विवाह दहेज मुक्त कर रहे हैं, और बहु भी बहुत पढ़ी-लिखी ले कर आ … Read more

छुईमुई सी लड़की – डॉ. पारुल अग्रवाल : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: आज निवेदिता की सेना की ट्रेनिंग पूरी हो गई थी। आज पासिंग आउट परेड के बाद वो सेना में लेफ्टिनेंट बन जायेगी और देश के लिए अपने फर्ज़ निभायेगी। आज का दिन उसके लिए सपने जैसा था। पासिंग आउट परेड के पूरा होते-होते शाम हो गई। इस परेड का हिस्सा बनने … Read more

यादें ” – उमा वर्मा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi:  सीमा घर में अकेली बैठी है ,परिवार बाहर गया हुआ है ।जब भी वह अकेली होती है यादों के पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं ।यह अगस्त का महीना ।सोच रही है रोयें या खुशी मनाये।इसी महीने पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी, इसी महीने में बेटी इस असार संसार से चली गई … Read more

“उम्मीदों के मोती” – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: अंजलि फूट-फूटकर रो रही थी।  उसके जीवन में कभी उसकी आंखों में आंसू का एक कतरा भी उसके माता-पिता को पसंद नहीं आता था । आज उसे रोते हुए देख कर माता पिता हर्षित थे। उसकी मां मनीषा जी थोड़ा हड़बड़ाई भी तो अंजलि के पापा शम्मी जी ने मनीषा को … Read more

वो जादुई आंँगन – कविता झा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: राधिका की आँखों से आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। जब से उसके पड़ोस में रहने वाली मंजुला दीदी का फोन आया और उन्होंने उसका हाल पूछने के बाद बताया कि, ” तुम्हारे मायके वाला वो घर पिछले महीने बिक गया है जो हमारे घर के पास था, … Read more

दो पल के आंसू – गीता वाधवानी : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: दीपक-“राशि जल्दी करो यार और कितना टाइम लगाओगी। इतनी जबरदस्त सर्दी पड़ रही है हमें समय से वापस भी आना है भई।”  राशि-“इतना दूर का रिश्ता है, सर्दी के कारण ही मैं आपसे इस शादी फंक्शन को टालने के लिए कह रही थी, पर आप सुनते हैं क्या किसी की। ठंड … Read more

भविष्य निधि – शुभ्रा बैनर्जी  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi: अगस्त में पापा रिटायर होने वालें हैं।चालीस वर्षों से अनवरत कर्म को पूजा समझकर कड़ी मेहनत की उन्होंने।अपनी पूरी जवानी स्वाहा कर दी उन्होंने परिवार के लिए। अपनी तनख्वाह का अधिकतम हिस्सा जमा करते रहे वे, बच्चों के भविष्य के लिए। तीन बेटियों-रमा,उमा और श्यामा और बेटे कार्तिक के स्थापित होने … Read more

जीने का हक – विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : ” ये तू क्या कह रही है रागिनी..! नेहा का फिर से विवाह..!तू जानती नहीं कि हमारे समाज में विधवा-विवाह स्वीकार्य नहीं है।और फिर लोग क्या कहेंगे?” माधव जी बेटी पर चिल्लाये।   ”  लेकिन पापा…ये भी तो सोचिये…” ” अब कुछ सोचना- समझना नहीं है।” कहकर वे टहलने के … Read more

आँसू नहीं मोती हैं ये – पूनम अरोड़ा   : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : हाँ वो मोटी थी बचपन से ।शुरू से खाने पीने की शौकीन ,हँसने कूदने मस्ती करने वाली। इधर उधर गोलू सी मटकती फिरती ।कोई भी उसको उसके असली नाम निकिता से नहीं बुलाता था ।यहाँ तक कि घरवाले भी उसे गोलू ,गोलगप्पा ही बुलाते और दोस्त सहेलियां कोई टुनटुन  कहते … Read more

सबके लिए आँसू नहीं बहते… – रश्मि प्रकाश   : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : “ माँ चलो सब तुम्हें बुला रहे हैं ।” बेटी गौरी की बात सुन गिरिजा आँसू पोंछते हुए कमरे से निकल कर बाहर आँगन में आकर बैठ गई “ इतना काहे रो रही है गिरिजा….ऐसा लग रहा जैसे तेरी माँ मर गई है… अरे सास ख़ातिर इतना आँसू कौनों को बहाते हमने तो ना देखा .. तू बड़ी अनोखी है रे।” एक सहेली समान पड़ोसन ने कहा “ तू नहीं समझेंगी चंपा।” कह कर गिरिजा सास की फ़ोटो के सामने धूप बत्ती जला दी “ सुन कितने दिन का मातम मनाएगी… अब तो शहर जाएगी ना ?” चंपा ने पूछा  “ पता नहीं?” कहकर गिरिजा की आँखों से फिर झर-झर आँसू गिरने लगे  गिरिजा की एक जेठानी और एक ननद एक कोने में बैठ कर खुसूर  पुसूर कर रही थी । “ ये गिरिजा तो ऐसे रो रही जैसे हमारी तो वो कुछ ना लगती थी…. ये महारानी पूरे गाँव के सामने बेचारी बन रही है ।” जेठानी की आवाज़ उसके कानों में सुनाई दी “ सच कह रही हो बड़ी भाभी… मेरी तो माँ ही थी ना … अब इतनी बीमार थी … तकलीफ़ में थी अच्छा हुआ उसे मुक्ति मिल गई।” ननद ने जेठानी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा   गिरिजा ये सब सुन कर वहाँ से चुपचाप उठ कर अपने कमरे में चली गई… “काहे रोती है रे गिरिजा…. ये सब कभी हमारा रिश्ता ना समझ पाएँगी… तू इनकी बात सुन कर आँसू ना बहा।” गिरिजा को ऐसा लगा जैसे सासु माँ उसे समझाते हुए कह रही हो  “ आप मुझे फिर से अनाथ कर गई ना माँ… आप तो कहती थी मैं हमेशा तेरा साथ दूँगी…. तू मेरी बहू नहीं बेटी है बेटी।”  गिरिजा आवाज़ सुन रोते हुए बोली  इस कहानी को भी पढ़ें:  मेरे अपने… –  प्रीता जैन “ ना जाती तो कब तक तुझपे बोझ बन कर रहती … तू भी जानती है कैंसर से कोई कितना लड़ सका है… तुने कोशिश की ना मुझे बचाने की पर होनी तो होकर ही रहती है ना… तू दिल छोटा मत कर…. ना तेरे आँसू नकली है ना मेरे लिए तेरा प्यार ।” ऐसा लग रहा था गिरिजा को सासु माँ फिर से समझाने पहुँच गई है   गिरिजा अपने अतीत में पहुँच गई… … Read more

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