प्रायश्चित – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi
दरवाजे की घंटी बज रही थी,, मालती जी,, आवाज सुनकर किसी तरह बिस्तर से उठी। रात से ही, उन्हें तेज़ बुखार था, उनसे उठा नहीं जा रहा था। किसी तरह वह,, उठकर दरवाजे की ओर चलीं और साथ, साथ बड़बड़ाने लगी।इतनी सुबह कौन आ गया, इतनी जल्दी, ये तो टहल कर आयेंगे नहीं। उनके पास, … Read more