मन की गाँठ – करुणा मलिक : Stories in Hindi

दीदी ! रोमा की शादी में तो जीजा जी आए नहीं थे पर इस बार वीरेन की बारात उनके बिना नहीं जाएगी, कह देना उनको । अभी रिश्ते की बात चल रही है सिर्फ़….. इसलिए पहले से ही निमंत्रण  भेज रही हूँ अपने ननदोई को, ऐसा ना हो कि बाद में बोले , ये काम … Read more

जेवर – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

——- शादी की भीड़ और अफरातफरी में सुमन जी ने नई नवेली बहू को बड़े प्यार से समझाते हुए उसके गहने ये कहते हुए अपने पास रख लिए कि,” मैं संभाल कर रख देती हूं वरना कहीं कुछ इधर-उधर ना हो जाए रागिनी बेटा। अभी तुम इतना कुछ कहां संभालोगी? जरुरत पड़ने पर मुझसे ले … Read more

बहुरानी – खुशी : Moral Stories in Hindi

मालती देवी एक बड़ी समाजसेविका थी।उनके पति रतनलाल की बहुत बड़ी जेवरात की दुकान थी दो बेटे थे। राजन और राहुल राजन ने अपने पिताजी का कारोबार ज्वाइन कर लिया।राजन सीधा साधा था उसे घूमने का बड़ा शौक था।राहुल ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर का कोर्स किया और एक it कंपनी ज्वाइन कर ली । अब मालती … Read more

आपको बहू नहीं चलता फिरता रोबोट चाहिए – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

जल्दी-जल्दी पैकिंग करके सरला अपने मायके जाना चाह रही थी लगभग 2 साल हो गए थे मायके नहीं गई थी।  तभी मां की तबीयत खराब होती तो कभी भाई की लेकिन ससुराल से कभी भी छुट्टी नहीं मिलती ।  सरला यदि जाना चाहे तो मायके जा नहीं पाती ससुराल में इतना काम होता है।  काम … Read more

आपको बहू नही चलता फिरता रोबोट चाहिए – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

” आपको बहू नही चलता-फिरता रोबोट चाहिए, ”  सुधा अपनी दादी सास से कह रही थी।सुधा एक पढ़ी लिखी लड़की थी और सी.ए.थी। वो एक बड़ी कंपनी में कार्यरत थी।उसको अपने साथ ही काम करनेवाले माधव से प्यार होगया।दोनों एक साथ टाइम बिताने लगे।कभी कनाट प्लेस जाते,कभी किसी मॉल में घूमने चले जाते और धीरे … Read more

मन की गांठ – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

 क्यों अम्मा जी, घर में सब तो बराबर नहीं होते, ऐसा आपने ही तो कहा था। अब ननद जी की बेटी के भात के लिए आप थोड़े ही फैसला करेंगे कि कौन कितने पैसे देगा। रमन अगर ज्यादा पैसा दे रहा है तो कोई बात नहीं उसने आपसे लिया भी तो ज्यादा ही है। जाने … Read more

मन की गाँठ खुल गई – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

“मां मन को मार के खुश नहीं रहा जा सकता ये बात समझो तुम!” श्वेता अपनी मां शैलजा जी से बोली। ” तो मैं कौन सा उसका मन मार रही हूं। जो चाहती वो कर तो रही!” शैलजा जी तुनक कर बोली। ” ये मन मारना ही तो है मां … भैया को ऑफिस से … Read more

पट्टी पढ़ाना – डा० विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi

शादी की तैयारियों से शोभा जी का घर गुलजार था।रंगोली से सजे आंगन में हँसी-ठिठोली का रंग बिखरा  था। सोना की शादी को बस एक हफ्ता बचा था। शोभा जी अपनी बेटी को —ससुराल के तौर-तरीके, रिश्तों की मर्यादा और व्यवहार की बारीकियां समझा रही थीं। एक दोपहर, जब घर में सिर्फ मां-बेटी थीं, बहू … Read more

पट्टी पढ़ाना – डोली पाठक : Moral Stories in Hindi

बचपन से हीं रजत का झुकाव मां की तरफ अधिक था…  इस बात के लिए वो सदैव पिता की आंखों में खटकता था…  वो रजत की मां अरूंधति से कहा करते कि- तुमने जाने कौन-सी पट्टी पढ़ा रखी है अपने बेटे को जो पूरे दिन तुम्हारे आंचल में दुबका रहता है…  दरअसल रजत पढ़ाई में … Read more

मन की गाँठ – डॉ ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

  “आपको तो मेरी हर बात ग़लत लगती है। जब तक दीदी यहाँ नहीं आतीं तब तक तो आपको मुझसे कोई शिक़ायत नहीं होती पर जैसे ही दीदी आती हैं आपको मेरी हर बात बुरी लगने लगती है। उनके जाने के बाद तो आप मुझे डाँटने, सुनाने और झगड़ने का कोई मौका नहीं छोड़तीं।” परिधि जोर-जोर … Read more

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