घर की मुर्गी दाल बराबर :  विधि जैन : Moral Stories in Hindi

कई रिश्ते आए और कई रिश्ते चले गए पता नहीं किसकी नजर लग गई थी इस घर में मेरी बेटी का रिश्ता तय ही नहीं हो रहा है 28 साल की हो गई है पढ़ी-लिखी है दिखने में सुंदर सुशील घर घर कार्य में पूर्णता दक्ष अब कितने दिन तक इसको घर में बिठाएंगे सरला … Read more

 सम्मान की सूखी रोटी :  पूनम अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

रमा को बाजार में रुचि मिल गयी । रमा चहकते हुए उसके पास गयी और अचानक बोली , हाय रुचि कैसी है ? रुचि ने अपना नाम सुन पीछे मुड़ कर देखा और रमा को देख कर आश्चर्य चकित रह गयी  कि तुम तो कानपुर थीं यहां कैसे?  रमा बोली चलो कहीं बैठते हैं । … Read more

 फैसला :  सुनीता मुखर्जी श्रुति : Moral Stories in Hindi

लतिका बिटिया कबे आई हो शहर से..? खेतों की पगडंडी पर चलते-चलते बगल वाली चाची ने पूछा। कल ही आयी हूँ चाची..। “अभी तो रहियो कि चली जइयो…!  “चाची परीक्षा हुई गइ है अब हीं रहिए- लतिका बोली।”  लतिका अपने गांव की एकमात्र ऐसी लड़की थी जिसने अपने गांव से बाहर निकल कर पढ़ाई की … Read more

 चलो अब जाने भी दो :  डोली पाठक : Moral Stories in Hindi

अनु को जाने क्यों बुआ के बेटे का आना बिल्कुल पसंद नहीं था। कहने को तो अभय अनु से तीन साल छोटा था परंतु उसकी हरकतें बचपन से हीं बड़ों जैसी थी,उस पर अभय का अनु को बार बार बहाने से छूना उसे विचलित कर देता..  अनु उसे हर बार टोक देती परंतु फिर भी … Read more

 “ब्रह्म विवाह” : ऋतु यादव : Moral Stories in Hindi

पचास वर्षीय स्निग्धा बरामदे में बैठ चाय पी रही थी कि अचानक दरवाज़े की घंटी बजी और दूर से जेठानी हेमल आती नज़र आई। दोनों मुस्कुराकर गले लगी। हेमल, “तो कैसी चल रही है, शादी की तैयारी? स्निग्धा,”कैसी तैयारी चलेगी, आपसे कुछ छिपा है क्या?” हेमल,” तुझे दुखी रहने का शौक है क्या? चल छोड़। … Read more

 प्रलोभन : डॉ संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

सुबह से ऑफिस के कामकाज से थक हार कर निकिता अभी थोड़ा सुस्ताने लगी थी, उसके एक हाथ में कॉफी का मग था व कानों में लीड लगाकर वो अरजीत सिंह की गजल सुन रही थी कि उसकी बहन ने आकर कहा … दीदी! लीजिए..आज की पोस्ट्स.. ओह!अभी इन्हें भी चैक करना है..आज बहुत थक … Read more

 आज बन पाई हूं सही मायने में इस घर की बहू और भाभी : मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

डोरवेल बजी तो प्राची ने दरवाजा खोला सामने अंकिता खड़ी थी । झटके से प्राची के गले लग गई भाभी भाभी,,,,,,,,,,,।इस अप्रत्याशित घटना से प्राची थोड़ा अचकचा गई क्योंकि अंकिता कभी प्राची को भाभी नहीं कहती थी। हमेशा नाम लेकर बुलाती थी और ताने देती रहती थी और तीखे शब्दों में ही प्राची से बात … Read more

 “कितना अद्भुत होता है ना?” : दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

बीज से अंकुर फूटता है, धीरे-धीरे नन्हीं-नन्हीं पत्तियाँ निकलती हैं, फिर कली खिलती है… और अंततः बनता है एक सुंदर पुष्प। कहते-कहते वह खिलखिला उठी, कुछ क्षण रुकी और बोली — “देखो मम्मी, अभी कुछ दिन पहले इस अनार के पौधे में ये रेड-ऑरेंज सी कलियाँ खिली थीं। आज देखो, इसकी एक-एक परत जैसे आत्मा … Read more

 बहू भी इंसान है : विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

      “ सुनो जी, अब तो अभि की शादी कर ही देनी चाहिए, तीस का होने वाला है” रेवती ने पति नवेंदु को जूस का गिलास पकड़ाते हुए कहा। “ अरे भई, मैनें कब मना किया, मेरे गले में तो यह ढ़ोल बाईस की उम्र में ही बांध दिया गया था, नवेदुं ने चुटकी लेते हुए … Read more

 रोटी : खुशी : Moral Stories in Hindi

सुधाकर सिंहा एक सरकारी दफ्तर में काम करते थे।पत्नी नीला वो एक गृहणी थी दो बेटे थे रमन और नमन हसी खुशी गृहस्थी चल रही हैं बच्चे भी संस्कारी देखते मां बापूजी कैसे पैसे बचा कर उन्हें पढ़ा रहे हैं।सुधाकर जी ने अपनी नौकरी में ही जमीन लेकर घर बनवा लिया था।नीचे ड्राइंग रूम एक … Read more

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