सास बनते ही क्यूं बदल गई मां?? – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

सुरेखा जी से तो अपनी खुशी थामे नहीं थम रही थी और हो भी क्यों ना! नई ब्याहता बिटिया सिमरन और दामाद मानवेन्द्र घर जो आ रहे हैं! अपनी पड़ोसन को चहकते हुए बता रही थी। बेटी घूमने निकली थी तो थोड़ा सा रुट चेंज करके बीच में दो दिन के लिए मायके भी रुकने … Read more

इन बूढ़ी आँखों ने सबसे अटूट रिश्ते को टूटते देखे हैं – कामिनी मिश्रा : Moral Stories in Hindi

काश कि उस वक्त मैं तेरी माँ को नहीं रोकती ,  उसे मोहित के साथ जाने देती , तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता….. अपनी लाचारी दिखाकर मैंने तेरी माँ का घर बर्बाद कर दिया इतनी भी मैं बीमार नहीं थी कि मैं कुछ कर नहीं सकती थी  ।  इन आँखों ने अपने ही … Read more

सरप्राइज – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“मना किया था तुम्हें… मत लादो इतना सामान… पर तुम्हारी तो जैसे कुछ समझ में ही नहीं आता… अब उठाओ तो अपना बैग… उठा पाओगी… कहां आया तुम्हारा बेटा… बड़ी शान से बोल रही थी… आपको नहीं उठाना पड़ेगा… मेरा बेटा खुद उठा कर ले जाएगा… अब क्या हुआ…?” ” सामान क्या… वह तो मुझे … Read more

तुम मेरे साथ ऐसा व्यवहार करोगे मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

जैसेही रवि ऑफिस से घर आया , वह समझ गया आज फिर घर में कुछ हुआ है। हुआ क्या होगा संध्या ने फिर कुछ उल्टा सीधा कह दिया होगा माँ को और शिखा को, पिछले 1 साल से यही सब तो चल रहा है इस घर में। उसने देखा बरामदे मेंबैठा उसकी बहन का   6 … Read more

समय की माँग – श्वेता सोनी : Moral Stories in Hindi

आज कई साल बाद मायके जा रही है नंदिनी, मन में उत्साह और मायूसी के मिले-जुले भाव हैं,  कैसा मायका.. कहाँ रहे माँ-बाप और वो बहनें..  कैसा रुआसा हो आया उसकी मन. बहनें… शब्द में ही कितना अपनापा लगता है ना..  नंदिनी,नलिनी,निशा और नेत्रा.. चार बहने थीं वे.. थीं… क्योंकि अब वो बहनें नहीं रहीं.. … Read more

खोया बेटा वापस मिला – नेकराम : Moral Stories in Hindi

अम्मा मैंने शहर में एक नौकरी पकड़ ली है कंपनी वाले रहने को वही एक फ्लैट भी दे रहे हैं …. 21 वर्षीय अशोक ने अपनी मां पार्वती को थोड़ा ऊंचे लहजे में कहा तो पास खड़े बाबूजी बीड़ी सुलगाते हुए बोले गांव में जो इतनी बड़ी खेती बाड़ी है घर में चार-चार ट्रैक्टर हैं … Read more

तुम मेरे साथ ऐसा व्यवहार करोगे कभी सपने में नहीं सोचा था – प्रतिभा भारद्वाज “प्रभा” : Moral Stories in Hindi

भाभी,आप तो जानती ही हो कि हमारे घर में तीन ही कमरे हैं और प्रीती और राहुल भी अब बड़े हो चुके हैं जिनको उनकी पढ़ाई के लिए भी एक कमरे की जरूरत महसूस होती है, अगर.. आप स्टोर वाले कमरे में अपना सामान रख लें और वहां रहने लगें तो कमरों की समस्या दूर … Read more

गुदगुदी – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

देख-देख संध्या ….वो हैं क्या हमारे होने वाले जीजा जी….  धत्….. नहीं रे ….! तू अपने होने वाले पति को पहचानती भी है ना ठीक से…. फोटो तो देखी है ना…?  कॉलेज में फ्री पीरियड या ब्रेक के समय गार्डन में टहलते वक्त सहेलियां हमेशा छेड़ा करती थीं…! मेरे शहर से मात्र 28 किलोमीटर की … Read more

संवेदनहीन रिश्ते – शिप्पी नारंग : Moral Stories in Hindi

मंदिर के प्रांगण में 44 वर्षीय स्वाति की श्रद्धांजलि सभा अब समाप्ति पर थी । शांति पाठ के बाद दो मिनट का मौन खत्म होने को ही था कि निस्तब्धता को भंग करती कुछ आवाजें प्रांगण में गूंजने लगी “नहीं निखिल,  रुको निखिल,  रुक जाओ बेटा”   शांत वातावरण में ये आवाजें एक धमाका सी … Read more

गला काटना – डाॅक्टर संजु झा। : Moral Stories in Hindi

आँखें बंद कर बिस्तर पर औंधी लेटी शीला बहुत देर तक सोचती रही।आज की आँखों देखी घटना से वह हतप्रभ थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी छोटी बहन मीना को दोषी माने या अपने पति अनिल को!जिस पति पर वह आँख मूँदकर भरोसा करती थी, जिस बहन को अपनी जान से ज्यादा … Read more

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