सिर्फ बहू से बेटी बनने की उम्मीद क्यों? – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

सुधा की नजरें बहुत देर से एक माॅं- बेटी की जोड़ी पर टिकी हुई थी। वह उन्हें पहचानने की कोशिश कर रही थी। “माॅं, प्लीज मान जाइए ना। यह लाल रंग की ड्रेस आप पर बहुत अच्छी लगेगी।” “देख बेटा, जिद मत कर। मैंने कह दिया ना मैं इतना ब्राइट कलर नहीं पहनूॅंगी। बिल्कुल बूढी … Read more

रिश्तों पर पड़ीं धुंधली परत…. – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“आइने गुज़रा हुआ वक़्त नहीं बताया करते सुमन….हम उसको पकड़ कर बैठे रहते हैं… जो हो गया जो बीत गया बस वो हमारे मानस पटल पर ऐसे अंकित हो जाते हैं कि हम चाहकर भी उनसे अलग नहीं हों पाते हैं ….देखो ना तुम आज भी छोटी के व्यवहार को लेकर दुखी होकर बैठ गई … Read more

सड़क की बंजारन – नेकराम : Moral Stories in Hindi

सीतामड़ी अपने मोहल्ले का एक धनवान व्यक्ति था घर में एक सुंदर सी पत्नी कौशल्या थी और एक सात बर्ष की काव्या नाम की पुत्री थी सीतामड़ी हमेशा ही गरीबों से दूरी बनाकर रखता था उसे गरीबों से बहुत नफरत थी उसके आंगन में चमचमाती एक सफेद रंग की कार हमेशा खड़ी रहती थी चांदनी … Read more

तीन जोड़ी भूखी आंखें – रेणु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“अरे मन्नी, आज चटनी मत बनइयो  री। वह दो नंबर वाली के महीने भर की मलाई इकट्ठी हो गई है। कल उसका दही भी जमा दिया। अभी जाकर उससे घी  निकालना है। खूब बड़ा भगोना भरकर छाछ  लाऊंगी आज तो।  दस रुपयों  का बेसन और पांच पांच रुपयों का जीरा और  साबुत लाल मिर्च ले … Read more

खुश रहने को एक वजह काफी है । – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” क्या बात है पल्लवी आजकल बड़ी सुस्त सी रहती है तू ऑफिस में ….सब ठीक तो है ना?” चाहत ने पूछा। “हां चाहत बस सब ठीक ही है!” पल्लवी फीकी हंसी हंसते हुए बोली। ” चल कैंटीन में चलकर एक एक कप काफी पीकर आते है!” चाहत उसका हाथ पकड़ कर बोली। ” नहीं … Read more

रिश्तो में गलतफहमी की गुंजाइश न हो – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

क्या बात है चारु…  आज तुमने अपनी भाभी को जन्मदिन का ना कोई मैसेज भेजा ना फोन किया और न हीं स्टेटस लगाया, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है या फिर कुछ भाभी से अनबन हो गई, रितेश ने अपनी पत्नी चारु से पूछा! नहीं तो.. ऐसी तो कोई बात नहीं है बस मन नहीं किया … Read more

“रिश्तों में बढ़ती दूरियाँ” – समिता बडियाल : Moral Stories in Hindi

`सलोनी और सोमेश, अजीत और गीता के दो बच्चे थे। दोनों होनहार और पढाई में अब्बल। संस्कार तो कूट -कूट कर भरे थे। कभी पलटकर जबाब नहीं देते सलोनी नाम के जैसे साँवले रंग की , तीखे नैन -नक्श , कमर तक लम्बे बाल, आँखों में हल्का सा काजल। बहुत सुंदर लगती। माँ गीता तो … Read more

प्रायश्चित – रेणु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

हनी ने एयरपोर्ट पर भारी मन से अपनी मौम और डैड से हाथ हिला कर विदा ली। उनके एयरपोर्ट के भीतर जाते ही उसके मन का सारा संताप अश्रुधारा के रूप में उसकी आँखों की राह बह निकला। बड़ी ही मुश्किल से अपने आप को संयत कर वह एयरपोर्ट से बाहर आई। वहाँ से घर … Read more

*अनुभूति* – मधुलता पारे : Moral Stories in Hindi

मंदिर की घंटियों की आवाज से अन्विता की नींद खुली देख कमरे में झकाझक उजाला फैला था । उसकी कल की थकान अभी तक नहीं उतरी थी। पर बहुत काम पड़ा था पर उठना जरूरी था। असल में रवि का ट्रान्सफर प्रदेश की राजधानी में प्रमोशन पर हुआ था। कल ही वे लोग इस घर … Read more

खुशियों के दिये – सुधा शर्मा : Moral Stories in Hindi

 कितना खूबसूरत है चारों तरफ रोशनी का नजारा ।कमला ने  शिवनाथ जी को शाल उढाते हुए कहा ,” अन्दर चलो , ठंड होने लगी है ।” “थोडी देर बैठो यहीं , कितनी सुन्दर रोशनी करी है सब ने   ।परसों  दीवाली है , कल मै भी थोड़ी सी लाइट लगा लूँगा ।”       ” मन नहीं … Read more

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