संकोच की बेड़ियां – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

सुदीप्ता घर की छोटी बेटी थी। मम्मी-पापा और दो साल बड़ा एक भाई थे परिवार में।पिता ने कड़ी मेहनत से कस्बे में अपना व्यवसाय स्थापित किया था,जिसमें अब सुदीप्ता के भाई(आशीष)भी अपना योगदान दे रहे थे। सुदीप्ता पढ़ने में शुरू से होशियार थी।परिवार की  किसी भी बेटी को बाहर पढ़ने नहीं भेजा गया था। सुदीप्ता … Read more

महकते रिश्ते – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

रूप और गुण की खान थी नीति, जो भी उससे मिलता उसकी प्रशंसा किये बिना नहीं रह पाता| उसके इन्हीं गुणों पर रीझ कर प्रियांशु ने उसे अपनी जीवन-संगिनी के रूप में चुना था| लेकिन, नीति के यही गुण उसकी सास शीला के गले में फांस की तरह चुभ रहे थे| उनको ये बात बिलकुल … Read more

मायके से पराई होकर भी ससुराल की कहांं हो पाती हैं बेटियां?? – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

“आज कितनी ठंडक है ना काकी ।,, ” हां बहुरानी, ठंड तो बहुत हो रही है आज .. अचानक से मौसम बदल गया । तूं रजाई अच्छे से ओढ़ ले और लल्ला को भी छिपा ले…. जापे के कच्चे शरीर में एक बार ठंडी हवा लग गई तो जिंदगी भर परेशान करेगी…. ,, ” हां … Read more

बंद मुट्ठी के रिश्ते – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

आज सुमी के आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। पति बच्चे सब चुप करा कर थक गये पर वो बार बार यही बोल रही थी क्या कमी कर दिया रिश्ते निभाने में जो आज ये सिला मिला। जब से शादी कर के इस घर में प्रवेश किया सबको अपना समझती रही, उनकी परेशानी … Read more

छोटी बहू – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

” विगत का सोचती हूँ तो एक सलाम खुद के लिये बनता है, “पीछे कुछ आवाजें अभी भी कानों में शोर मचाती हैं। “हमारी ही किस्मत खराब थी जो ऐसी बालिका वधु से पाला पड़ा, माँ ने कुछ सिखाया नहीं, और मुझे इस बहू के आने से भी आराम नहीं, ऊपर से बच्चों की तरह … Read more

पैसे का गुरुर – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

“हेलो शुभी आज ऋचा दीदी का फ़ोन आया था वो लोग यहाँ आए हुए हैं। शाम को अपने घर आएंगे। नाश्ते की तैयारी करके रखना। इसलिए तुम्हें फोन किया।” रोहन अनमने मन से बोला  “ठीक है जी।” कहकर शुभी ने फोन रख दिया।  ऋचा दीदी के आने की खबर सुनकर शुभी को बड़ा आश्चर्य हुआ … Read more

जीत विश्वास और समर्पण की – बीना शर्मा  : Moral Stories in Hindi

सुकन्या अपने पापा के साथ भरी पंचायत में खड़ी होकर अपने पति श्रीधर का इंतजार कर रही थी। वह मन ही मन सोच रही थी यदि श्रीधर ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया तो उसका क्या होगा? यदि वह उससे किए वादे से मुकर गया तो उसके विश्वास और समर्पण का क्या होगा? इसी … Read more

भुक्तभोगी – अर्चना सिंह  : Moral Stories in Hindi

तूलिका सुबह से तरह – तरह के व्यंजन बनाने में लगी थी । यूँ तो दिल से बुरी नहीं थी वो पर ससुराल वालों के पुराने व्यवहार की टीस उसे कभी – कभी बुरा बनने पर मजबूर कर देती थी । आज तूलिका की सासु माँ पूर्णिमा जी और अविवाहित ननद कृति आने वाले थे … Read more

प्रायश्चित – सरोज देवेश्वर : Moral Stories in Hindi

आज बेटी पराई हो जाएगी. ये सोचकर सुधा कुछ उदास सी हो गई. वो दिल का टुकड़ा जिसे रात रात भर जागकर पाला. कितनी कमजोर थी. डॉक्टर ने भी उसके पैदा होने  पर कोई  संतोषजनक उत्तर नहीं दिया था. फिर भी उसनेआशा नहीं छोड़ी थी. डॉक्टर्स की दी हिदायतों का अक्षरशः पालन  किया. वसुधा के … Read more

वैंटीलेटर – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

कमरे में धीमी रौशनी वाला बल्ब जला हुआ था। सामने की दीवार पर एक बत्तीस इंच का एल ई डी टीवी टंगा था जो इस समय बंद था। दायीं तरफ की खिड़की पर एक कूलर धीमी गति से ठंडी हवा फेंक रहा था। बाईं तरफ की दीवार से सटा हुआ एक दीवान था जिसपर एक … Read more

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