मुक्ति (भाग-1) – कंचन सिंह चौहान : Moral stories in hindi
हास्पिटल के उस कमरे के बेड पर पड़ा वो शरीर जिसमें खून की बोतल चढ़ रही है, उसके शरीर के रोम-रोम में सुइयों का दर्द है। उसे कुछ भी नही याद। पिछली सुबह कब हुई थी, अगली शाम कब होगी! महीनों से उसे कुछ पता नही। वो सन्निपात के दौर में है। लेकिन एक चीज … Read more