उड़ान – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

मुंबई की ऊॅंची चमकदार बिल्डिंग में रहने वाली नीलिमा की जिंदगी बाहर से एकदम परफेक्ट लगती थी। एक बड़े बिजनेस टाइकून की वाइफ, दो प्यारे-प्यारे बच्चे और लग्जरी लाइफ। लेकिन, अंदर ही अंदर वह अपने अधूरे पड़े सपनों की कसक लेकर जी रही थी। नीलिमा एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर थी। शादी से पहले उसने कई … Read more

संयुक्त परिवार – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

गाँव में हमारा परिवार रहता था। परिवार में मैं, मेरे माता पिता, ताऊ जी ताई जी, उनका बेटा रोहन और दादा जी। मैं पढ़ाई में बहुत तेज था और रोहन औसत था। रोहन मुझसे 1 क्लास आगे था पर मैं उसका भी होमवर्क करता था। हम दोनो भाई से ज्यादा दोस्त थे। दादा जी के … Read more

*अन्याय के विरुद्ध जंग* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

         यूँ तो संदीप काफी पहले से ही परेशान था,पर कुछ न कर पा सकने की मानसिकता और साहस की कमी उस में हीन भावना भरती जा रही थी।संदीप एक मेधावी छात्र था,हमेशा टॉप करता,खूब मेहनत करके वह अपनी स्थिति को कायम रखना चाहता था।पर वह देख और समझ रहा था कि देवकीनंदन सर   उनसे … Read more

आखिरी फैसला – अपर्णा गर्ग : Moral Stories in Hindi

अरी करमजली कहां रह गई, सूरज सिर पर चढ़ने को तैयार बैठा हैं, और तूने मुझे अभी तक चाय नहीं दी। तेरा बस चले तो मुझे भूखा ही मार दे। अभी सात भी नहीं बजे और तुम्हारी मां ने रोज की तरह चिल्लाना शुरू कर दिया। मैं भी क्या क्या करूं…सुबह पहले पानी गरम करो, … Read more

वक्त – चम्पा कोठारी : Moral Stories in Hindi

लगभग 30 वर्ष पुरानी सच्ची घटना है। विमला जी दीवाली की तैयारी में व्यस्त थी। ठीक दीवाली का दिन था। उनके पति किशोर जी एव्ं दोनों बेटे अनुपम , आशीष  और बेटी आराधना उनके काम में हाथ बँटा रहे थे। अंदर पकवान की तैयारी चल रही थी। बाहर  बेटी आराधना के द्वारा  रंगोली सजाई जा … Read more

अभागिन – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

   बस…. मां… बस…..अब एक शब्द भी मत बोलना ….नहीं सुन सकूंगी अब ……और तू चिंता मत करना मां ….. ये बड़ा अटैची देखकर ये मत सोच लेना कि अब मैं यही रहूंगी…. कुछ दिनों के लिए आई  हूं मां ….हां कुछ दिनों के लिए  ही आई हूं… कहते कहते आंचल का गला भर आया…! अरे … Read more

जीना तो होगा – प्राची अग्रवाल  : Moral Stories in Hindi

शोभा और राजेश की गृहस्थी की गाड़ी सुचारू रूप से चल रही हैं। दोनों की शादी को 28 साल पूरे होने को आए। दोनों ने ही सदैव घर परिवार बच्चों के लिए स्वयं को समर्पित किया है। दोनों बच्चे पढ़ लिख कर ऊंची नौकरियों पर बड़े शहरों में सेटल हो गए हैं। बच्चे कामयाब भी … Read more

आखिरी फैसला – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

मायके से पॉच महीने के हार्दिक को लेकर लौटी मैथिली को स्टेशन पर ही जब परिमल ने अपनी बॉहों में भर लिया तब वह प्रसन्नता से खिल उठी। घर आकर  बुरी तरह गन्दा और बिखरा हुआ घर देखकर उसकी सारी खुशी उड़ गई। परिमल ने जब उसे बताया कि उसके जाने के बाद कौशल्या ने … Read more

पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई क्यों – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

राधा…. ओ राधा। अरी कहां है सारा दिन मौहल्ले के बच्चों के साथ धमा-चौकड़ी मचाती फिरती है। पिता का स्वर सुनकर 13 बर्ष की राधा को घर के भीतर आना ही पड़ा। “अरी ब्याह की उम्र हो चली है तेरी अगले माह लगन है”। पास-पड़ोस के लोग ताने मारने लगे हैं , लड़की घर में … Read more

लक्ष्य – मनीषा सिंह   : Moral Stories in Hindi

 “सुखिया की उम्र यही कोई 50- 55 के आसपास थी वह गांव का मेहनती ईमानदार और सीधा-साधा व्यक्ति था जो गांव के मुखिया बंसी लाल जी के यहां खेती-बाड़ी का काम देखता ।पत्नी को मरे 20 साल हो गए उसकी एक बहुत ही प्यारी बेटी लाजो जो 2 साल की थी। मरने की समय लाजो … Read more

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