आशीर्वाद – गरिमा चौधरी

“वाह री नई बहू! सुबह-सुबह सोफे पर पैर चढ़ाकर बैठी है, हाथ में मोबाइल, सामने लैपटॉप… और सासू माँ वहाँ किचन में बर्तन खटखटा रही हैं। ज़रा-सा भी ख्याल नहीं कि घर में बड़ों की भी कोई ज़रूरत होती है कि नहीं!” शारदा चाची ने ड्राइंग रूम से ही ऊँची आवाज़ में कहा ताकि उनकी … Read more

बहू सिर्फ़ काम करने के लिए नहीं होती – आरती कुशवाहा

सुबह के दस ही बजे थे, पर शर्मा हाउस में शोर ऐसा था जैसे पूरा मुहल्ला जुट आया हो। ड्रॉइंग रूम में बड़े से स्पीकर पर गाने बज रहे थे, किचन में गैस पर एक साथ तीन-तीन बर्तन चढ़े थे, और आँगन में प्लास्टिक की कुर्सियाँ पोंछी जा रही थीं। “अरे नेहा, जरा जल्दी कर, … Read more

घूँघट

शादी के बाद पहली बार नैना अपने पति के साथ मायके आ रही थी  नैना की भाभी( मधु)—सुबह से ही बिना रुके दौड़-भाग में लगी थी। चूल्हे पर खीर उबल रही थी, गैस पर कढ़ी चढ़ी थी और बीच-बीच में वह सजावट भी ठीक करती जा रही थी। उधर, मधु की देवरानी निधि, जो नई-नई … Read more

आप बड़ी हैं

    अपने हाथ में ‘वरिष्ठ नागरिक ‘का प्रमाण-पत्र देखकर कामिनी खुशी-से झूमने लगी।आज वो सचमुच की बड़ी हो गई थी।अब वो भी बड़ी कहलाएगी..उसे भी सम्मान मिलेगा जिसके लिये वो बरसों से…हाँ,बरसों से ही तो तरस रही थी…।          तीन भाई-बहनों में वो सबसे छोटी थी।उससे बड़े राजेश भईया थे और सबसे बड़ी थीं रागिनी दी।घर में … Read more

संयम जरूरी है

सुबह के सात बजे होगें, शनिवार की सुबह, नीरजा चाय बनाने के लिए रसोई में गई ही थी कि मोबाईल बज उठा, देखा तो मिनी का फोन था, मिनी यानि की नीरजा और लोकेश की लाडली बेटी। इतनी सुबह फोन और वो भी शनिवार को, मिनी तो छुट्टी वाले दिन दस बजे से पहले बिस्तर … Read more

रिटायरमेंट औरतों के नसीब में कहां?

सोनाली! मम्मी पापा! आज तीर्थ से लौट रहे हैं, तो खाना जल्दी बना लेना, ताकि वह आकर नहा धोकर खाना खाकर, आराम कर सके। मयंक ने अपनी पत्नी सोनाली से कहा.. सोनाली:  तीर्थ से ही लौट रहे हैं ना? कोई जंग जीत कर नहीं? आप तो ऐसे बोल रहे हैं, जैसे मैं तो पूरे दिन … Read more

( ना ) जायज़ रिश्ते 

गुड़गांव की आई.टी. सेक्टर की बड़ी कंपनी में शालीन और शैलजा काम करते थे. दिल्ली और एनसीआर में ही नहीं, सभी बड़े शहरों में और अब तो कस्बों और गांवों में भी अनेक प्रेम कहानियां रोज ही बनती और बिगड़ती रहती हैं. मैट्रो ट्रेन में, कैंटीन में, बस स्टॉप पर और ऑफिस में रोज ऐसी … Read more

तुमसा नहीं देखा भाग – 42 – अनु माथुर : Moral Stories in Hindi

यशिका अपना ऑफिस शिफ्ट करती है और अभिमन्यु देविका को मिलने के लिए बोलता है अब आगे : यशिका सुबह अपने नए ऑफिस में पहुँचती है वहां अमर पहले ही पहुँच गया था और अपनी निगरानी में वो सब कुछ सेट करवा रहा था । दिनेश और बाक़ी स्टाफ भी था जो सब चीजों को … Read more

तुम सा नहीं देखा भाग – 2 – अनु माथुर : Moral Stories in Hindi

यशिका को शाह ग्रुप से फोन आता है कि उन्हें ये प्रोजेक्ट मिल गया है और दूसरी तरफ रंधावा कंस्ट्रक्शनस को जो कि इतना बड़ा ग्रुप है उनको प्रोजेक्ट नहीं मिलता । अब आगे.. शौर्य तेज़ी से गाड़ी ड्राइव करता हुआ आधे घंटे में एक घर के सामने आकर रुकता है  गेट पर बड़े बड़े … Read more

आप अपने बेटे के साथ क्यों नहीं रहते – मंजू ओमर 

अरे शर्मा जी कब आए बेटे के यहां से,कल ही आया हूं। शर्मा जी दूध लेने को आए थे स्टिक का सहारा लेकर जाने लगें तो गुप्ता जी ने कहा लेकिन अब आपको अकेले यहां नहीं रहना चाहिए । देखिए आप ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं । वहां कम से कम बहू … Read more

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